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गर्मी की शुरूआत में ही चरमराने लगी पेयजल व्यवस्था
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माधोटांडा सीएचसी परिसर में खराब पड़ा हैंडपंप।
- फोटो : PILIBHIT
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कलीनगर। गर्मी की शुरूआत में ही तापमान 41 डिग्री को छूने लगा है। दोपहर में चिलचिलाती धूप आमजन को परेशान करने लगी है। पैदल बाजार जाने वाले और बाइक से सफर तय करने वाले राहगीर हर दस मिनट में ठहरकर प्यास बुझाने को पानी तलाशने लगे हैं। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही ही कहा जाए कि गर्मी बढ़ने के बाद भी देहात क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। कलीनगर तहसील क्षेत्र में अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां हैंडपंप ही आमजन के लिए प्यास बुझाने का साधन है, लेकिन लंबे समय से हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ सही भी हैं तो उसका पानी पीने लायक नहीं है। ऐसे में राहगीरों को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
माधोटांडा, जमुनिया, मल्लपुर, नवदिया, गुलाबटांडा आदि गांव में खराब पड़े हैंडपंप को सही करने की एक बार फिर मांग शुरू हुई है। लोगों का कहना है कि गर्मी दिन प्रतिदिन बढ़ेगी। अब हैंडपंपों का सही होना जरूरी है।
केस एक - माधोटांडा सीएचसी में ही खराब पड़ा हैंडपंप, मरीज होते हैं परेशान
सीएचसी माधोटांडा में रोजाना सौ से अधिक लोगों की ओपीडी होती हैं। गर्मी में संख्या और भी बढ़ने लगी है। अस्पताल आने वाले मरीजों को पेयजल की सुविधा के लिए हैंडपंप लगा है, लेकिन लंबे समय से हैंडपंप खराब पड़ा है। अस्पताल के स्टाफ ने हैंडपंप को दुरूस्त कराने के लिए कई बार सूचनाएं दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में मरीजों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
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केस दो - गुलाबटांडा में खराब पड़ा नल, आसपास फैली गंदगी
गुलाबटांडा गांव में पेयजल के साथ सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है। बढ़ते तापमान के चलते गर्मी लोगों को परेशान करने लगी है। पानी की जरूरत भी बढ़ रही है। लेकिन गांव में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीणों के साथ मार्ग से गुजरने वाले राहगीर भी प्यास बुझाने के लिए तड़प रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक खराब हैंड पंपों को सही कराने के लिए कई बार जिम्मेदारों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।
केस तीन - माधोटांडा मुख्य चौराहे पर एक मात्र हैंडपंप, वह भी खराब
माधोटांडा गांव की करीब तीस हजार आबादी है। थाना परिसर के निकट मुख्य चौराहे पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आना जाना बना रहता है। पानी से प्यास बुझाने के लिए चौराहे पर एक मात्र हैंडपंप हैं, वह भी लंबे समय से खराब पड़ा है। अगर किसी व्यक्ति को पानी पीना हो तो उसे करीब दो मिनट तक हैंडपंप चलाना पड़ता है। उसके बाद ही पानी कम मात्रा में बाहर निकलता है। कई बार दुकानदारों ने हैंडपंप सही कराने की आवाज उठाई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।
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माधोटांडा, जमुनिया, मल्लपुर, नवदिया, गुलाबटांडा आदि गांव में खराब पड़े हैंडपंप को सही करने की एक बार फिर मांग शुरू हुई है। लोगों का कहना है कि गर्मी दिन प्रतिदिन बढ़ेगी। अब हैंडपंपों का सही होना जरूरी है।
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केस एक - माधोटांडा सीएचसी में ही खराब पड़ा हैंडपंप, मरीज होते हैं परेशान
सीएचसी माधोटांडा में रोजाना सौ से अधिक लोगों की ओपीडी होती हैं। गर्मी में संख्या और भी बढ़ने लगी है। अस्पताल आने वाले मरीजों को पेयजल की सुविधा के लिए हैंडपंप लगा है, लेकिन लंबे समय से हैंडपंप खराब पड़ा है। अस्पताल के स्टाफ ने हैंडपंप को दुरूस्त कराने के लिए कई बार सूचनाएं दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में मरीजों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
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केस दो - गुलाबटांडा में खराब पड़ा नल, आसपास फैली गंदगी
गुलाबटांडा गांव में पेयजल के साथ सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है। बढ़ते तापमान के चलते गर्मी लोगों को परेशान करने लगी है। पानी की जरूरत भी बढ़ रही है। लेकिन गांव में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीणों के साथ मार्ग से गुजरने वाले राहगीर भी प्यास बुझाने के लिए तड़प रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक खराब हैंड पंपों को सही कराने के लिए कई बार जिम्मेदारों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।
केस तीन - माधोटांडा मुख्य चौराहे पर एक मात्र हैंडपंप, वह भी खराब
माधोटांडा गांव की करीब तीस हजार आबादी है। थाना परिसर के निकट मुख्य चौराहे पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आना जाना बना रहता है। पानी से प्यास बुझाने के लिए चौराहे पर एक मात्र हैंडपंप हैं, वह भी लंबे समय से खराब पड़ा है। अगर किसी व्यक्ति को पानी पीना हो तो उसे करीब दो मिनट तक हैंडपंप चलाना पड़ता है। उसके बाद ही पानी कम मात्रा में बाहर निकलता है। कई बार दुकानदारों ने हैंडपंप सही कराने की आवाज उठाई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।

माधोटांडा गांव के मुख्य चौराहे पर खराब पड़ा हैंडपंप।- फोटो : PILIBHIT

गुलाबटांडा गांव में खराब पड़ा हैंडपंप।- फोटो : PILIBHIT