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पड़ताल- असिसटेंट प्रोफेसर जेल में, विभागीय जांच रिपोर्ट शासन में दबी
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पीलीभीत। दुष्कर्म के आरोप में महिला महाविद्यालय का असिसटेंट प्रोफेसर जेल में है। उसके मामले में विभागीय जांच निलंबन के बाद शासनस्तर पर लंबित है। महिला महाविद्यालय में अभी तक न तो महिला शिक्षकों की तैनाती की गई और न ही यह उजागर हो सका है कि विभागीय जांच निष्कर्ष क्या है? अलबत्ता पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है जिसमें प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है। माना जा रहा है कि विभाग का नया मंत्री तय न होने के कारण इस पर फैसला नहीं हो सका है।
महिला महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान के खिलाफ 21 नवंबर 2021 को एक छात्रा ने दुष्कर्म और सेक्स रैकेट के संचालन का आरोप लगाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 26 नवंबर को डॉ. खान की गिरफ्तारी हुई। पुलिस इस मामले में आए साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सेक्स रैकेट संचालित करने के आरोप में साक्ष्य पुलिस नहीं जुटा सकी है। पुलिस की चार्जशीट में सिर्फ प्रोफेसर ही एक मात्र आरोपी है जबकि छात्रा का कहना था कि रैकेट में और लोग भी शामिल हैं। उधर, विभागीय जांच रिपोर्ट शासन में लंबित है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव शमीम अहमद का कहना है कि जल्द ही इसमें कार्रवाई होगी।
तीन महीने से ज्यादा हो गए रिपोर्ट भेजे
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दिसंबर में सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट शासन में पहुंचे हुए तीन महीने से ज्यादा बीत गए हैं लेकिन कोई कार्रवाई न होने की पीछे यही बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव घोषित होने की वजह से अधिकारी व्यस्त हो गए थे और कार्रवाई थम गई थी। अब मंत्रिमंडल का गठन हो चुका है। मंत्रियों को विभागों का आवंटन होना है। विभागों का आवंटन होने के कुछ दिन बाद यह जांच आख्या के आधार पर उच्च शिक्षा सचिव पूरे प्रकरण को मंत्री के सामने रखेंगे। इसके बाद कार्रवाई होगी।
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मैंने जांच आख्या निदेशालय को भेज दी है। अब कार्रवाई शासनस्तर से ही होनी है। जांच आख्या के निष्कर्ष गोपनीय हैं। इसलिए उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
-डॉ. संध्या रानी, उच्च शिक्षा अधिकारी, बरेली
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महिला महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान के खिलाफ 21 नवंबर 2021 को एक छात्रा ने दुष्कर्म और सेक्स रैकेट के संचालन का आरोप लगाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 26 नवंबर को डॉ. खान की गिरफ्तारी हुई। पुलिस इस मामले में आए साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सेक्स रैकेट संचालित करने के आरोप में साक्ष्य पुलिस नहीं जुटा सकी है। पुलिस की चार्जशीट में सिर्फ प्रोफेसर ही एक मात्र आरोपी है जबकि छात्रा का कहना था कि रैकेट में और लोग भी शामिल हैं। उधर, विभागीय जांच रिपोर्ट शासन में लंबित है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव शमीम अहमद का कहना है कि जल्द ही इसमें कार्रवाई होगी।
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तीन महीने से ज्यादा हो गए रिपोर्ट भेजे
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दिसंबर में सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट शासन में पहुंचे हुए तीन महीने से ज्यादा बीत गए हैं लेकिन कोई कार्रवाई न होने की पीछे यही बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव घोषित होने की वजह से अधिकारी व्यस्त हो गए थे और कार्रवाई थम गई थी। अब मंत्रिमंडल का गठन हो चुका है। मंत्रियों को विभागों का आवंटन होना है। विभागों का आवंटन होने के कुछ दिन बाद यह जांच आख्या के आधार पर उच्च शिक्षा सचिव पूरे प्रकरण को मंत्री के सामने रखेंगे। इसके बाद कार्रवाई होगी।
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मैंने जांच आख्या निदेशालय को भेज दी है। अब कार्रवाई शासनस्तर से ही होनी है। जांच आख्या के निष्कर्ष गोपनीय हैं। इसलिए उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
-डॉ. संध्या रानी, उच्च शिक्षा अधिकारी, बरेली