{"_id":"5d50564f8ebc3e6ccd347de5","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly372056253","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहब सब जानते हैं फिर भी नहीं रोक पा रहे रोडवेज में चल रहा खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहब सब जानते हैं फिर भी नहीं रोक पा रहे रोडवेज में चल रहा खेल
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पीलीभीत। पिछले दिनों आगरा में युमना एक्सप्रेस वे पर हुए हादसे में 29 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। चालक की एक झपकी ने तमाम परिवारों की खुशियां पलभर में छीन ली थीं। हादसे के बाद परिवहन विभाग के एमडी ने 300 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली रोडवेज बसों पर दो चालकों को भेजने का फरमान जारी किया, लेकिन कुछ दिन बाद ही जिले में एमडी के सख्त दावों की पोल खुलने लगी। पीलीभीत में रोडवेज अफसरों ने तो आदेशों की धज्जियां ही उड़ा दी हैं। लंबी दूरी की बसों में सिर्फ एक चालक ही भेजा जा रहा है, जबकि कार्रवाई से बचने को अभिलेखों में दो चालक दर्शाए जा रहे हैं। खास बात तो यह है कि एआरएम भी इससे वाकिफ है। उन्होंने भी यह बात स्वीकार की, लेकिन कार्रवाई की बात पर चुप्पी साध गए।
एमडी के सख्त निर्देश के बाद भी रोडवेज की बसों में यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अफसर गंभीर नहीं हैं। उनका लापरवाह रवैया आगरा हादसे के बाद भी नहीं बदल सका है। अफसर सब कुछ जानकर भी निगम व अनुबंधित बसों में यात्रियों की जान से खिलवाड़ करा रहे हैं। 300 किमी दूरी तय करने वाली बसों पर दो चालकों को भेजने के एमडी के सख्त निर्देश पर भी यहां चालकों का अभाव बताकर इसमें खेल हो रहा है, जो किसी खतरे से कम नहीं है। लंबी दूरी पर भेजी जाने वाली अधिकतर बसों पर एक चालक भेजा रहा है, जबकि अभिलेखों में दो चालकों की एंट्री की जा रही है। इससे चालकों के साथ यात्री भी सुरक्षित नहीं है। लोगों को डर सता रहा है कि आगरा जैसी घटना की पुनरावृत्ति फिर से न हो जाए। रोडवेज कर्मियों की मानें तो अफसर यदि अब भी नहीं जागे और इसी तरह सोते रहे तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अफसरों की मनमानी से डिपो में तैनात रोडवेज चालकों के अलावा परिचालक भी परेशान हैं। तमाम परिचालकों को तो नियमित ड्यूटी करनी पड़ रही है।
अनुबंधित बसों पर इस तरह चल रहा खेल
रोडवेज की अनुबंधित वोल्वो और सामान्य बसों में सबसे ज्यादा खेल चल रहा है। तीन सौ किमी पर दो चालक भेजे जाने का प्रावधान है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक चालक ने बताया कि पीलीभीत से दिल्ली तीन सौ किमी और बरेली से दिल्ली 255 किमी है। अनुबंधित बसों पर चालक की जिम्मेदारी बस मालिक की होती है। लिहाजा बस मालिक पीलीभीत से बरेली तक एक चालक भेजता है। बरेली से निर्धारित किमी कम होने पर दूसरा चालक वहां से बस लेकर रवाना हो जाता है। जबकि यहां टाइम ऑफिस में दो चालकों की ही एंट्री दर्ज की जाती है।
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मामला मेरे संज्ञान में है। मुझे कुछ दिन पूर्व अनुबंधित बसों में इस तरह के मामले की जानकारी लगी थी। अभी इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा सका है। चालक एक भेजा रहा और अभिलेख में दो दर्शाए जा रहे हैं। शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- वीके गंगवार, एआरएम
आंकड़े की नजर से
-111 बसों का बेड़ा है पीलीभीत डिपो में, इनमें 12 बसें एसी और सात बसें अनुबंधित, करीब 225 चालकों की जरूरत है पीलीभीत डिपो में, 171 चालाक तैनात हैं डिपो में, 36 चालक हैं नियमित, 135 चालक संविदा कर्मी, 8 घंटे यात्रा के बाद चालक बदलने का प्रावधान
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एमडी के सख्त निर्देश के बाद भी रोडवेज की बसों में यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अफसर गंभीर नहीं हैं। उनका लापरवाह रवैया आगरा हादसे के बाद भी नहीं बदल सका है। अफसर सब कुछ जानकर भी निगम व अनुबंधित बसों में यात्रियों की जान से खिलवाड़ करा रहे हैं। 300 किमी दूरी तय करने वाली बसों पर दो चालकों को भेजने के एमडी के सख्त निर्देश पर भी यहां चालकों का अभाव बताकर इसमें खेल हो रहा है, जो किसी खतरे से कम नहीं है। लंबी दूरी पर भेजी जाने वाली अधिकतर बसों पर एक चालक भेजा रहा है, जबकि अभिलेखों में दो चालकों की एंट्री की जा रही है। इससे चालकों के साथ यात्री भी सुरक्षित नहीं है। लोगों को डर सता रहा है कि आगरा जैसी घटना की पुनरावृत्ति फिर से न हो जाए। रोडवेज कर्मियों की मानें तो अफसर यदि अब भी नहीं जागे और इसी तरह सोते रहे तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अफसरों की मनमानी से डिपो में तैनात रोडवेज चालकों के अलावा परिचालक भी परेशान हैं। तमाम परिचालकों को तो नियमित ड्यूटी करनी पड़ रही है।
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अनुबंधित बसों पर इस तरह चल रहा खेल
रोडवेज की अनुबंधित वोल्वो और सामान्य बसों में सबसे ज्यादा खेल चल रहा है। तीन सौ किमी पर दो चालक भेजे जाने का प्रावधान है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक चालक ने बताया कि पीलीभीत से दिल्ली तीन सौ किमी और बरेली से दिल्ली 255 किमी है। अनुबंधित बसों पर चालक की जिम्मेदारी बस मालिक की होती है। लिहाजा बस मालिक पीलीभीत से बरेली तक एक चालक भेजता है। बरेली से निर्धारित किमी कम होने पर दूसरा चालक वहां से बस लेकर रवाना हो जाता है। जबकि यहां टाइम ऑफिस में दो चालकों की ही एंट्री दर्ज की जाती है।
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मामला मेरे संज्ञान में है। मुझे कुछ दिन पूर्व अनुबंधित बसों में इस तरह के मामले की जानकारी लगी थी। अभी इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा सका है। चालक एक भेजा रहा और अभिलेख में दो दर्शाए जा रहे हैं। शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- वीके गंगवार, एआरएम
आंकड़े की नजर से
-111 बसों का बेड़ा है पीलीभीत डिपो में, इनमें 12 बसें एसी और सात बसें अनुबंधित, करीब 225 चालकों की जरूरत है पीलीभीत डिपो में, 171 चालाक तैनात हैं डिपो में, 36 चालक हैं नियमित, 135 चालक संविदा कर्मी, 8 घंटे यात्रा के बाद चालक बदलने का प्रावधान