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जानसठ में गांव कवाल में बुखार से महिला समेत दो की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला,मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 20 Oct 2016 04:03 PM IST
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जानसठ में गांव कवाल में बुखार से महिला सहित दो लोगों की मौत होने से गांव में दहशत व्याप्त है। गांव में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग चेता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा शिविर व मच्छर मारने की दवाई का छिड़काव नहीं कराने को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
गांव कवाल में पिछले 15 दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जानलेवा बुखार के चलते मौत हो चुकी है। मंगलवार की शाम सहाना पत्नी शराफत व असगर पुत्र मोहम्मद उमर की बुखार से मौत होने से गांव में दहशत व्याप्त हो गई है। ग्राम प्रधान मोहम्मद इस्लाम, जिला पंचायत सदस्य विक्रम सैनी, जगदीश, कन्हैया, महताब, शमशाद, नरेश आदि ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से गांव में बुखार से मरने वाले लोगों की सूचना दी गई थी।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकरण की नींद सोया हुआ है। गांव में 500 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का इलाज जानसठ, मुजफ्फरनगर व मेरठ आदि सरकारी व निजी अस्पतालों में चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग को कई बार गांव में छिड़काव व फॉगिंग तथा शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच करने को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों से बीमारियों पर रोकथाम लगाने की मांग की है।
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गांव कवाल में पिछले 15 दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जानलेवा बुखार के चलते मौत हो चुकी है। मंगलवार की शाम सहाना पत्नी शराफत व असगर पुत्र मोहम्मद उमर की बुखार से मौत होने से गांव में दहशत व्याप्त हो गई है। ग्राम प्रधान मोहम्मद इस्लाम, जिला पंचायत सदस्य विक्रम सैनी, जगदीश, कन्हैया, महताब, शमशाद, नरेश आदि ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से गांव में बुखार से मरने वाले लोगों की सूचना दी गई थी।
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इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकरण की नींद सोया हुआ है। गांव में 500 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का इलाज जानसठ, मुजफ्फरनगर व मेरठ आदि सरकारी व निजी अस्पतालों में चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग को कई बार गांव में छिड़काव व फॉगिंग तथा शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच करने को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों से बीमारियों पर रोकथाम लगाने की मांग की है।
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