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देवहा को प्रदूषण से बचाने में जिला प्रशासन नाकाम

पीलीभ्ाीत ब्यूरो Updated Sun, 04 Jun 2017 07:35 PM IST
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देवहा नदी में पऊफेेंका जा रहा कूड़ा
देवहा नदी में पऊफेेंका जा रहा कूड़ा

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आज विश्व पर्यावरण दिवस है। पूर्व वर्षों की भांति प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को लेकर ढिढोरा पीटा जाएगा। कुछ संकल्प भी लेगें, लेकिन हर बार की तरह यह सब कुछ एक शोर के मानिंद समझकर भुला दिया जाएगा। बानगी के तौर पर शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली देवहा नदी की बात करें तो इसे प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रतिमा विसर्जन पर तो रोक लगा दी गई, लेकिन इसमें कूड़ा डालने व नाला बहाने पर अंकुश लगाने में जिला प्रशासन नाकाम ही रहे। 
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हर दिन आठ टन कूड़े से पाटी जा रही है देवहा
सवा दो लाख आबादी वाले इस शहर में कूड़ा निस्तारण को करीब 34 अस्थाई डलावघर बने हुए हैं। पालिका के सफाई कर्मी 27 वार्डों से कूड़ा उठाकर इन्हीं अस्थाई डलावघरों में डालते हैं। हर रोज इन अस्थाई डलावघरों से करीब आठ टन कूड़ा उठाकर देवहा नदी की तलहटी में डाला जा रहा है। सालों से पड़ रहे कूड़े से नदी तलहटी का एक बड़ा भाग कूड़े से पूरी तरह से पट चुका है। यही वजह है कि आस्था से जुड़े लोगों ने अब इस नदी में स्नान आदि करना ही बंद कर रखा है। 

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दम तोड़ती रही कूड़ा निस्तारण योजना
कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात पाने को नगर पालिका प्रशासन ने गत वर्ष स्थाई डलावघर बनाने को लेकर भूमि तलाश शुरू की थी। इसके लिए गांव खरुआ, प्यास, मीरगंज चौराहा व नाकूड़ में भूमि की तलाश की गई। पालिका प्रशासन ने नाकूड़ को उपयुक्त माना, लेकिन विरोध के चलते मामला टल गया। तबसे लेकर आज तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। वहीं नदी में बदस्तूर कूड़ा डाल उसे प्रदूषित किया जा रहा है।
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भविष्य में नासूर बनेगा तलहटी में पड़ा कूड़ा
देवहा नदी की तलहटी में सालों से हर रोज टनों कूड़ा डाला रहा है। वहीं शहर भर के गंदे पानी का नाला भी इसमें बह रहा है। यूएमवी के प्रवक्ता मनोज गुप्ता की मानें तो जिस स्थान पर लंबे समय से कूड़ा डाला जाता है, उसके करीब एक-डेढ़ किमी की परिधि प्रदूषित हो जाती है। हानिकारक गैसों के उत्सर्जन से पानी व वायुमंडल भी प्रदूषित हो जाता है।
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वर्जन: 
कूड़ा निस्तारण को लेकर कई जगह चिंहित की गई थी, लेकिन इन सभी जगहों पर कुछ न कुछ दिक्कतें आ रही थी। अब एक अन्य स्थान पर भूमि चिंहित की गई है। प्रयास चल रहा है कि वहां स्थाई डलावघर बन जाए।
- प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद

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