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पीएमओ न होता संजीदा तो उजागर न होता गोलमाल
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पीलीभीत। शत्रु संपत्ति की जमीन पर शहर के रसूखदारों का अवैध कब्जा होने के मामले में अब प्रशासनिक अमला सख्त कार्रवाई का दावा करते हुए खुद को संजीदा बताने में जुटा है। इसकी गहनता से जांच कराने की भी बयानबाजी शुरू कर दी गई है, लेकिन यह भी सच है कि प्रशासनिक अमला नींद से तब जागा, जब मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक जा पहुंचा।
तत्कालीन एक बड़े अधिकारी की मिलीभगत से हुए इस अवैध कब्जे को लेकर हर कोई चुप्पी साधे हुए था। बैनामा कराए जाने की बात तो पूरी तरह से छिपा ली गई थी। नजूल की जमीन को ध्यान योग केंद्र के लिए कुछ समय के लिए देने की बात कही गई। यही बयानबाजी कई दिनों तक चलती रही। इस बीच शिकायत पीएमओ कार्यालय पहुंच गई और वहां से इसको संज्ञान भी ले लिया गया। इसके बाद तो हल्ला सा मच गया। जो अफसर पूरे मामले को दबाने का काम कर रहे थे, वहीं अब सख्ती का दावा करने में जुट गए हैं। परत दर परत खुलती जा रही हैं।
..और बैकफुट पर आने में भी नहीं लगी थी देर
ध्यान योग केंद्र पर जब सवाल उठना शुरू हुए तो इसको लेकर कार्रवाई तो की गई लेकिन वह भी सवालों के घेरे में रही थी। रसूखदारों से प्रशासनिक अफसरों ने बातचीत कर वहां से हटने के लिए कह दिया था। इसके बाद सभी ने चुपचाप जमीन से कब्जा छोड़ भी दिया। इसके कार्रवाई और जांच करने के लिए जब सवाल हुए तो अफसर यह कहते नजर आए कि कब्जेदारों ने खुद ही जमीन खाली कर दी है, अब कार्रवाई कैसी? इस मामले को दुबारा दबाने की कोशिश शुरू कर दी गई। प्रशासन बैकफुट पर आ गया था। इस मसले पर चर्चा ही खत्म सी हो गई थी।
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वन विभाग तो हरे पेड़ों के कटान की जांच ही पूरी नहीं कर सका
इस जमीन पर हरे-भरे पेड़ भी काटे गए थे। तीस से अधिक पेड़ों के अवैध कटान की बात सामने आई तो इसकी जांच वन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई। हालांकि ये सब सिर्फ औपचारिकता से अधिक नहीं था। जांच में तथ्यों को देखने के बजाय बचाने की कोशिश ज्यादा की जा रही थी। कछुआ चाल से चल रही इस जांच को जल्द पूरा करने के दावे तो बहुत किए गए लेकिन समय के साथ शोर थमते ही इसको भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजतन आज भी जांच अधूरी है। एक तरफ पौधरोपण कर वन विभाग हरियाली का संदेश दे रहा है तो दूसरी तरफ हरियाली का कत्ल करने वालों पर शिकंजा कसने की जहमत भी नहंी उठाई जा सकी है। इस दोहरे मापदंड को भी लोग इसमें शामिल हुए रसूखदारों के रसूख से ही जोड़कर देखते रहे हैं।
तो रसूखदारों की मंशा कॉलोनी को हाईवे से जोड़ने की थी
करोड़ों की जमीन कब्जाने के पीछे शहर के रसूखदारों की मंशा पीछे की ओर चल रही प्लाटिंग को टनकपुर हाईवे से जोड़ने की थी। ध्यान योग केेंद्र बनाकर यहीं से एक रास्ता हाईवे से कॉलोनी तक पहुंचाया जाना उनके मकसद में शुमार था। प्रशासन की जांच में यह बात भी निकलकर सामने तो आई लेकिन मसला रसूखदारों से जुड़ा होने की वजह से इसको नजरअंदाज कर निगाहें फेर ली गईं थीं।
आस्था की आड़ में कब्जाई गई थी जमीन
