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Pilibhit News: लाखों की चपत लगाने के आरोपी को नहीं मिली अग्रिम जमानत
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फर्जी दस्तावेज तैयार कर वाहन दूसरे के नाम ट्रांसफर करने का लगा आरोप
पीलीभीत। वाहन फाइनेंस कंपनी को करीब 18.82 लाख रुपये की कथित चपत लगाने के मामले में सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने आरोपी देवदत्त की द्वितीय अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अभियोजन के मुताबिक, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, पीलीभीत शाखा के एरिया लीगल मैनेजर सचिन खंडूरी की ओर से थाना सुनगढ़ी में तहरीर देकर बताया कि कंपनी ने वर्ष 2021 में जसवंत सिंह को वाहन संख्या यूपी 26 एके 9674 खरीदने के लिए ऋण दिया था। बेईमानी और धोखाधड़ी की नीयत से कंपनी के करीब 18 लाख 82 हजार 435 रुपये का बकाया भुगतान किए बिना अन्य लोगों के साथ मिलकर कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरों से जाली व फर्जी दस्तावेज तैयार कर वाहन की एनओसी बनाकर उसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में हुई विवेचना में कई नाम सामने आए।
देवदत्त की ओर से अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने का पर्याप्त आधार नहीं न होने पर देवदत्त के द्वितीय अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। संवाद
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पीलीभीत। वाहन फाइनेंस कंपनी को करीब 18.82 लाख रुपये की कथित चपत लगाने के मामले में सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने आरोपी देवदत्त की द्वितीय अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अभियोजन के मुताबिक, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, पीलीभीत शाखा के एरिया लीगल मैनेजर सचिन खंडूरी की ओर से थाना सुनगढ़ी में तहरीर देकर बताया कि कंपनी ने वर्ष 2021 में जसवंत सिंह को वाहन संख्या यूपी 26 एके 9674 खरीदने के लिए ऋण दिया था। बेईमानी और धोखाधड़ी की नीयत से कंपनी के करीब 18 लाख 82 हजार 435 रुपये का बकाया भुगतान किए बिना अन्य लोगों के साथ मिलकर कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरों से जाली व फर्जी दस्तावेज तैयार कर वाहन की एनओसी बनाकर उसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में हुई विवेचना में कई नाम सामने आए।
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देवदत्त की ओर से अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने का पर्याप्त आधार नहीं न होने पर देवदत्त के द्वितीय अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। संवाद
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