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योगी जी! ऐसे तो नहीं मिलेगी कुपोषण से मुक्ति, 325 आंगनबाड़ी वर्करों के मोबाइल खराब
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पीलीभीत। पिछले पांच महीनों से आंगनबाड़ी वर्करों के करीब 325 सरकारी मोबाइल फोन खराब चल रहे हैं। मोबाइल फोन को दुरुस्त कराने के प्रयास किए गए, लेकिन संबंधित मोबाइल कंपनी ने रिपेयर करने से इंकार कर दिया। शासन को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका है। इससे विभागीय अफसरों और आंगनबाड़ी वर्करों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कुपोषण से मुक्ति का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
जिले में 1960 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ी वर्करों को करीब डेढ़ साल पहले ऑनलाइन रिपोर्ट देने के लिए सरकारी मोबाइल फोन मुहैय्या कराए गए थे। इन मोबाइल फोनों के माध्यम से विभाग के प्रतिदिन पुष्टाहार आदि की रिपोर्ट ऑनलाइन भेजी जा रही है, लेकिन 325 आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा ऑनलाइन रिपोर्ट पिछले पांच महीनों से नहीं भेजा रही है। इसमें कसूरबार आंगनबाड़ी वर्कर नहीं बल्कि सिस्टम है। वजह यह है कि 325 मोबाइल फोन पिछले पांच माह से तकनीकी खराबी के चलते ठप पड़े हुए हैं।
मोबाइल फोन सप्लाई करने वाली कंपनी द्वारा एक वर्ष की वारंटी दी गई थीे। इधर साल भर का समय बीतने के बाद जब उक्त कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने वारंटी समय निकल जाने की बात कहते हुए मोबाइल फोन रिपेयर करने से इनकार कर दिया। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों समेत शासन को भी पत्र भेजकर अवगत कराया, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में विभाग को रोजाना ही ऑनलाइन रिपोर्ट लेने की जगह मैनुअल रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। इससे विभागीय अधिकारियों समेत आंगनबाड़ी वर्करों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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शुरू हो गया मनमानी का खेल
आंगबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी वर्करों की मनमानी पर अंकुुश लगाने और रोजाना प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से मोबाइल फोन का वितरण किया गया था। इसके माध्यम से आंगनबाड़ी वर्करों को रोजाना ही मोबाइल फोन से पुष्टाहार वितरण, केंद्र खोलने आदि की जानकारी देनी होती है। इधर मोबाइल फोन खराब होने से कुछ आंगनबाड़ी वर्करों ने अपने पुराने ढर्रे पर काम करना शुरू कर दिया है।
करीब 325 आंगनबाड़ी वर्करों के मोबाइल फोन तकनीकी खराबी के चलते ठप पड़ हुए हैं। वारंटी पीरियड निकल जाने से कंपनी से रिपेयर करने से इंकार कर दिया। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों भेजी जा चुकी है। फिलहाल मैनुअल रिपोर्ट ली जा रही है। - अरविंद कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में 1960 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ी वर्करों को करीब डेढ़ साल पहले ऑनलाइन रिपोर्ट देने के लिए सरकारी मोबाइल फोन मुहैय्या कराए गए थे। इन मोबाइल फोनों के माध्यम से विभाग के प्रतिदिन पुष्टाहार आदि की रिपोर्ट ऑनलाइन भेजी जा रही है, लेकिन 325 आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा ऑनलाइन रिपोर्ट पिछले पांच महीनों से नहीं भेजा रही है। इसमें कसूरबार आंगनबाड़ी वर्कर नहीं बल्कि सिस्टम है। वजह यह है कि 325 मोबाइल फोन पिछले पांच माह से तकनीकी खराबी के चलते ठप पड़े हुए हैं।
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मोबाइल फोन सप्लाई करने वाली कंपनी द्वारा एक वर्ष की वारंटी दी गई थीे। इधर साल भर का समय बीतने के बाद जब उक्त कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने वारंटी समय निकल जाने की बात कहते हुए मोबाइल फोन रिपेयर करने से इनकार कर दिया। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों समेत शासन को भी पत्र भेजकर अवगत कराया, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में विभाग को रोजाना ही ऑनलाइन रिपोर्ट लेने की जगह मैनुअल रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। इससे विभागीय अधिकारियों समेत आंगनबाड़ी वर्करों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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शुरू हो गया मनमानी का खेल
आंगबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी वर्करों की मनमानी पर अंकुुश लगाने और रोजाना प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से मोबाइल फोन का वितरण किया गया था। इसके माध्यम से आंगनबाड़ी वर्करों को रोजाना ही मोबाइल फोन से पुष्टाहार वितरण, केंद्र खोलने आदि की जानकारी देनी होती है। इधर मोबाइल फोन खराब होने से कुछ आंगनबाड़ी वर्करों ने अपने पुराने ढर्रे पर काम करना शुरू कर दिया है।
करीब 325 आंगनबाड़ी वर्करों के मोबाइल फोन तकनीकी खराबी के चलते ठप पड़ हुए हैं। वारंटी पीरियड निकल जाने से कंपनी से रिपेयर करने से इंकार कर दिया। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों भेजी जा चुकी है। फिलहाल मैनुअल रिपोर्ट ली जा रही है। - अरविंद कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी