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Pilibhit News: पीटीआर में इको सेंसिटिव जोन को जल्द मिल सकती है मंजूरी
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के आसपास इको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से उठाई गई आपत्तियों का निस्तारण कर लिया गया है। अब जल्द ही मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद पीटीआर की जंगल सीमा से एक से दो किलोमीटर का क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन में आ जाएगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास इको सेंसिटिव जोन अधिसूचित करता है। इसका उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों के निकट होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को सुरक्षित रखना है। लगभग 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व को लेकर पूर्व में भी इको सेंसिटिव जोन घोषित करने के प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी थी। पूर्व वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पीटीआर प्रशासन ने जंगल सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे को इको सेंसिटिव जोन मानते हुए पक्के निर्माण पर रोक लगा दी थी, इससे विरोध की स्थिति बनी थी।
इसके बाद नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर जंगल सीमा से दो किलोमीटर के दायरे को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की संस्तुति की गई। चूंकि पीटीआर की सीमा उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटी हुई है, इसलिए उत्तराखंड वन विभाग की सहमति भी ली गई, जो अब प्राप्त हो चुकी है। इको सेंसिटिव जोन घोषित होने के बाद संबंधित क्षेत्र में पक्के निर्माण पर प्रतिबंध रहेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि प्रस्ताव से जुड़ी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही इको सेंसिटिव जोन को लेकर नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। संवाद
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास इको सेंसिटिव जोन अधिसूचित करता है। इसका उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों के निकट होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को सुरक्षित रखना है। लगभग 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व को लेकर पूर्व में भी इको सेंसिटिव जोन घोषित करने के प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी थी। पूर्व वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पीटीआर प्रशासन ने जंगल सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे को इको सेंसिटिव जोन मानते हुए पक्के निर्माण पर रोक लगा दी थी, इससे विरोध की स्थिति बनी थी।
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इसके बाद नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर जंगल सीमा से दो किलोमीटर के दायरे को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की संस्तुति की गई। चूंकि पीटीआर की सीमा उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटी हुई है, इसलिए उत्तराखंड वन विभाग की सहमति भी ली गई, जो अब प्राप्त हो चुकी है। इको सेंसिटिव जोन घोषित होने के बाद संबंधित क्षेत्र में पक्के निर्माण पर प्रतिबंध रहेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि प्रस्ताव से जुड़ी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही इको सेंसिटिव जोन को लेकर नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। संवाद
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