ये पूरा प्रकरण जिले के तत्कालीन एक बड़े अफसर के संरक्षण में हुआ। बताते हैं कि अब उनकी भी मुश्किलें बढ़ती सी नजर आ रही है। यह पूरा खेल आस्था की आड़ में हुआ। कब्जाई जमीन को विनायक सेवा ट्रस्ट को दान करना दिखाकर यहां ध्यान योग केंद्र बना दिया गया। इतना ही नहीं ध्यान केंद्र के लिए डीएम आवास की चहारदीवारी के बराबर से पक्की सड़क का निर्माण भी कराया गया।
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तत्कालीन एक बड़े अधिकारी की मिलीभगत से हुए इस अवैध कब्जे को लेकर हर कोई चुप्पी साधे हुए था। बैनामा कराए जाने की बात तो पूरी तरह से छिपा ली गई थी। नजूल की जमीन को ध्यान योग केंद्र के लिए कुछ समय के लिए देने की बात कही गई। यही बयानबाजी कई दिनों तक चलती रही। इस बीच शिकायत पीएमओ कार्यालय पहुंच गई और वहां से इसको संज्ञान भी ले लिया गया। इसके बाद तो हल्ला सा मच गया। जो अफसर पूरे मामले को दबाने का काम कर रहे थे, वहीं अब सख्ती का दावा करने में जुट गए हैं। परत दर परत खुलती जा रही हैं।
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..और बैकफुट पर आने में भी नहीं लगी थी देर
ध्यान योग केंद्र पर जब सवाल उठना शुरू हुए तो इसको लेकर कार्रवाई तो की गई लेकिन वह भी सवालों के घेरे में रही थी। रसूखदारों से प्रशासनिक अफसरों ने बातचीत कर वहां से हटने के लिए कह दिया था। इसके बाद सभी ने चुपचाप जमीन से कब्जा छोड़ भी दिया। इसके कार्रवाई और जांच करने के लिए जब सवाल हुए तो अफसर यह कहते नजर आए कि कब्जेदारों ने खुद ही जमीन खाली कर दी है, अब कार्रवाई कैसी? इस मामले को दुबारा दबाने की कोशिश शुरू कर दी गई। प्रशासन बैकफुट पर आ गया था। इस मसले पर चर्चा ही खत्म सी हो गई थी।
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वन विभाग तो हरे पेड़ों के कटान की जांच ही पूरी नहीं कर सका
इस जमीन पर हरे-भरे पेड़ भी काटे गए थे। तीस से अधिक पेड़ों के अवैध कटान की बात सामने आई तो इसकी जांच वन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई। हालांकि ये सब सिर्फ औपचारिकता से अधिक नहीं था। जांच में तथ्यों को देखने के बजाय बचाने की कोशिश ज्यादा की जा रही थी। कछुआ चाल से चल रही इस जांच को जल्द पूरा करने के दावे तो बहुत किए गए लेकिन समय के साथ शोर थमते ही इसको भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजतन आज भी जांच अधूरी है। एक तरफ पौधरोपण कर वन विभाग हरियाली का संदेश दे रहा है तो दूसरी तरफ हरियाली का कत्ल करने वालों पर शिकंजा कसने की जहमत भी नहंी उठाई जा सकी है। इस दोहरे मापदंड को भी लोग इसमें शामिल हुए रसूखदारों के रसूख से ही जोड़कर देखते रहे हैं।
तो रसूखदारों की मंशा कॉलोनी को हाईवे से जोड़ने की थी
करोड़ों की जमीन कब्जाने के पीछे शहर के रसूखदारों की मंशा पीछे की ओर चल रही प्लाटिंग को टनकपुर हाईवे से जोड़ने की थी। ध्यान योग केेंद्र बनाकर यहीं से एक रास्ता हाईवे से कॉलोनी तक पहुंचाया जाना उनके मकसद में शुमार था। प्रशासन की जांच में यह बात भी निकलकर सामने तो आई लेकिन मसला रसूखदारों से जुड़ा होने की वजह से इसको नजरअंदाज कर निगाहें फेर ली गईं थीं।
आस्था की आड़ में कब्जाई गई थी जमीन
ये पूरा प्रकरण जिले के तत्कालीन एक बड़े अफसर के संरक्षण में हुआ। बताते हैं कि अब उनकी भी मुश्किलें बढ़ती सी नजर आ रही है। यह पूरा खेल आस्था की आड़ में हुआ। कब्जाई जमीन को विनायक सेवा ट्रस्ट को दान करना दिखाकर यहां ध्यान योग केंद्र बना दिया गया। इतना ही नहीं ध्यान केंद्र के लिए डीएम आवास की चहारदीवारी के बराबर से पक्की सड़क का निर्माण भी कराया गया।