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अब वाराणसी के राजघाट पर एएसआई करेगी खुदाई
अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 21 Nov 2013 04:30 AM IST
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काशी के विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी होने का दावा और पुख्ता किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और ज्ञान प्रवाह ने खुदाई का खाका खींच लिया है।
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पुरातत्वविदों का मानना है कि राजघाट के पुरातात्विक खंडहर से काशी की प्राचीनता का जो इतिहास ईसापूर्व 12वीं शताब्दी तक का मिलता है यह और पुराना नजर आएगा। इस बार खुदाई के दौरान मिलने वाले अवशेष (साक्ष्यों) की कार्बन डेटिंग भी कराई जाएगी।
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वैज्ञानिक डेटिंग के बाद काशी को विश्व का सबसे प्राचीन शहर कहने का सुबूत और पुख्ता हो जाएगा।
पुरातत्वविदों के मुताबिक राजघाट में अंतिम बार काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने वर्ष 1960 से 1969 तक खुदाई की थी। उक्त खुदाई से इस तथ्य का खुलासा हुआ कि ईसापूर्व 12वीं शताब्दी से लेकर आज तक काशी में मानव जीवन रहा है।
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हर कालखंड में यहां पर मानव जीवन होने के साक्ष्य मिले थे। बुधवार को एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक डा. बीआर मणि और बीएचयू से सेवानिवृत्त प्रो. विदुला जायसवाल ने राजघाट उत्खनन स्थल जाकर खुदाई कहां से शुरू की जाए इसका जायजा लिया।
उप अधीक्षण पुरातत्वविद अजय श्रीवास्तव के मुताबिक खुदाई की योजना बन गई है, यह काम जल्द शुरू होगा।
उधर, सारनाथ में पाल गेट्टी ट्रस्ट अमेरिका, ब्रिटिश म्यूजियम और एएसआई द्वारा आयोजित इंटरनेशनल वर्कशाप में एएसआई के देश में स्थित म्यूजियम का मिशन तय होने पर मंथन हुआ।
ब्रिटिश म्यूजियम के जोनाथन विलियम्स ने रोम के पोंपई शहर में ईसापूर्व 79 में फटे ज्वालामुखी से हुए विध्वंस पर प्रकाश डाला। वहां पर चल रही खुदाई से मिले साक्ष्यों पर तैयार रिपोर्ट लाइफ एंड डेथ को प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया।
दूसरे दिन के वर्कशाप में जेम्स क्लो, मिस रैचेल, माइकल विल्स, डीजी एएसआई प्रवीण श्रीवास्तव, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद वैशाली नीरज कुमार आदि ने विचार व्यक्त किया।