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ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे...हमला हुआ तो जिंद्रा ने मनीष के लिए खोले दरवाजे
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यूक्रेन में जिंद्रा परिवार के साथ ग्रीन जर्सी पहनी पीछे खड़ी भोपा की मनीषा राठी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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हमला हुआ तो जिंद्रा ने मनीष के लिए खोले दरवाजे
मुजफ्फरनगर। मुश्किल हालात में इंसान की पहचान होती है। रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो भोपा के मनीष राठी अपनी भतीजी महिमा के साथ सुमी शहर में मुश्किल में घिर गए थे। लेकिन उनके मित्र जिंद्रा ने दोनों को अपने घर में रोककर इंसानियत की मिसाल पेश की। दोनों को बॉर्डर की ओर नहीं जाने दिया। फिलहाल चाचा-भतीजी सुरक्षित हैं और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
मूल रूप से भोपा के रहने वाले और इन दिनों शहर में रह रहे मनीष राठी यूक्रेन के विभिन्न शहरों में दवा का कारोबार करते हैं। उनकी भतीजी महिमा राठी सुमी की स्टेट यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। रूस ने हमला किया तो चाचा-भतीजी ने भी यूक्रेन छोड़ने का मन बनाया, लेकिन तक तक रूस की सेना सुमी शहर में घुस चुकी थी। खतरे से घिरे मनीष राठी के लिए उनके सुमी के मित्र अक्ल जिंद्रा सहयोगी बनकर आए है। उन्होंने चाचा-भतीजी को अपने घर में जगह दी और बॉर्डर की ओर नहीं जाने दिया। जिंद्रा का घर सुमी शहर के बाहर स्थित है। रूसी सेना ने कई दिन पहले सुमी शहर पर भी हमला कर दिया था।
सुरक्षित है भाई और बेटी
भोपा कस्बा निवासी विनय राठी उर्फ बॉबी ने बताया कि बेटी एमबीबीएस के चौथे साल की पढ़ाई कर रही है। यूक्रेन के सुमी शहर में दोनों सुरक्षित है। महिमा ने बताया कि सुमी का यह घर घनी आबादी से दूर है। जिंद्रा परिवार में कुल पांच सदस्य है जो उसे अपनी बेटी की तरह ही रख रहे है। यह जरूर है कि अपने घर की खूब याद आ रही है। यहां से निकलने पर रोमानिया बॉर्डर के लिए 24 घंटे का सफर तय करना होगा। महिमा ने बताया कि रूसी सेना ने जिले का रेलवे स्टेशन उड़ा दिया है। इसलिए अब प्राइवेट वाहन से ही यह सफर तय किया जा सकता है। लेकिन लगातार हो रही बमबारी के कारण यह सफर भी खतरे से भरा हुआ है। पल-पल की जानकारी उससे ले रहे हैं। वह जहां पर है, यहां से रूस बॉर्डर केवल 40 किलोमीटर दूर है।
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मुजफ्फरनगर। मुश्किल हालात में इंसान की पहचान होती है। रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो भोपा के मनीष राठी अपनी भतीजी महिमा के साथ सुमी शहर में मुश्किल में घिर गए थे। लेकिन उनके मित्र जिंद्रा ने दोनों को अपने घर में रोककर इंसानियत की मिसाल पेश की। दोनों को बॉर्डर की ओर नहीं जाने दिया। फिलहाल चाचा-भतीजी सुरक्षित हैं और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
मूल रूप से भोपा के रहने वाले और इन दिनों शहर में रह रहे मनीष राठी यूक्रेन के विभिन्न शहरों में दवा का कारोबार करते हैं। उनकी भतीजी महिमा राठी सुमी की स्टेट यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। रूस ने हमला किया तो चाचा-भतीजी ने भी यूक्रेन छोड़ने का मन बनाया, लेकिन तक तक रूस की सेना सुमी शहर में घुस चुकी थी। खतरे से घिरे मनीष राठी के लिए उनके सुमी के मित्र अक्ल जिंद्रा सहयोगी बनकर आए है। उन्होंने चाचा-भतीजी को अपने घर में जगह दी और बॉर्डर की ओर नहीं जाने दिया। जिंद्रा का घर सुमी शहर के बाहर स्थित है। रूसी सेना ने कई दिन पहले सुमी शहर पर भी हमला कर दिया था।
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सुरक्षित है भाई और बेटी
भोपा कस्बा निवासी विनय राठी उर्फ बॉबी ने बताया कि बेटी एमबीबीएस के चौथे साल की पढ़ाई कर रही है। यूक्रेन के सुमी शहर में दोनों सुरक्षित है। महिमा ने बताया कि सुमी का यह घर घनी आबादी से दूर है। जिंद्रा परिवार में कुल पांच सदस्य है जो उसे अपनी बेटी की तरह ही रख रहे है। यह जरूर है कि अपने घर की खूब याद आ रही है। यहां से निकलने पर रोमानिया बॉर्डर के लिए 24 घंटे का सफर तय करना होगा। महिमा ने बताया कि रूसी सेना ने जिले का रेलवे स्टेशन उड़ा दिया है। इसलिए अब प्राइवेट वाहन से ही यह सफर तय किया जा सकता है। लेकिन लगातार हो रही बमबारी के कारण यह सफर भी खतरे से भरा हुआ है। पल-पल की जानकारी उससे ले रहे हैं। वह जहां पर है, यहां से रूस बॉर्डर केवल 40 किलोमीटर दूर है।
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