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Pilibhit News: पहले पति और अब इकलौते बेटे की मौत से टूट गईं बुजुर्ग लीलावती
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मार्ग पर वाहनो को रोकते ग्रामीण । संवाद
कलीनगर। भालू के हमले में लालाराम की मौत की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। सब उसके स्वभाव को याद कर गमगीन दिखे। मां लीलावती तो बदहवास हो गई। इकलौते बेटे के शव से लिपटकर उसे पुकारती रहीं। बोली-तीन माह पहले पति और अब पुत्र भी छोड़कर चला गया। अब किसके सहारे जिएंगी। गांव की महिलाएं लीलावती को दिलासा देती रहीं। अंत में पोस्टमार्टम की कार्रवाई होती देख लीलावती ने शव को चूमकर पुलिस के सुपुर्द किया।
तीन माह पहले लालाराम के पिता राममूर्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। परिवार इस गम को भुला भी नहीं पाया था कि अब बुजुर्ग लीलावती का इकलौता सहारा भी छिन गया। बेटे की मौत से लीलावती टूट गई हैं। लालाराम पांच बीघा जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। मां लीलावती ने बताया कि मंगलवार शाम लालाराम खाना खाकर घर से निकला था, लेकिन अगले दिन उन्हें उसकी मौत की मनहूस खबर सुनने को मिली। बेटे का खून से लथपथ शव देखा तो वह सुध-बुध खो बैठीं। परिजनों ने बताया कि लालाराम की करीब पांच साल पहले शादी हुई थी। कुछ समय रहने के बाद पत्नी छोड़कर चली गई थी।
पहले दूरी बनाए खड़े रहे अफसर, जाम लगने पर हरकत में आए
बुधवार सुबह नौ बजे घटना की जानकारी ग्रामीणों को लगी। इसके बाद वन विभाग अवगत कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ देर बाद बराही रेंजर अरुण मोहन जंगल सीमा पर पहुंचे। चंद ग्रामीणों से बातचीत कर घटना स्थल पर आने के बजाय जंगल के अंदर चले गए। अन्य कोई अफसर भी नहीं आया। शव के मार्ग पर रखकर जाम लगाने की जानकारी के बाद वन अफसर हरकत में आए। पहले बराही और महोफ रेंजर मौके पर पहुंचे। पीछे से ही सामाजिक वानिकी के रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव भी आ गए। ग्रामीणों ने तारफेसिंग कराने की बात भी कही। करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा।
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मौके पर नहीं मिले पगचिह्न, अफसर बोले- भालू का ही हमला
घटना स्थल पर जहां शव पड़ा था, उसके आसपास कहीं भी भालू के पगचिह्न नहीं मिले। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में भालू की अक्सर चहलकदमी बनी रहती है। शव देख भालू के ही हमला करने की बात कही जा रही है। बाद में ग्रामीणों से बातचीत करने पहुंचे रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने भी भालू के हमले की बात कही।
भालू के हमले में ग्रामीण की मौत हुई है। ग्रामीणों से बातचीत कर मुआवजा का आश्वासन दिया गया। उच्च अफसरों को अवगत करा दिया गया है। - अरुण मोहन श्रीवास्तव रेंजर बराही
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तीन माह पहले लालाराम के पिता राममूर्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। परिवार इस गम को भुला भी नहीं पाया था कि अब बुजुर्ग लीलावती का इकलौता सहारा भी छिन गया। बेटे की मौत से लीलावती टूट गई हैं। लालाराम पांच बीघा जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। मां लीलावती ने बताया कि मंगलवार शाम लालाराम खाना खाकर घर से निकला था, लेकिन अगले दिन उन्हें उसकी मौत की मनहूस खबर सुनने को मिली। बेटे का खून से लथपथ शव देखा तो वह सुध-बुध खो बैठीं। परिजनों ने बताया कि लालाराम की करीब पांच साल पहले शादी हुई थी। कुछ समय रहने के बाद पत्नी छोड़कर चली गई थी।
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पहले दूरी बनाए खड़े रहे अफसर, जाम लगने पर हरकत में आए
बुधवार सुबह नौ बजे घटना की जानकारी ग्रामीणों को लगी। इसके बाद वन विभाग अवगत कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ देर बाद बराही रेंजर अरुण मोहन जंगल सीमा पर पहुंचे। चंद ग्रामीणों से बातचीत कर घटना स्थल पर आने के बजाय जंगल के अंदर चले गए। अन्य कोई अफसर भी नहीं आया। शव के मार्ग पर रखकर जाम लगाने की जानकारी के बाद वन अफसर हरकत में आए। पहले बराही और महोफ रेंजर मौके पर पहुंचे। पीछे से ही सामाजिक वानिकी के रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव भी आ गए। ग्रामीणों ने तारफेसिंग कराने की बात भी कही। करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा।
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मौके पर नहीं मिले पगचिह्न, अफसर बोले- भालू का ही हमला
घटना स्थल पर जहां शव पड़ा था, उसके आसपास कहीं भी भालू के पगचिह्न नहीं मिले। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में भालू की अक्सर चहलकदमी बनी रहती है। शव देख भालू के ही हमला करने की बात कही जा रही है। बाद में ग्रामीणों से बातचीत करने पहुंचे रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने भी भालू के हमले की बात कही।
भालू के हमले में ग्रामीण की मौत हुई है। ग्रामीणों से बातचीत कर मुआवजा का आश्वासन दिया गया। उच्च अफसरों को अवगत करा दिया गया है। - अरुण मोहन श्रीवास्तव रेंजर बराही

मार्ग पर वाहनो को रोकते ग्रामीण । संवाद

मार्ग पर वाहनो को रोकते ग्रामीण । संवाद