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दिल्ली बना रही यमुना को जहरीली
Noida
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:30 AM IST
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नोएडा। यमुना को दिल्ली से ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है। वजीराबाद से ओखला के बीच गिरने वाले नाले समस्या को बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग दिल्ली सरकार को आपत्ति दर्ज करवाएगा। यमुना में नाले का गंदा पानी गिरने से सिल्ट भी जमा हो रही है। इससे यमुना का जलस्तर ऊंचा हो रहा है, जो खतरे की निशानी है।
वजीराबाद से ओखला बैराज तक यमुना की कुल लंबाई 22 किलोमीटर है और इस बीच तीन बैराज पड़ते हैं। सबसे ज्यादा गंदगी इसी क्षेत्र में होती है। दिल्ली से फरीदाबाद के बीच 18 बडे़ ड्रेन सीधे यमुना में अपनी गंदगी छोड़ रहे हैं। जानकार बताते हैं, हर साल दिल्ली में यमुना की तलहटी पर सात से आठ इंच मोटी सिल्ट जम जाती है और ऐसा केवल ड्रेनों से बहाए जा रहे गंदे पानी से हो रहा है। हालत ऐसी है कि थोड़ा भी पानी छोड़ने से एनसीआर में बाढ़ के हालात बन जाते हैं। दो साल पहले हथिनीकुंड बैराज से 2.87 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिसके बाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और पलवल में यमुना से सटे इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। पिछले वर्ष 1.26 लाख क्यूसेक पानी से ही यमुना उफान मारने लगी थी। इससे आने वाले समय में खतरे का अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।
यमुना में गिरने वाले ड्रेन
वजीराबाद, नजफगढ़, मेग्जीन रोड, चंद्रावल, खैबरपास, मेटकाफ हाउस, स्वीपर कॉलोनी, कुदेसिया बाग, तांगा स्टैंड, लाल किला, राजघाट, यमुना बैराज, नर्सिंग होम, रेलवे क्रॉसिंग, बारापुला, फ्रेंड्स कॉलोनी, हिंडन कट एवं शाहदरा ड्रेन।
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नजफगढ़ सबसे बड़ा खतरा
नजफगढ़ नाला यमुना को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुल प्रदूषण का 40.3 प्रतिशत हिस्सा इसी ड्रेन के जरिए यमुना में जहर घोल रहा है। इसके बाद दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के नाले यमुना के लिए खतरा बने हुए हैं।
सिल्ट का कारण
हथिनीकुंड बैराज से यमुना में सबसे ज्यादा पानी केवल बरसात के दिनों में ही छोड़ा जाता है, जबकि ड्रेन का गंदा पानी यमुना में लगातार बहता रहता है। ट्रीटमेंट हुए बिना सीधे यमुना में पहुंचने वाले ठोस कचरे की वजह से तलों पर सिल्ट जम जाती है और उसका स्तर लगातार ऊंचा होता रहता है।
सिल्ट जमा होने से यमुना का जलस्तर ऊंचा उठ जाता है। सीवेज प्लांटों से ट्रीटमेंट होने के बाद ही यमुना में पानी गिराना चाहिए। इसके अलावा यमुना नदी की नियमित सफाई भी होते रहना जरूरी है। इस बिंदुओं को लेकर दिल्ली सरकार से आपत्ति दर्ज करवाएंगे। -आरएस यादव, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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वजीराबाद से ओखला बैराज तक यमुना की कुल लंबाई 22 किलोमीटर है और इस बीच तीन बैराज पड़ते हैं। सबसे ज्यादा गंदगी इसी क्षेत्र में होती है। दिल्ली से फरीदाबाद के बीच 18 बडे़ ड्रेन सीधे यमुना में अपनी गंदगी छोड़ रहे हैं। जानकार बताते हैं, हर साल दिल्ली में यमुना की तलहटी पर सात से आठ इंच मोटी सिल्ट जम जाती है और ऐसा केवल ड्रेनों से बहाए जा रहे गंदे पानी से हो रहा है। हालत ऐसी है कि थोड़ा भी पानी छोड़ने से एनसीआर में बाढ़ के हालात बन जाते हैं। दो साल पहले हथिनीकुंड बैराज से 2.87 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिसके बाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और पलवल में यमुना से सटे इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। पिछले वर्ष 1.26 लाख क्यूसेक पानी से ही यमुना उफान मारने लगी थी। इससे आने वाले समय में खतरे का अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।
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यमुना में गिरने वाले ड्रेन
वजीराबाद, नजफगढ़, मेग्जीन रोड, चंद्रावल, खैबरपास, मेटकाफ हाउस, स्वीपर कॉलोनी, कुदेसिया बाग, तांगा स्टैंड, लाल किला, राजघाट, यमुना बैराज, नर्सिंग होम, रेलवे क्रॉसिंग, बारापुला, फ्रेंड्स कॉलोनी, हिंडन कट एवं शाहदरा ड्रेन।
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नजफगढ़ सबसे बड़ा खतरा
नजफगढ़ नाला यमुना को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुल प्रदूषण का 40.3 प्रतिशत हिस्सा इसी ड्रेन के जरिए यमुना में जहर घोल रहा है। इसके बाद दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के नाले यमुना के लिए खतरा बने हुए हैं।
सिल्ट का कारण
हथिनीकुंड बैराज से यमुना में सबसे ज्यादा पानी केवल बरसात के दिनों में ही छोड़ा जाता है, जबकि ड्रेन का गंदा पानी यमुना में लगातार बहता रहता है। ट्रीटमेंट हुए बिना सीधे यमुना में पहुंचने वाले ठोस कचरे की वजह से तलों पर सिल्ट जम जाती है और उसका स्तर लगातार ऊंचा होता रहता है।
सिल्ट जमा होने से यमुना का जलस्तर ऊंचा उठ जाता है। सीवेज प्लांटों से ट्रीटमेंट होने के बाद ही यमुना में पानी गिराना चाहिए। इसके अलावा यमुना नदी की नियमित सफाई भी होते रहना जरूरी है। इस बिंदुओं को लेकर दिल्ली सरकार से आपत्ति दर्ज करवाएंगे। -आरएस यादव, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग