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शुकदेव मुनि की तपोभूमि पर उदय होता है पुण्य
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 14 Nov 2016 12:51 AM IST
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श्री शुकदेव आश्रम में वीतराग स्वामी कल्याण देव के साथ विख्यात भागवत प्रवक्ता संत प्रभुदत्त ब्रहमचारी
- फोटो : अमर उजाला
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पौराणिक शुकतीर्थ देश-विदेश में श्रीमद्भागवत कथा का मुख्य केंद्र बन गया है। व्यास नंदन श्री शुकदेव मुनि की तपोभूमि पर अक्षय वट वृक्ष की छांव में कथा की अमृत वर्षा कर संत और कथा व्यास पुण्य उदय करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में पांच कथाएं चल रही हैं।
शुकतीर्थ में पांडव वंशज राजा परीक्षित ने महर्षि शुकदेव मुनि के श्री मुख से भागवत कथा सुनकर मोक्ष की प्राप्ति की थी। श्री शुकदेव आश्रम समेत तीर्थ के मंदिरों और आश्रमों में कथा श्रवण को देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वीतराग स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर मां आनंदमयी ने दो बार यहां संयम सप्ताह किया। पंडित पुरुषोत्तम लाल शर्मा जयपुर ने तीर्थ में सबसे ज्यादा 43 भागवत कथाएं सुनाईं।
1958 में मथुरा से आए सुदर्शन सिंह चक्र ने शुकदेव मंदिर में भागवत पाठ किया। दंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी विष्णु आश्रम महाराज ने भागवत ज्ञान से शुक्रताल को आध्यात्मिक उत्कर्ष प्रदान किया। गुजरात के नाड़ियाद के विख्यात कथा वाचक रामचंद्र डोंगरे जी महाराज ने अपने जीवन की अंतिम कथा शुक्रताल में सितंबर 1990 में सुनाई थी।
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सेवाभावी संत स्वामी कल्याणदेव की अगाध श्रद्धा में राष्ट्र संत मोरारी बापू ने वर्ष 1988 में पहली बार तीर्थ में रामकथा कही। 1991 और 2008 में मोरारी बापू ने भागवत तथा गोपी गीत गायन की कथाएं भी सुनाईं। उन्होंने गंगा तट पर अपनी राम कुटी बना रखी है। संत रमेश भाई ओझा भागवत पीठ में अनेक कथाएं कर चुके हैं।
श्री हरि बाबा, स्वामी अखंडानंद सरस्वती, कृष्ण शंकर शास्त्री, देवदास बिठुर, श्रीमन नारायण, किरीट भाई, स्वामी रामभद्राचार्य, योगेंद्र भट्ट शास्त्री, स्वामी सदानंद, शंकराचार्य दिव्यानंद तीर्थ, रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य आदि विख्यात संत और भागवत मर्मज्ञ तीर्थ नगरी में कथा कह चुके हैं।
देवराह बाबा के दर्शन को उमड़े थे श्रद्धालु
शुक्रताल। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में महान संत देवराह बाबा भी मचान लगा चुके हैं। वर्ष 1960 में स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर देवराह बाबा वृंदावन से यहां गंगा मेले में पधारे थे। स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि योगी संत देवराह बाबा के दर्शन को मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती थी।
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शुकतीर्थ में पांडव वंशज राजा परीक्षित ने महर्षि शुकदेव मुनि के श्री मुख से भागवत कथा सुनकर मोक्ष की प्राप्ति की थी। श्री शुकदेव आश्रम समेत तीर्थ के मंदिरों और आश्रमों में कथा श्रवण को देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वीतराग स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर मां आनंदमयी ने दो बार यहां संयम सप्ताह किया। पंडित पुरुषोत्तम लाल शर्मा जयपुर ने तीर्थ में सबसे ज्यादा 43 भागवत कथाएं सुनाईं।
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1958 में मथुरा से आए सुदर्शन सिंह चक्र ने शुकदेव मंदिर में भागवत पाठ किया। दंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी विष्णु आश्रम महाराज ने भागवत ज्ञान से शुक्रताल को आध्यात्मिक उत्कर्ष प्रदान किया। गुजरात के नाड़ियाद के विख्यात कथा वाचक रामचंद्र डोंगरे जी महाराज ने अपने जीवन की अंतिम कथा शुक्रताल में सितंबर 1990 में सुनाई थी।
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सेवाभावी संत स्वामी कल्याणदेव की अगाध श्रद्धा में राष्ट्र संत मोरारी बापू ने वर्ष 1988 में पहली बार तीर्थ में रामकथा कही। 1991 और 2008 में मोरारी बापू ने भागवत तथा गोपी गीत गायन की कथाएं भी सुनाईं। उन्होंने गंगा तट पर अपनी राम कुटी बना रखी है। संत रमेश भाई ओझा भागवत पीठ में अनेक कथाएं कर चुके हैं।
श्री हरि बाबा, स्वामी अखंडानंद सरस्वती, कृष्ण शंकर शास्त्री, देवदास बिठुर, श्रीमन नारायण, किरीट भाई, स्वामी रामभद्राचार्य, योगेंद्र भट्ट शास्त्री, स्वामी सदानंद, शंकराचार्य दिव्यानंद तीर्थ, रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य आदि विख्यात संत और भागवत मर्मज्ञ तीर्थ नगरी में कथा कह चुके हैं।
देवराह बाबा के दर्शन को उमड़े थे श्रद्धालु
शुक्रताल। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में महान संत देवराह बाबा भी मचान लगा चुके हैं। वर्ष 1960 में स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर देवराह बाबा वृंदावन से यहां गंगा मेले में पधारे थे। स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि योगी संत देवराह बाबा के दर्शन को मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती थी।