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शपथपत्र देने पर ही मंजूर होगा नक्शा
Noida
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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नोएडा। केंद्र सरकार की नियमावली के अनुसार लेबर विभाग में निर्माण लागत का एक प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना होगा। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि शपथपत्र मिलने के बाद ही नक्शा पास किया जाएगा। शपथपत्र नहीं मिलने की दशा में पिछले एक माह से मानचित्रों को अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे नक्शे की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2009 के बाद हुए निर्माण पर एक प्रतिशत का टैक्स लगाने की घोषणा कर दी है। समय अधिक बीतने के चलते निर्माण की लागत और वसूली का फार्मूला नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों ने नए निर्माणों पर सेस लगाने का निर्णय लिया गया। नोएडा प्राधिकरण के बिल्डिंग सेल में पिछले एक महीने में किसी भी नक्शे को मंजूर नहीं किया गया। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उच्च अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नक्शा मंजूरी से पहले निर्माण करने वाले आवंटी को शपथ पत्र देना होगा। इसमें आवंटी निर्माण पूरा होने के बाद जो लागत आएगी उसका एक प्रतिशत प्राधिकरण को चुकाएगा। ऐसा नहीं करने की दशा में प्राधिकरण कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा।
सूत्रों ने बताया कि काफी समय से एक प्रतिशत टैक्स को लेकर फार्मूला खोजा जा रहा है। कई बिंदुओं पर विचार करने के बाद वित्त विभाग ने शपथपत्र का प्रस्ताव दिया, जिसे मंजूर कर लिया गया। इससे निर्माण पूरा होने के बाद कुल लागत का सही आकलन किया जा सकेगा। यह राजस्व लेबर विभाग के खाते में जमा किया जाएगा, जो बाद में केंद्र सरकार के पास पहुंचेगा। लेबर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जनहित कार्यों में इस राशि को लगाने की योजना बनाई गई है।
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केंद्र सरकार ने दिसंबर 2009 के बाद हुए निर्माण पर एक प्रतिशत का टैक्स लगाने की घोषणा कर दी है। समय अधिक बीतने के चलते निर्माण की लागत और वसूली का फार्मूला नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों ने नए निर्माणों पर सेस लगाने का निर्णय लिया गया। नोएडा प्राधिकरण के बिल्डिंग सेल में पिछले एक महीने में किसी भी नक्शे को मंजूर नहीं किया गया। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उच्च अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नक्शा मंजूरी से पहले निर्माण करने वाले आवंटी को शपथ पत्र देना होगा। इसमें आवंटी निर्माण पूरा होने के बाद जो लागत आएगी उसका एक प्रतिशत प्राधिकरण को चुकाएगा। ऐसा नहीं करने की दशा में प्राधिकरण कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा।
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सूत्रों ने बताया कि काफी समय से एक प्रतिशत टैक्स को लेकर फार्मूला खोजा जा रहा है। कई बिंदुओं पर विचार करने के बाद वित्त विभाग ने शपथपत्र का प्रस्ताव दिया, जिसे मंजूर कर लिया गया। इससे निर्माण पूरा होने के बाद कुल लागत का सही आकलन किया जा सकेगा। यह राजस्व लेबर विभाग के खाते में जमा किया जाएगा, जो बाद में केंद्र सरकार के पास पहुंचेगा। लेबर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जनहित कार्यों में इस राशि को लगाने की योजना बनाई गई है।
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