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चैनी धान नहीं उगाने पर बनी सहमति
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Tue, 29 Mar 2016 11:59 PM IST
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चैनी धान की फसल के उत्पादन को लेकर गोमती गुरुद्वारा में किसानों की बैठक हुई, जिसमें चैनी धान का उत्पादन न करने की सहमति बनी। तय हुआ कि शीघ्र ही किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिलकर चैनी धान की फसल पर प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा।
बताते चलें कि पिछले दिनों अमर उजाला ने चैनी धान के उत्पादन से होने वाले जल दोहन और भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले प्रभार आदि के बावत खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी अग्रवाल ने चैनी धान न खरीदने की बात कही थी। इसके बाद से ही लगातार विभिन्न संगठन चैनी धान का उत्पादन न करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में यहां हुई बैठक में भाकियू के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने चैनी धान की फसल के नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चैनी धान की फसल उत्पादन में पानी के अधिक दोहन के साथ खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करना पड़ता है। इस धान की सरकारी खरीद न होने पर व्यापारी मनमाने ढंग से फसल की खरीद करते हैं। अगली धान की मुख्य फसल के लिए भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने को खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करना पड़ता है। लागत अधिक आने के बाद भी धान की मुख्य फसल मानक के अनुरूप नहीं होती। सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बिक्री को ले जाने पर मानक के अनुरूप धान न होने की जानकारी देकर लौटा दिया जाता है। अंत में चैनी धान की फसल न करने की सहमति बनी। भाकियू नेता मंजीत सिंह ने बताया कि कल अभयपुर माधौपुर में चैनी धान की फसल को लेकर किसानों की बैठक होगी। इसके बाद किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिलकर चैनी धान पर पूर्णता प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा। बैठक में व्यापारियों के चैनी धान की खरीद न करने के निर्णय को सराहा गया। बैठक में जगदीश ङ्क्षसह, जजवीर सिंह, सुखदेव सिंह, चतविंदर सिंह, हरजीत सिंह, दलजीत सिंह आदि प्रमुख किसान मौजूद रहे।
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बताते चलें कि पिछले दिनों अमर उजाला ने चैनी धान के उत्पादन से होने वाले जल दोहन और भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले प्रभार आदि के बावत खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी अग्रवाल ने चैनी धान न खरीदने की बात कही थी। इसके बाद से ही लगातार विभिन्न संगठन चैनी धान का उत्पादन न करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में यहां हुई बैठक में भाकियू के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने चैनी धान की फसल के नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चैनी धान की फसल उत्पादन में पानी के अधिक दोहन के साथ खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करना पड़ता है। इस धान की सरकारी खरीद न होने पर व्यापारी मनमाने ढंग से फसल की खरीद करते हैं। अगली धान की मुख्य फसल के लिए भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने को खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करना पड़ता है। लागत अधिक आने के बाद भी धान की मुख्य फसल मानक के अनुरूप नहीं होती। सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बिक्री को ले जाने पर मानक के अनुरूप धान न होने की जानकारी देकर लौटा दिया जाता है। अंत में चैनी धान की फसल न करने की सहमति बनी। भाकियू नेता मंजीत सिंह ने बताया कि कल अभयपुर माधौपुर में चैनी धान की फसल को लेकर किसानों की बैठक होगी। इसके बाद किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिलकर चैनी धान पर पूर्णता प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा। बैठक में व्यापारियों के चैनी धान की खरीद न करने के निर्णय को सराहा गया। बैठक में जगदीश ङ्क्षसह, जजवीर सिंह, सुखदेव सिंह, चतविंदर सिंह, हरजीत सिंह, दलजीत सिंह आदि प्रमुख किसान मौजूद रहे।
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