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जर्जर शारदा डैम के बहुरेंगे दिन, केंद्रीय जल आयोग ने परखे हालात
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पीलीभीत। एशिया का सबसे बड़ा 22 किमी लंबा शारदा डैम मरम्मत अभाव में लंबे समय से जर्जर हालत में है। मगर अब इसके दिन बहुरने वाले है। बुधवार को केंद्रीय जल आयोग से आई एक्सपर्ट की टीम ने शारदा डैम क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर हालातों को बारीकी से परखा। जर्जर पिचिंग के अलावा जीरो से चार किमी तक डैम में भंडार सिल्ट को साफ करने की योजना बनाई। दरअसल जर्जर शारदा डैम को भारत सरकार की ड्रिप योजना में शामिल कर पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। मगर कोविड के चलते टीम का दौरा नहीं हो पाया। अब एक्सपर्ट की टीम मंडल के अफसरों के साथ निरीक्षण कर स्थिति को परखा है।
आजादी के बाद देश में लागू हुई प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम को दो चरणों में बनाया गया था। एक्सपर्ट के अनुसार उस दौरान समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 625 फुट मानी गई थी। कुछ वर्षों तक तो इस महत्वपूर्ण डैम की देखरेख पर काफी तवज्जो दी गई थी। इसकी देख रेख की जिम्मेदारी एक खंडीय और दो उपखंड कार्यालयों को सौंपी गई थी। इस डैम में भरे जाने वाले पानी से प्रदेश के एक दर्जन जनपदों की सिंचाई की जाती है। सूखा पड़ने की स्थिति में डैम के पानी के भंडार से ही सिंचाई का कार्य पूरा होता था, लेकिन डैम साल दर साल जर्जर होता गया। तेज हवा के तपेड़ों से डैम की मुख्य बॉडी के भीतरी हिस्से में सीमेंट के ब्लॉक पिचिंग और पत्थर की पिचिंग क्षतिग्रस्त होती गई। हालांकि उसके बाद प्रदेश सरकार ने कई बार मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध कराया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। अधिकांश कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता गया। इधर, लगातार करोड़ों रुपये का बजट जारी होने के बावजूद जब डैम के हालत नहीं सुधरे और पानी के साथ आने वाली रेत से डैम लगातार पटता गया। स्थिति यहां तक आ गई कि पिछले वर्षों में रुड़की स्थित अनुसंधान संस्थान की टीम ने इसका स्थलीय निरीक्षण करने के बाद सिल्ट से पटने का अनुपात निकालकर प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। शासन की ओर से जर्जर हालात देखते हुए भारत सरकार के केंद्रीय जल आयोग को पत्राचार किया था। भारत सरकार ने इसको अपनी केंद्रीय ड्रिप योजना में शामिल कर पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था। बुधवार को गठित कमेटी की टीम ने मंडल के अफसरों के साथ शारदा डैम का स्थलीय कर हालात परखे। जीरो से चार किमी तक डैम भंडार सिल्ट को देखा और कारण जाना, इसके अलावा जर्जर पिचिंग की स्थिति को परखा गया। इसके अलाव डैम के दसवें किमी पर सिंचाई विभाग की दलदल और खाली पड़ी जमीन पर पर्यटन को विकसित करने पर मंथन किया। इस दौरान सीडब्ल्यूसी के डायरेक्टर एसएन राय, पायल गोयल, रमाकांत वर्मा, चीफ इंजीनियर आरके गुप्ता, सहायक अभियंता मुकेश चंद्रा भी मौजूद रहे।
नहीं सुधर सके डैम के हालात
शारदा डैम के लिए अभी तक जीर्णोद्धार के लिए जो भी बजट मिलता रहा उसका जमकर बंदरबांट होता रहा। कभी सत्ता पक्ष के ठेकेदारों ने काम हथिया कर बजट को ठिकाने लगाया तो कभी कभी आला अफसरों ने मात्र अभिलेखों में ही काम दर्शाकर इतिश्री कर ली। नतीजतन डैम के हालात जर्जर बने रहे।
