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अवैध शिकार रोकने के टिप्स दिए
Pilibhit
Updated Sat, 23 Aug 2014 05:30 AM IST
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माधोटांडा। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की ओर से हुई कार्यशाला में वन अफसरों, कर्मचारियों और जंगल से सटे गांवों के जनप्रतिनिधियों को अवैध शिकार रोकने के टिप्स दिए गए।
महोफ रेंज के मुस्तफाबाद गेस्टहाउस में शनिवार को वनों में वन्यजीव अपराध रोकने को लेकर हुई कार्यशाला में वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर निशांत वर्मा ने कहा कि पीलीभीत के जंगलों में टाइगरों की संख्या अधिक होने के बाद ही इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। ऐसे में वन्यजीवों का कोई अहित न हो, यह सभी की जिम्मेदारी और कर्तव्य है। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से वन्यजीव से जुड़े अपराधियों की कार्यप्रणाली और उन पर रोक लगाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अवैध शिकार की सूचना पहले स्थानीय वन चौकी, रेंज कार्यालय और डीएफओ को दें। अवैध शिकार में यदि कोई वनकर्मी या फिर बड़ा अपराधी लिप्त पाया जाता है तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के वन्यजीव निरीक्षक केके शर्मा ने प्रदर्शनी के माध्यम से टाइगर रिजर्व में अपराधियों की नजर में रहने वाले वन्य जीवों के बारे में जानकारी दी। कहा कि वन्यजीव तस्कर अधिकतर हाथी के दांत, हिरन, घड़ियाल, टाइगर, तेंदुए की खालों समेत विभिन्न प्रकार के सर्पों की तस्करी करते हैं। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने कहा कि सीमित संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते वनों से सटे लोगों का सहयोग लेना जरूरी हो गया है। उन्होंने वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने पर मुआवजे के प्रावधान की जानकारी भी दी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने योजनाओं की जानकारी दी। कार्यशाला में वनों से सटी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, ग्राम वन समितियों के पदाधिकरी, पांचों वन रेंजों के रेंजर और वनकर्मी मौजूद रहे।
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कार्यशाला में प्रधानों ने निकाली जमकर भड़ास
माधोटांडा। मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस में हुई कार्यशाला के दौरान पहुंचे ग्राम प्रधानों ने वन विभाग पर टाइगर रिजर्व के मामले में गुमराह कर हस्ताक्षर कराने की बात कहते हुए जमकर भड़ास निकाली।
ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि उन लोगों से जब टाइगर प्रोजेक्ट को लेकर प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए थे, तो कहा गया था कि गंावों से सटे वन क्षेत्र बफरजोन में रहेंगे लेकिन आज यह स्थिति बदल गई है। वन अफसरों को वन क्षेत्रों से सटी आबादी की समस्याओं पर गौर करना चाहिए। ग्राम प्रधानों ने गांवों से सटे वन क्षेत्रों को बफरजोन में शामिल करने, जंगलों से सटे ग्रामीणों को गैस सिलेंडर और चूल्हे उपलब्ध कराने, जंगल मार्गों को चालू रखने की मांग की। डीएफओ ने कृषि फसलों के नुकसान पर तीन हजार रुपये प्रति एकड़ देने की बात कही जिस पर प्रधानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की। इस मौके पर मल्लपुर खजुरिया ग्राम प्रधान सूरजपाल, जमुनियाखासपुर के रामप्रकाश वर्मा, पिपरियासंतोष के बालकराम, मथनाजप्ती के देवेंद्र कुमार समेत तमाम प्रधान मौजूद रहे।
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महोफ रेंज के मुस्तफाबाद गेस्टहाउस में शनिवार को वनों में वन्यजीव अपराध रोकने को लेकर हुई कार्यशाला में वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर निशांत वर्मा ने कहा कि पीलीभीत के जंगलों में टाइगरों की संख्या अधिक होने के बाद ही इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। ऐसे में वन्यजीवों का कोई अहित न हो, यह सभी की जिम्मेदारी और कर्तव्य है। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से वन्यजीव से जुड़े अपराधियों की कार्यप्रणाली और उन पर रोक लगाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अवैध शिकार की सूचना पहले स्थानीय वन चौकी, रेंज कार्यालय और डीएफओ को दें। अवैध शिकार में यदि कोई वनकर्मी या फिर बड़ा अपराधी लिप्त पाया जाता है तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
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क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के वन्यजीव निरीक्षक केके शर्मा ने प्रदर्शनी के माध्यम से टाइगर रिजर्व में अपराधियों की नजर में रहने वाले वन्य जीवों के बारे में जानकारी दी। कहा कि वन्यजीव तस्कर अधिकतर हाथी के दांत, हिरन, घड़ियाल, टाइगर, तेंदुए की खालों समेत विभिन्न प्रकार के सर्पों की तस्करी करते हैं। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने कहा कि सीमित संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते वनों से सटे लोगों का सहयोग लेना जरूरी हो गया है। उन्होंने वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने पर मुआवजे के प्रावधान की जानकारी भी दी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने योजनाओं की जानकारी दी। कार्यशाला में वनों से सटी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, ग्राम वन समितियों के पदाधिकरी, पांचों वन रेंजों के रेंजर और वनकर्मी मौजूद रहे।
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कार्यशाला में प्रधानों ने निकाली जमकर भड़ास
माधोटांडा। मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस में हुई कार्यशाला के दौरान पहुंचे ग्राम प्रधानों ने वन विभाग पर टाइगर रिजर्व के मामले में गुमराह कर हस्ताक्षर कराने की बात कहते हुए जमकर भड़ास निकाली।
ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि उन लोगों से जब टाइगर प्रोजेक्ट को लेकर प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए थे, तो कहा गया था कि गंावों से सटे वन क्षेत्र बफरजोन में रहेंगे लेकिन आज यह स्थिति बदल गई है। वन अफसरों को वन क्षेत्रों से सटी आबादी की समस्याओं पर गौर करना चाहिए। ग्राम प्रधानों ने गांवों से सटे वन क्षेत्रों को बफरजोन में शामिल करने, जंगलों से सटे ग्रामीणों को गैस सिलेंडर और चूल्हे उपलब्ध कराने, जंगल मार्गों को चालू रखने की मांग की। डीएफओ ने कृषि फसलों के नुकसान पर तीन हजार रुपये प्रति एकड़ देने की बात कही जिस पर प्रधानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की। इस मौके पर मल्लपुर खजुरिया ग्राम प्रधान सूरजपाल, जमुनियाखासपुर के रामप्रकाश वर्मा, पिपरियासंतोष के बालकराम, मथनाजप्ती के देवेंद्र कुमार समेत तमाम प्रधान मौजूद रहे।