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आमदनी तो बढ़ी पर पर्यटकों की संख्या नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:40 PM IST
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पर्यटन
- फोटो : pilibhit, beureu
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टाइगर रिजर्व का जंगल और इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच पर्यटकों के लिए बुधवार शाम से बंद हो चुका है। इको टूरिज्म स्पॉट की आमदनी पर गौर करें तो इस सीजन में आय बढ़कर 28,30,900 रुपये जरूर हो गई, लेकिन पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में यह पिकनिक स्पॉट नाकाम ही रहा। वहीं पिकनिक स्पॉट के 15 नवंबर तक बंद होने से अंतिम दिन गाइड और कर्मचारी भी मायूस दिखे।
टाइगर रिजर्व के जंगल और जंगल क्षेत्र में स्थित चूका बीच में बुधवार अंतिम दिन मौमस के बिगड़े मिजाज के बावजूद बड़ी संख्या में पर्यटकों ने पहुंचकर यहां का आनंद लिया। वन विभाग ने भी सभी हट आम पर्यटकों के लिए खोल दी थीं। जंगल क्षेत्र में बहुत से पर्यटकों ने गाइडों के साथ घूमकर वन्यजीव देखे।
राजस्व का आंकड़ा तो बढ़ा पर्यटकों को नहीं लुभा सके
इस वर्ष चूका बीच के हटों की बुकिंग से 328500 रुपये, बसों से 42500, मिनी बसों से 21600 सहित कुल 2830900 रुपये गेट नंबर चार से आमदनी हुई। इसमें 2357 कारें एवं 1080 बाइक से भी पर्यटक पहुंचे। वहीं गेट नंबर एक से 2,20000 रुपये की आमदनी हुई। इस तरह राजस्व का आंकड़ा तो इस वर्ष तो काफी अधिक हो गया, लेकिन पर्यटकों की संख्या पर नजर डाली जाए तो इस वर्ष 13335 पर्यटक आए। राजस्व का आंकड़ा तो इसलिए बढ़ा, क्योंकि यहां दुधवा पार्क की तरह दरें बढ़ा दी गई थीं। पर्यटकों की संख्या पर नजर डालें तो वर्ष 2011-12 में 13003 पर्यटक चूका बीच आए थे। इस लिहाज से यहां पर्यटकों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हो सकी।
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पहले पर्यटक हरजीत और अंतिम रहे बरेली के रजत
चूका बीच में इस सीजन पहले पर्यटक के तौर पर शाहजहांपुर के हरजीत सिंह रहे थे, वहीं बुधवार को अंतिम दिन बरेली के अशोक नगर निवासी रजत की इंट्री दर्ज की गई।
सिर्फ निर्देश दिए और चले गए
इस वर्ष यहां पर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन समेत प्रदेश के कई मंत्रियों ने यहां की वादियों का लुत्फ उठाया। कई मंत्रियों ने भ्रमण के दौरान यहां हट बढ़ाने के निर्देश दिए थे। वहीं मुख्य सचिव भी गैंडा परियोजना लागू करने की घोषणा कर गए थे। बावजूद इसके पूरे वर्ष टाइगर रिजर्व के जंगल में पर्यटकों की सुविधा के लिए कोई ऐसे कार्य नहीं किए गए, जिससे पर्यटक प्रभावित होते और उनकी संख्या में खास इजाफा होता। हालांकि अधिकारी, जनप्रतिनिधि और उनसे जुड़े लोग बड़ी संख्या में नि:शुल्क यहां आते जाते रहे।
अंतिम दिन गाइड और कर्मचारी दिखे मायूस
कई माह तक चूका बीच में पर्यटकों की आमद से चूका बीच गुलजार रहा। यह इलाका ग्राम वन समिति मुस्तफाबाद के अधीन है। कैंटीन का भी संचालन ग्राम वन समिति ही करती है। उधर, अंतिम दिन कर्मचारियों और गाइडों की आमदनी 15 नवंबर तक बंद होने से उनके चेहरों पर मायूसी दिखी।
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टाइगर रिजर्व के जंगल और जंगल क्षेत्र में स्थित चूका बीच में बुधवार अंतिम दिन मौमस के बिगड़े मिजाज के बावजूद बड़ी संख्या में पर्यटकों ने पहुंचकर यहां का आनंद लिया। वन विभाग ने भी सभी हट आम पर्यटकों के लिए खोल दी थीं। जंगल क्षेत्र में बहुत से पर्यटकों ने गाइडों के साथ घूमकर वन्यजीव देखे।
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राजस्व का आंकड़ा तो बढ़ा पर्यटकों को नहीं लुभा सके
इस वर्ष चूका बीच के हटों की बुकिंग से 328500 रुपये, बसों से 42500, मिनी बसों से 21600 सहित कुल 2830900 रुपये गेट नंबर चार से आमदनी हुई। इसमें 2357 कारें एवं 1080 बाइक से भी पर्यटक पहुंचे। वहीं गेट नंबर एक से 2,20000 रुपये की आमदनी हुई। इस तरह राजस्व का आंकड़ा तो इस वर्ष तो काफी अधिक हो गया, लेकिन पर्यटकों की संख्या पर नजर डाली जाए तो इस वर्ष 13335 पर्यटक आए। राजस्व का आंकड़ा तो इसलिए बढ़ा, क्योंकि यहां दुधवा पार्क की तरह दरें बढ़ा दी गई थीं। पर्यटकों की संख्या पर नजर डालें तो वर्ष 2011-12 में 13003 पर्यटक चूका बीच आए थे। इस लिहाज से यहां पर्यटकों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हो सकी।
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पहले पर्यटक हरजीत और अंतिम रहे बरेली के रजत
चूका बीच में इस सीजन पहले पर्यटक के तौर पर शाहजहांपुर के हरजीत सिंह रहे थे, वहीं बुधवार को अंतिम दिन बरेली के अशोक नगर निवासी रजत की इंट्री दर्ज की गई।
सिर्फ निर्देश दिए और चले गए
इस वर्ष यहां पर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन समेत प्रदेश के कई मंत्रियों ने यहां की वादियों का लुत्फ उठाया। कई मंत्रियों ने भ्रमण के दौरान यहां हट बढ़ाने के निर्देश दिए थे। वहीं मुख्य सचिव भी गैंडा परियोजना लागू करने की घोषणा कर गए थे। बावजूद इसके पूरे वर्ष टाइगर रिजर्व के जंगल में पर्यटकों की सुविधा के लिए कोई ऐसे कार्य नहीं किए गए, जिससे पर्यटक प्रभावित होते और उनकी संख्या में खास इजाफा होता। हालांकि अधिकारी, जनप्रतिनिधि और उनसे जुड़े लोग बड़ी संख्या में नि:शुल्क यहां आते जाते रहे।
अंतिम दिन गाइड और कर्मचारी दिखे मायूस
कई माह तक चूका बीच में पर्यटकों की आमद से चूका बीच गुलजार रहा। यह इलाका ग्राम वन समिति मुस्तफाबाद के अधीन है। कैंटीन का भी संचालन ग्राम वन समिति ही करती है। उधर, अंतिम दिन कर्मचारियों और गाइडों की आमदनी 15 नवंबर तक बंद होने से उनके चेहरों पर मायूसी दिखी।