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संविदा कर्मी जांचते  हैं मरीजों का खून

Thu, 09 Jun 2016 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Thu, 09 Jun 2016 11:08 PM IST
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Check contract workers The blood of patients
इंतजार - फोटो : pilibhit, beureu
फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर माह लाखों खर्च होने के बाद भी मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर व संसाधनों की कमी के चलते मजबूरन गरीब मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में शरण लेनी पड़ रही है। 
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तीस शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अरसे से चिकित्सा अधीक्षक विहीन चल रहा है। स्थाई चिकित्सा अधीक्षक न होने के कारण वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. ठाकुरदास प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक की हैसियत से काम कर रहे हैं। वर्तमान में यहां दो महिला डॉक्टरों समेत दस स्थाई डॉक्टर और छह संविदा डॉक्टर तैनात हैं। वहीं सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, नेत्ररोग विशेषज्ञों समेत अन्य विशषज्ञों की भी कमी बनी हुई है। विशेषज्ञों की कमी के चलते कुछ मरीजों को बिना दवा के ही घरों को लौटना पड़ रहा है। यहां दो 108 एंबुलेंस और तीन 102 एंबुलेंस हैं।
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मुख्यालय पर नहीं रहते कई डॉक्टर
रोजाना करीब आठ सौ की ओपीडी करने वाले इस अस्पताल का दुर्भाग्य यह है कि यहां तैनात कई डॉक्टर मुख्यालय पर न रहकर दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसे में सुबह निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कई कई घंटों इंतजार करना पड़ता है। 
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चार में तीन जनरेटर पड़े हैं खराब
हर माह केवल संसाधनों पर दस लाख रुपये से अधिक फूंकने वाले अस्पताल प्रशासन द्वारा सीएचसी में बिजली गुल होने पर जनरेटर से बिजली सप्लाई देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। बिजली गुल होने की दशा में जनरेटर से महज तीन घंटे ही बिजली सप्लाई दी जाती है। यहां चार में से तीन जनरेटर भी खराब पड़े हुए हैं। 

यह पद हैं रिक्त 
चिकित्सा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सर्जन, नेत्ररोग विशेषज्ञ, हड्डीरोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ, दंतरोग विशेषज्ञ, तीन स्टाफ नर्स, लैब टैक्नीशियन, रेडियालॉजिस्ट, ब्लाक प्रोग्राम अधिकारी, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी, चार एएनएम व प्रधान लिपिक।

घंटों करना पड़ता है इंतजार
सरकारी अस्पताल में जल्दी दवा मिलना अब सपना हो चुका है। यहां डॉक्टर के इंतजार में घंटों बैठने के बाद ही दवा मिल पाती है।
- बबलू, मोहल्ला दुर्गाप्रसाद 

तीन घंटे बाद मिले डाक्टर
बुधवार को भी अस्पताल लेने गई थी। करीब तीन घंटे के इंतजार के बाद डॉक्टर साहब आए। यहां अल्ट्रासाउंड के अलावा और जांचें भी नहीं होती है। 
- रुखसाना, मोहल्ला ग्यासपुर

सीएचसी में स्टाफ की काफी कमी है, लेकिन सीमित संसाधनों से मरीजों को बेहतर इलाज मुहैय्या कराया जाता है। डॉक्टरों की कमी व उनके मुख्यालय पर न ठहरने के बाबत उच्चाधिकारियों को पूर्व में ही अवगत कराया जा चुका है।

- डॉ. ठाकुरदास, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक 

यह है अस्पताल के दिन की हाल 
बीसलपुर। सीएचसी निर्धारित समयानुसार सुबह आठ बजे खोल दिया गया है। चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी पहुंच चुका था। करीब सौ के आसपास मरीज पर्चा बनवाने वाली लाइन में खड़े थे। करीब साढ़े आठ बजे डॉ. ठाकुरदास समेत कुछ अन्य डॉक्टर भी अपने अपने कक्षों में पहुंच मरीजों को देख रहे थे। महिला डॉक्टर अंजू सिंह के कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी थी, वह करीब 11 बजे अस्पताल पहुंची। करीब एक बजे भी डॉक्टर अपने अपने कमरों में मौजूद मिले। कुछ मरीज दवा लेने के काउंटर के सामने लगे थे। 
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