फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Another babu of CMO office trapped in fake appointment case

फर्जी नियुक्ति मामले में सीएमओ ऑफिस का एक और बाबू फंसा

Mon, 28 Mar 2022 02:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 02:03 AM IST
विज्ञापन
Another babu of CMO office trapped in fake appointment case
पीलीभीत। फर्जी नियुक्ति मामले में निलंबित चल रहे कुंवर हीरेश सरन सक्सेना के बाद वरिष्ठ सहायक नीरज सिंह श्रीवास्तव भी जांच में घिर गए हैं। उन पर मृतक आश्रित कोटे में नियम विरुद्ध नौकरी पाने का आरोप है। निदेशक प्रशासन डॉ. राजा गणपति आर. ने डॉ. एससी सिंह अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ से पंद्रह दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन

सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक नीरज सिंह श्रीवास्तव पर पहले भी तमाम आरोप लग चुके हैं। आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में उनपर भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई बरेली ने 12 जुलाई 2019 में शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिला अस्पताल परिसर के धीरेंद्र चंद्र सिंह की तरफ से शासन को भेजी गई शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। इसमें नीरज सिंह श्रीवास्तव के खिलाफ कई बिंदुओं पर शिकायत कराई गई। शिकायत में कहा गया कि नीरज सिंह की नियुक्ति 1991 में उनके पिता जगन्नाथ प्रसाद जो जिला अस्पताल में चतुुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे उनकी जगह हुई।
विज्ञापन

आरोप है कि उसी दौरान उनकी मां ऊषा रानी स्वास्थ्य विभाग में वार्ड आया थीं जो 2014 ने रिटायर हुईं। नियमानुसार माता-पिता दोनों में से एक अगर नौकरी में है तो मृतक आश्रित कोटे में नौकरी नहीं दी जा सकती। शिकायत में निलंबित चल रहे लिपिक हीरेश सरन सक्सेना का भी इसमें नाम लिया गया है जो भ्रष्टाचार के कई मामलों में शामिल हैं। एनआरएचएम बजट में बंदरबांट करने के मामले में 2015 में नीरज और हीरेश सरन के खिलाफ एलआईयू की जांच रिपोर्ट के बाद डीएम ने कार्रवाई की शासन में संस्तुति भी की थी। जून 2015 में इनको शासन स्तर से निलंबित भी किया जा चुका है। निलंबन का आदेश एक साल तक दबाए रखा गया। तत्कालीन केबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद की शिकायत पर नीरज सिंह का तबादला लखीमपुर में किया गया। आरोप है कि इसके बाद भी उन्होंने सीएमओ कार्यालय में चार्ज नहीं छोड़ा। 2012 में भी उनका ट्रांसफर अलीगढ़ सीएमओ ऑफिस किया गया लेकिन वहां भी साठगांठ कर आदेश पर पालन नहीं होने दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके अलावा भी कई आरोप लगाए हैं जिसमें मारपीट, धमकाने जैसे भी आरोप शामिल हैं। शिकायत पहुंचने के बाद निदेशक प्रशासन डॉ. राजा गणपति आर. ने आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले को छोड़कर बाकी बिंदुओं पर शासन स्तर से जांच शुरू करा दी है। उन्होंने डॉ. एससी सिंह अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ को आदेश जारी कर पंद्रह दिन में जांच कर रिपोर्ट मांगी है।

सीएमओ कह रहे उनकी जानकारी में नहीं, जबकि 16 मार्च को उनको भेजा गया पत्र
शासन स्तर से जांच के लिए 16 मार्च को पत्र जारी किया गया। इसकी एक कॉपी सीएमओ पीलीभीत को भी भेजी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सीएमओ ने इस पूरे मामले की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। जबकि वरिष्ठ सहायक उनके कार्यालय में तैनात है। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। शासन स्तर से जांच हो रही होगी। अगर कार्रवाई के लिए कोई पत्र आया है तो संबंधित के खिलाफ की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed