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अफसरों की उदासीनता से शहरी देवहा की दया पर
Pilibhit
Updated Mon, 04 Aug 2014 05:30 AM IST
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पीलीभीत। शासन और अफसरों की उदासीनता से कटान रोकने के लिए बनाई गई परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी, नतीजतन फिर लोग देवहा के कोप से दो-चार होने को मजबूर हैं। कटान करती हुई आबादी की ओर बढ़ रही देवहा नदी से लोग सहमे हुए हैं। अब नदी की धाराओं के मुक्तिधाम और ईदगाह के करीब पहुंचने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल, कई माह पहले सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव के आगमन पर शहर के लोगों ने मुक्तिधाम की ओर देवहा के कटान की आशंका जताई थी। इसके बाद उन्होंने बाढ़ खंड व सिंचाई महकमे के अधिकारियों को कटान रोकने के लिए परियोजना तैयार कर भेजने के निर्देश दिए थे। उनके जाने के बाद बाढ़ खंड पूरनपुर ने 181.08 लाख की परियोजना तैयार कर ली। बाढ़ खंड अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने इसकी रिपोर्ट समय से अधीक्षण अभियंता बाढ़ मंडल लखीमपुर को भेज दी, लेकिन अभी तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। जिसके चलते नदी मुक्तिधाम की ओर कटान शुरू कर दिया है। बीते 24 घंटे के भीतर यहां नदी कटान करते हुए करीब एक मीटर चौड़ाई व बीस मीटर लंबाई में मुक्तिधाम की भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटान को रोकने के दिशा में कोई प्रयास नहीं किए तो जल्द ही मुक्तिधाम के साथ-साथ निकट स्थित ईदगाह व रोडवेज बस स्टैंड मार्ग भी नदी की जद में आ जाएगा।
मुक्तिधाम कमेटी बचाव में जुटी
मुक्तिधाम की ओर कटान की जानकारी मिलने पर मुक्तिधाम कमेटी के अध्यक्ष सतीश जायसवाल ने कुछ पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच शनिवार को स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों से वार्ता कर उन्हें भी स्थिति की गंभीरता बताई, लेकिन बाढ़ अधिकारियों ने अभी तक परियोजना स्वीकृत न होने की बात कहते हुए बचाव कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए। जायसवाल ने बताया कि प्रशासन से कोई मदद न मिलने के बाद उन लोगों ने आपस में चंदा कर मुक्तिधाम को कटान से बचाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया है। इसके लिए सिंचाई विभाग के कुछ ठेकेदारों के माध्यम से वह रेत भरी बोरियां भी कटान स्थल पर लगवा रहे हैं।
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दरअसल, कई माह पहले सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव के आगमन पर शहर के लोगों ने मुक्तिधाम की ओर देवहा के कटान की आशंका जताई थी। इसके बाद उन्होंने बाढ़ खंड व सिंचाई महकमे के अधिकारियों को कटान रोकने के लिए परियोजना तैयार कर भेजने के निर्देश दिए थे। उनके जाने के बाद बाढ़ खंड पूरनपुर ने 181.08 लाख की परियोजना तैयार कर ली। बाढ़ खंड अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने इसकी रिपोर्ट समय से अधीक्षण अभियंता बाढ़ मंडल लखीमपुर को भेज दी, लेकिन अभी तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। जिसके चलते नदी मुक्तिधाम की ओर कटान शुरू कर दिया है। बीते 24 घंटे के भीतर यहां नदी कटान करते हुए करीब एक मीटर चौड़ाई व बीस मीटर लंबाई में मुक्तिधाम की भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटान को रोकने के दिशा में कोई प्रयास नहीं किए तो जल्द ही मुक्तिधाम के साथ-साथ निकट स्थित ईदगाह व रोडवेज बस स्टैंड मार्ग भी नदी की जद में आ जाएगा।
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मुक्तिधाम कमेटी बचाव में जुटी
मुक्तिधाम की ओर कटान की जानकारी मिलने पर मुक्तिधाम कमेटी के अध्यक्ष सतीश जायसवाल ने कुछ पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच शनिवार को स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों से वार्ता कर उन्हें भी स्थिति की गंभीरता बताई, लेकिन बाढ़ अधिकारियों ने अभी तक परियोजना स्वीकृत न होने की बात कहते हुए बचाव कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए। जायसवाल ने बताया कि प्रशासन से कोई मदद न मिलने के बाद उन लोगों ने आपस में चंदा कर मुक्तिधाम को कटान से बचाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया है। इसके लिए सिंचाई विभाग के कुछ ठेकेदारों के माध्यम से वह रेत भरी बोरियां भी कटान स्थल पर लगवा रहे हैं।
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