{"_id":"5883a4474f1c1b9a25effe30","slug":"vyaparion-ki-samasyaon-ko-samjhein","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापारियों की समस्याओं को समझें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापारियों की समस्याओं को समझें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। पहले चरण के चुनाव को लेकर नेताओं के साथ वोटरों, नागरिकों और व्यापारियों में भी हलचल तेज हो गई है। जहां नेता व्यापारियों को लुभाने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं व्यापारी भी इस बार अपने मुद्दे लेकर अड़ गए हैं। व्यापारी गिरते कारोबार और समस्या पर आश्वासन नहीं, काम चाहते हैं। उन्होंने इस बार जनप्रतिनिधियों की कागजी घोषणा को किनारे करने का मन बना लिया है। निष्पक्ष नेता और विकास कराने वाले को ही तवज्जो देने की ठानी है।
सूबे के 15 जिलों में पहले चरण में 11 फरवरी को मतदान होना है। इसके लिए मंगलवार से सियासत के सूरमा अपनी ताकत और जोशखरोश के साथ मैदान में डटेंगे, लेकिन राजनीति को लेकर गली-कूचों पर भी सियासी माहौल गरम है। वादों की सरकार और कागजी नेताओं से ऊब चुके वोटर कुछ नया चाहते हैं। शनिवार को नवीन मंडी में व्यापारियों ने सियासी सूरमाओं और राजनीति पर खुलकर विचार रखे। व्यापारियों के मन में टीस है कि जीतने के बाद उनकी ओर कोई झांकता तक नहीं है। व्यापारी नेता अनिल कंसल बोले कि नोटबंदी की मार व्यापारी वर्ग पर ज्यादा पड़ी है।
अशोक कंसल, संजय, अभय गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधि निष्पक्ष रूप से काम करें तो शहर का विकास हो सकता है। मंडी में अनेक प्रकार की समस्याएं कई वर्षों से बनी हैं। व्यापारियों के वोट सबको चाहिए, उनकी फरियाद किसी को नहीं दिखती है। समस्या को लेकर व्यापारी भटकता है। रजनीश, रमेश सिंघल, अमित गर्ग, नरेंद्र कुमार, कीर्ति भूषण, सुनील, दीपक जैन आदि बोले कि चुनावी सीजन में नेता केवल आश्वासन के झुनझुने बजाते हैं, जीत मिलते ही पहचानना भी भूल जाते हैं।
विज्ञापन
व्यापारियों का सेल टैक्स विभाग शोषण करता आ रहा है, जबकि गुड़, चावल समेत अन्य खाद्य वस्तुओं के माफिया मौज मार रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचने वाली दरखास्त ढेर में दबकर दम तोड़ देती है। मंडी में दुकानों को किराया हर साल व्यापारियों को विश्वास में लिए बिना बढ़ा दिया जाता है. जो पांच फीसदी तक बढ़ता है। व्यापारियों ने कहा कि नेता ऐसा चाहिए जो शहर के विकास, सड़क, बिजली-पानी के अलावा उनके लिए कोई योजना लेकर आए। जीतने के बाद समान व्यवहार और निष्पक्ष काम करें।
विज्ञापन
सूबे के 15 जिलों में पहले चरण में 11 फरवरी को मतदान होना है। इसके लिए मंगलवार से सियासत के सूरमा अपनी ताकत और जोशखरोश के साथ मैदान में डटेंगे, लेकिन राजनीति को लेकर गली-कूचों पर भी सियासी माहौल गरम है। वादों की सरकार और कागजी नेताओं से ऊब चुके वोटर कुछ नया चाहते हैं। शनिवार को नवीन मंडी में व्यापारियों ने सियासी सूरमाओं और राजनीति पर खुलकर विचार रखे। व्यापारियों के मन में टीस है कि जीतने के बाद उनकी ओर कोई झांकता तक नहीं है। व्यापारी नेता अनिल कंसल बोले कि नोटबंदी की मार व्यापारी वर्ग पर ज्यादा पड़ी है।
विज्ञापन
अशोक कंसल, संजय, अभय गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधि निष्पक्ष रूप से काम करें तो शहर का विकास हो सकता है। मंडी में अनेक प्रकार की समस्याएं कई वर्षों से बनी हैं। व्यापारियों के वोट सबको चाहिए, उनकी फरियाद किसी को नहीं दिखती है। समस्या को लेकर व्यापारी भटकता है। रजनीश, रमेश सिंघल, अमित गर्ग, नरेंद्र कुमार, कीर्ति भूषण, सुनील, दीपक जैन आदि बोले कि चुनावी सीजन में नेता केवल आश्वासन के झुनझुने बजाते हैं, जीत मिलते ही पहचानना भी भूल जाते हैं।
विज्ञापन
व्यापारियों का सेल टैक्स विभाग शोषण करता आ रहा है, जबकि गुड़, चावल समेत अन्य खाद्य वस्तुओं के माफिया मौज मार रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचने वाली दरखास्त ढेर में दबकर दम तोड़ देती है। मंडी में दुकानों को किराया हर साल व्यापारियों को विश्वास में लिए बिना बढ़ा दिया जाता है. जो पांच फीसदी तक बढ़ता है। व्यापारियों ने कहा कि नेता ऐसा चाहिए जो शहर के विकास, सड़क, बिजली-पानी के अलावा उनके लिए कोई योजना लेकर आए। जीतने के बाद समान व्यवहार और निष्पक्ष काम करें।