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शारदा डैम की वार्षिक रिपेयर तो कराई जाती है लेकिन पूर्व में डैम को केंद्र सरकार की डिप योजना में शामिल किया गया था। जिसके तहत एक्सपर्ट टीम ने यहां का दौरा किया। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद डैम के जीर्णोद्धार के आसार बढ़ गए हैं। - मुकेश चंद्रा, एसडीओ, शारदा सागर खंड
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आजादी के बाद देश में लागू हुई प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम को दो चरणों में बनाया गया था। एक्सपर्ट के अनुसार उस दौरान समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 625 फुट मानी गई थी। कुछ वर्षों तक तो इस महत्वपूर्ण डैम की देखरेख पर काफी तवज्जो दी गई थी। इसकी देख रेख की जिम्मेदारी एक खंडीय और दो उपखंड कार्यालयों को सौंपी गई थी। इस डैम में भरे जाने वाले पानी से प्रदेश के एक दर्जन जनपदों की सिंचाई की जाती है। सूखा पड़ने की स्थिति में डैम के पानी के भंडार से ही सिंचाई का कार्य पूरा होता था, लेकिन डैम साल दर साल जर्जर होता गया। तेज हवा के तपेड़ों से डैम की मुख्य बॉडी के भीतरी हिस्से में सीमेंट के ब्लॉक पिचिंग और पत्थर की पिचिंग क्षतिग्रस्त होती गई। हालांकि उसके बाद प्रदेश सरकार ने कई बार मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध कराया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। अधिकांश कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता गया। इधर, लगातार करोड़ों रुपये का बजट जारी होने के बावजूद जब डैम के हालत नहीं सुधरे और पानी के साथ आने वाली रेत से डैम लगातार पटता गया। स्थिति यहां तक आ गई कि पिछले वर्षों में रुड़की स्थित अनुसंधान संस्थान की टीम ने इसका स्थलीय निरीक्षण करने के बाद सिल्ट से पटने का अनुपात निकालकर प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। शासन की ओर से जर्जर हालात देखते हुए भारत सरकार के केंद्रीय जल आयोग को पत्राचार किया था। भारत सरकार ने इसको अपनी केंद्रीय ड्रिप योजना में शामिल कर पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था। बुधवार को गठित कमेटी की टीम ने मंडल के अफसरों के साथ शारदा डैम का स्थलीय कर हालात परखे। जीरो से चार किमी तक डैम भंडार सिल्ट को देखा और कारण जाना, इसके अलावा जर्जर पिचिंग की स्थिति को परखा गया। इसके अलाव डैम के दसवें किमी पर सिंचाई विभाग की दलदल और खाली पड़ी जमीन पर पर्यटन को विकसित करने पर मंथन किया। इस दौरान सीडब्ल्यूसी के डायरेक्टर एसएन राय, पायल गोयल, रमाकांत वर्मा, चीफ इंजीनियर आरके गुप्ता, सहायक अभियंता मुकेश चंद्रा भी मौजूद रहे।
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नहीं सुधर सके डैम के हालात
शारदा डैम के लिए अभी तक जीर्णोद्धार के लिए जो भी बजट मिलता रहा उसका जमकर बंदरबांट होता रहा। कभी सत्ता पक्ष के ठेकेदारों ने काम हथिया कर बजट को ठिकाने लगाया तो कभी कभी आला अफसरों ने मात्र अभिलेखों में ही काम दर्शाकर इतिश्री कर ली। नतीजतन डैम के हालात जर्जर बने रहे।
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शारदा डैम की वार्षिक रिपेयर तो कराई जाती है लेकिन पूर्व में डैम को केंद्र सरकार की डिप योजना में शामिल किया गया था। जिसके तहत एक्सपर्ट टीम ने यहां का दौरा किया। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद डैम के जीर्णोद्धार के आसार बढ़ गए हैं। - मुकेश चंद्रा, एसडीओ, शारदा सागर खंड