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‘जीत-हार की कहानी बयां करता था नगाड़ा’
Noida
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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नोएडा। सेक्टर-100 स्थित पाथवेज स्कूल में शनिवार से दो दिवसीय कहानी फेस्टिवल शुरू हुआ। यहां आयोजित नगाड़े की कार्यशाला विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पुष्कर से आए नगाड़ा वादकों ने बताया कि राजा महा राजाओं की जीत-हार नगाड़े की आवाज से बयां होती थी।
अमेरिका, लंदन, जापान, चीन, इटली, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया समेत तमाम देशों के लोगों को अपने नगाड़े के कौशल का मुरीद बना चुके नाथू लाल ने बताया कि प्राचीन काल से लेकर अब तक नगाड़े का विशेष महत्व रहा है। मंदिरों में नगाड़ा बजाने की प्रथा रही है लेकिन अब कई जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक नगाड़ा जगह लेता जा रहा है।
फेस्टिवल के पहले दिन करीब 400 लोगों ने अपनी प्रस्तुति दर्ज कराई। इसमें आस्ट्रेलिया के कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके आयोजक टीम वर्क के प्रबंधन निदेशक संजय कुमार राय ने बताया कि यह देश का पहला कहानी फेस्टिवल है और हर साल इस फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा।
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कठपुतली से लेकर बंदर भालू का कहानी तक
फेस्टिवल में कहानियों की प्रस्तुति के लिए 18 माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जहां एक ओर कठपुतली के नृत्य से कहानियों का मंचन किया गया, वहीं बच्चों को गुदगुदाने वाली बंदर भालू की कहानी भी इस फेस्टिवल में शामिल की गई हैं। कहानियों में समाचार पत्रों की भूमिका और इतिहास के किस्सों को भी मंचित किया गया। कहानी लेखन की कार्यशाला में लोगों की भीड़ लगी रही। कागज पर बच्चों ने अपनी चित्रकारी दिखाई।
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मजाकिया है नोएडा की यातायात व्यवस्था
आस्ट्रेलिया से आए कलाकारों ने नोएडा की यातायात व्यवस्था को मजाकिया बताया। कलाकार अप्रेल ने कहा कि यहां की सड़कों पर गाय और भैंस खुले घूमते रहते हैं। ऐसे में वाहन चलाना आसान नहीं है। वहीं कलाकार व्रेजी ने कहा कि नोएडा तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था का दुरुस्त होना काफी जरूरी है। कलाकार सनी ने बताया कि यहां का यातायात परेशान करने वाला है। यहां बहुत कम ही ऐसे लोग हैं, जो यातायात नियमों का पालन करते दिखते हैं। आस्ट्रेलिया से आए इन कलाकारों ने धरा और पानी के संरक्षण पर आधारित कहानी को डांस ड्रामा के जरिये पेश किया।
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अमेरिका, लंदन, जापान, चीन, इटली, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया समेत तमाम देशों के लोगों को अपने नगाड़े के कौशल का मुरीद बना चुके नाथू लाल ने बताया कि प्राचीन काल से लेकर अब तक नगाड़े का विशेष महत्व रहा है। मंदिरों में नगाड़ा बजाने की प्रथा रही है लेकिन अब कई जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक नगाड़ा जगह लेता जा रहा है।
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फेस्टिवल के पहले दिन करीब 400 लोगों ने अपनी प्रस्तुति दर्ज कराई। इसमें आस्ट्रेलिया के कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके आयोजक टीम वर्क के प्रबंधन निदेशक संजय कुमार राय ने बताया कि यह देश का पहला कहानी फेस्टिवल है और हर साल इस फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा।
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कठपुतली से लेकर बंदर भालू का कहानी तक
फेस्टिवल में कहानियों की प्रस्तुति के लिए 18 माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जहां एक ओर कठपुतली के नृत्य से कहानियों का मंचन किया गया, वहीं बच्चों को गुदगुदाने वाली बंदर भालू की कहानी भी इस फेस्टिवल में शामिल की गई हैं। कहानियों में समाचार पत्रों की भूमिका और इतिहास के किस्सों को भी मंचित किया गया। कहानी लेखन की कार्यशाला में लोगों की भीड़ लगी रही। कागज पर बच्चों ने अपनी चित्रकारी दिखाई।
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मजाकिया है नोएडा की यातायात व्यवस्था
आस्ट्रेलिया से आए कलाकारों ने नोएडा की यातायात व्यवस्था को मजाकिया बताया। कलाकार अप्रेल ने कहा कि यहां की सड़कों पर गाय और भैंस खुले घूमते रहते हैं। ऐसे में वाहन चलाना आसान नहीं है। वहीं कलाकार व्रेजी ने कहा कि नोएडा तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था का दुरुस्त होना काफी जरूरी है। कलाकार सनी ने बताया कि यहां का यातायात परेशान करने वाला है। यहां बहुत कम ही ऐसे लोग हैं, जो यातायात नियमों का पालन करते दिखते हैं। आस्ट्रेलिया से आए इन कलाकारों ने धरा और पानी के संरक्षण पर आधारित कहानी को डांस ड्रामा के जरिये पेश किया।