{"_id":"63fb3e9fc2594bd6a3035be4","slug":"we-should-be-proud-of-our-religion-and-culture-ram-maharaj-muzaffarnagar-news-c-14-1-134138-2023-02-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमें अपने धर्म और संस्कृति पर गौरव होना चाहिए : राम महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमें अपने धर्म और संस्कृति पर गौरव होना चाहिए : राम महाराज
विज्ञापन
शुकदेव आश्रम में आयोजित राजस्थान कथा को संबोधित करते कथा व्यास दिग्विजय राम महाराज।
धर्म नगरी शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम में साप्ताहिक भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। राजस्थान से पधारे कथा व्यास दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि अपेक्षा ही दु:ख का कारण हैं। हमें अपने धर्म और संस्कृति पर गौरव होना चाहिए। मानव की जीभ में जब तक ताकत है, हरि नाम जप लो। अंत समय में जीभ हिले ना हिले, न काया न माया काम आती हैं। व्यक्ति अपनी मौत स्वयं कर लेता हैं।
धर्म नगरी शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम के हेलीपैड परिसर में बनाए गए पांडाल में साप्ताहिक भागवत कथा में महाराज ने कहा कि पवित्र पदार्थों का सेवन करें, मांस मदिरा सेवन महापाप हैं। अपनी आत्मा की आवाज को मत दबाओं। आत्मा की आवाज सुनने वाले सुबह जल्दी उठते हैं। व्रत का अर्थ तपस्या है। व्रत के लिए अल्पहारी बने, अधिक भोजन से नींद आती हैं। आश्रम कोई भी बुरा नहीं। भागवत भजन, संत सेवा, समाज सेवा बड़ा उपकर्म है। पिता व गुरु वहीं है, जो भक्ति के मार्ग पर लगाएं।
कहा कि सनातन धर्म जोड़ने की बात सिखाता है न कि तोड़ने की। पश्चिमी संस्कृति में संबंध तोड़ने की परंपरा है। सनातन धर्म में ऐसा कोई शब्द नहीं हैं, जो परिवार को तोड़ता हो। ऋषि परंपराओं का त्याग न करें, इसे जीवन में धारण करें। भगवान से निकटता चाहते हैंं तो मौन धारण करें। जो व्यक्ति मौन रहना सीख जाता हैं, उसके जीवन की महाभारत समाप्त हो जाती हैं। कथा व्यास गुरु संत रमता महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। राजस्थान से पधारे कथा व्यास दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि अपेक्षा ही दु:ख का कारण हैं। हमें अपने धर्म और संस्कृति पर गौरव होना चाहिए। मानव की जीभ में जब तक ताकत है, हरि नाम जप लो। अंत समय में जीभ हिले ना हिले, न काया न माया काम आती हैं। व्यक्ति अपनी मौत स्वयं कर लेता हैं।
धर्म नगरी शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम के हेलीपैड परिसर में बनाए गए पांडाल में साप्ताहिक भागवत कथा में महाराज ने कहा कि पवित्र पदार्थों का सेवन करें, मांस मदिरा सेवन महापाप हैं। अपनी आत्मा की आवाज को मत दबाओं। आत्मा की आवाज सुनने वाले सुबह जल्दी उठते हैं। व्रत का अर्थ तपस्या है। व्रत के लिए अल्पहारी बने, अधिक भोजन से नींद आती हैं। आश्रम कोई भी बुरा नहीं। भागवत भजन, संत सेवा, समाज सेवा बड़ा उपकर्म है। पिता व गुरु वहीं है, जो भक्ति के मार्ग पर लगाएं।
विज्ञापन
कहा कि सनातन धर्म जोड़ने की बात सिखाता है न कि तोड़ने की। पश्चिमी संस्कृति में संबंध तोड़ने की परंपरा है। सनातन धर्म में ऐसा कोई शब्द नहीं हैं, जो परिवार को तोड़ता हो। ऋषि परंपराओं का त्याग न करें, इसे जीवन में धारण करें। भगवान से निकटता चाहते हैंं तो मौन धारण करें। जो व्यक्ति मौन रहना सीख जाता हैं, उसके जीवन की महाभारत समाप्त हो जाती हैं। कथा व्यास गुरु संत रमता महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिया।
विज्ञापन