{"_id":"5d2632c08ebc3e6d1b73e559","slug":"15627844205-pilibhit-news68","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटों ने देना बंद किया खाना-पानी तो बूढ़ी अम्मा ने जान देने की ठानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटों ने देना बंद किया खाना-पानी तो बूढ़ी अम्मा ने जान देने की ठानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलसंडा (पीलीभीत)। पांच बेटे और हिस्से में जमीन होने के बाद भी वृद्धा को बुढ़ापे में सहारा नहीं मिल रहा। आए दिन उसे भूखा रखा जाता। इससे आहत होकर उसने अपनी जान देने की ठान ली और मकसूदापुर नहर में छलांग लगाने पहुंच गई। उसे छलांग लगाते देख पास खड़े लोगों ने देख लिया तो दौड़कर बचा लिया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची तो वृद्धा ने अपना दुखड़ा सुनाया। इसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया। पुलिस ने बेटों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी, लेकिन कोई घर पर नहीं मिला। बाद में एक बेटा पत्नी संग थाने पहुंचा और मां के भरण पोषण का जिम्मा उठाने की बात कही। इस पर पुलिस ने वृद्धा को उसके सुपुर्द कर दिया।
बिलसंडा थाना क्षेत्र के गांव रूरिया घुरिया निवासी बुंदा देवी (75) बुधवार सुबह कस्बा बिलसंडा से बस में सवार होकर बंडा (शाहजहांपुर) स्थित मकसूदापुर बड़ी नहर के पास पहुंच गई। नहर किनारे पहुंचने के बाद वृद्धा कुछ देर खड़ी रही और फिर छलांग लगा दी। कुछ दूरी पर मौजूद राहगीरों ने उन्हें देखा तो दौड़कर निकाल लिया। सड़क किनारे बैठाया और उनके बारे में जानकारी की। सूचना मिलने पर बंडा और बिलसंडा दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद वृद्धा को बिलसंडा पुलिस अपने साथ थाने ले आई। यहां पूछने पर वृद्धा ने अपना दुखड़ा सुनाया। कहा, उनके छह बेटे में से एक की मौत हो चुकी है। पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। बाकी के पांच बेटों ने तीन साल पहले बंटवारा कर दिया। इस दौरान तय किया गया कि उनके हिस्से की एक बीघा जमीन जो भी बेटा जोतेगा, वही उनका भरण पोषण करेगा। खानपान की व्यवस्था भी उसी की जिम्मे रहेगी। आरोप है कि कुछ दिन सब सही चलता रहा लेकिन बाद में उनको परेशान किया जाने लगा। इसी से तंग आकर वह खुदकुशी करने के लिए आई थीं। पुलिस ने पूरी बात सुनने के बाद दबिश दी, लेकिन कोई नहीं मिला। इंस्पेक्टर अतर सिंह ने बताया कि कुछ देर बाद ही वृद्धा का तीसरे नंबर का पुत्र राममूर्ति अपनी पत्नी संग थाने आया। यहां उसने मां का भरण पोषण करने की जिम्मेदारी संभालने का भरोसा दिलाया है। इस पर वृद्धा को उसी के सुपुर्दगी में दे दिया है।
विज्ञापन
बिलसंडा थाना क्षेत्र के गांव रूरिया घुरिया निवासी बुंदा देवी (75) बुधवार सुबह कस्बा बिलसंडा से बस में सवार होकर बंडा (शाहजहांपुर) स्थित मकसूदापुर बड़ी नहर के पास पहुंच गई। नहर किनारे पहुंचने के बाद वृद्धा कुछ देर खड़ी रही और फिर छलांग लगा दी। कुछ दूरी पर मौजूद राहगीरों ने उन्हें देखा तो दौड़कर निकाल लिया। सड़क किनारे बैठाया और उनके बारे में जानकारी की। सूचना मिलने पर बंडा और बिलसंडा दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद वृद्धा को बिलसंडा पुलिस अपने साथ थाने ले आई। यहां पूछने पर वृद्धा ने अपना दुखड़ा सुनाया। कहा, उनके छह बेटे में से एक की मौत हो चुकी है। पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। बाकी के पांच बेटों ने तीन साल पहले बंटवारा कर दिया। इस दौरान तय किया गया कि उनके हिस्से की एक बीघा जमीन जो भी बेटा जोतेगा, वही उनका भरण पोषण करेगा। खानपान की व्यवस्था भी उसी की जिम्मे रहेगी। आरोप है कि कुछ दिन सब सही चलता रहा लेकिन बाद में उनको परेशान किया जाने लगा। इसी से तंग आकर वह खुदकुशी करने के लिए आई थीं। पुलिस ने पूरी बात सुनने के बाद दबिश दी, लेकिन कोई नहीं मिला। इंस्पेक्टर अतर सिंह ने बताया कि कुछ देर बाद ही वृद्धा का तीसरे नंबर का पुत्र राममूर्ति अपनी पत्नी संग थाने आया। यहां उसने मां का भरण पोषण करने की जिम्मेदारी संभालने का भरोसा दिलाया है। इस पर वृद्धा को उसी के सुपुर्दगी में दे दिया है।
विज्ञापन