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नवजात बच्चों की मौत के बाद अस्पताल में तोड़फोड़
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 24 Aug 2016 12:51 AM IST
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बच्चों के शव उठाकर ले जाते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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शाहपुर सीएचसी में प्रसव के दौरान गांव कसेरवा की दो महिलाओं के नवजात शिशुओं की मौत हो गई। शिशुओं की मौत पर गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर कई घंटे हंगामा किया। सीएचसी पर ओपीडी कर रहे चिकित्सकों के साथ हाथापाई करने के साथ तोड़फोड़ भी की गई। सीएमओ, एसडीएम और सीओ ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली। लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। दूसरी ओर इस हंगामे और हाथापाई से नाराज चिकित्सकों ने सीएचसी पर कार्य बन्द कर दिया।
गांव कसेरवा निवासी शबनम पत्नी मुर्सलीन और बाल्लो पत्नी खुर्शीद को सोमवार को प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ नर्स ने प्रसव के दौरान लापरवाही की। देर रात तीन बजे बाल्लो ने और सुबह पांच बजे शबनम ने शिशु को जन्म दिया। आरोप है कि स्टाफ नर्सों की लापरवाही के चलते कुछ देर बाद दोनों नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया।
शिशुओं के मौत की सूचना पर गुस्साए ग्रामीणों ने सीएचसी पहुंचकर हंगामा खड़ा कर दिया। सीएचसी पर ओपीडी कर रहे डॉ विपुल कुशवाहा और डॉ अमित वर्मा के साथ हाथापाई करने के साथ वहां तोड़फोड़ कर दी। हंगामे की सूचना पर थाना प्रभारी गिरीशचंद त्यागी मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण शांत नहीं हुए। ग्रामीण सीएमओ को बुलाने की मांग करने लगे। थाना प्रभारी ने जिम्मेदार लोगों को समझाते हुए दोनों जच्चा महिलाओं को उनकी हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कराया।
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हंगामे के बाद सीएचसी पर चिकित्सकों और कर्मियों ने तोड़फोड़ एवं दुर्व्यवहार किए जाने पर कामकाज ठप कर दिया, जिसके चलते आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगभग दो घंटे के हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, डिप्टी सीएमओ एसके अग्रवाल, एसडीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी, सीओ बुढ़ाना सुधीर तोमर ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सीएमओ ने लापरवाही बरतने वाली दोनों स्टाफ नर्सों रमन गुलियान व संविदा स्टाफ नर्स डोली को निलंबित कर जांच कराने का आश्वासन दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने लापरवाही बरतने वाले स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। हंगामा कर रहे ग्रामीणों का आरोप था कि अस्पताल में जेनरेटर एवं इनवर्टर की सुविधा होते हुए भी मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जाता है।
यहां पर कोई भी महिला चिकित्सक न होने के कारण प्रसव के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। जच्चा के परिजन मेहरबान पुत्र इजाजू ने थाने पर एक चिकित्सक एवं दो स्टाफ नर्सों पर लापरवाही बरतने और अवैध तरीके से पैसा मांगने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। सीओ बुढ़ाना ने दी गई तहरीर के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए।
सीएचसी पर भारी अनियमितताएं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भारी अनियमितता एवं लापरवाही से शाहपुर पुलिस भी परेशान है। हंगामा कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुंचे थाना प्रभारी गिरीशचंद त्यागी ने बताया कि वे कई बार यहां की बिगड़ी व्यवस्था को लेकर विभागीय अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं। आपातकालीन समय में कोई भी चिकित्सक न मिलना आम बात है। मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने भी सीएचसी पर कार्यरत कर्मियों की लापरवाही की बात से सहमति जताते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दबाव डालने से शिशुओं की मौत हुई
नवजात शिशुओं की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए निलंबित की गई स्टाफ नर्स रमन गुलियान और डोली ने बताया कि उन्होंने परिजनों को गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व ही उनकी स्थिति के बारे में बताते हुए रेफर करने के लिए कहा था, लेकिन परिजनों ने उन्हें लिखकर दिया कि उनकी डिलीवरी यहीं कर दें। डिलीवरी के दौरान साथ में आई महिलाओं ने जच्चा के ऊपर दबाव दिया। जिस कारण बच्चों की मौत हुई। उन्होंने कोई लापरवाही नहीं बरती।
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गांव कसेरवा निवासी शबनम पत्नी मुर्सलीन और बाल्लो पत्नी खुर्शीद को सोमवार को प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ नर्स ने प्रसव के दौरान लापरवाही की। देर रात तीन बजे बाल्लो ने और सुबह पांच बजे शबनम ने शिशु को जन्म दिया। आरोप है कि स्टाफ नर्सों की लापरवाही के चलते कुछ देर बाद दोनों नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया।
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शिशुओं के मौत की सूचना पर गुस्साए ग्रामीणों ने सीएचसी पहुंचकर हंगामा खड़ा कर दिया। सीएचसी पर ओपीडी कर रहे डॉ विपुल कुशवाहा और डॉ अमित वर्मा के साथ हाथापाई करने के साथ वहां तोड़फोड़ कर दी। हंगामे की सूचना पर थाना प्रभारी गिरीशचंद त्यागी मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण शांत नहीं हुए। ग्रामीण सीएमओ को बुलाने की मांग करने लगे। थाना प्रभारी ने जिम्मेदार लोगों को समझाते हुए दोनों जच्चा महिलाओं को उनकी हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कराया।
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हंगामे के बाद सीएचसी पर चिकित्सकों और कर्मियों ने तोड़फोड़ एवं दुर्व्यवहार किए जाने पर कामकाज ठप कर दिया, जिसके चलते आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगभग दो घंटे के हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, डिप्टी सीएमओ एसके अग्रवाल, एसडीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी, सीओ बुढ़ाना सुधीर तोमर ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सीएमओ ने लापरवाही बरतने वाली दोनों स्टाफ नर्सों रमन गुलियान व संविदा स्टाफ नर्स डोली को निलंबित कर जांच कराने का आश्वासन दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने लापरवाही बरतने वाले स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। हंगामा कर रहे ग्रामीणों का आरोप था कि अस्पताल में जेनरेटर एवं इनवर्टर की सुविधा होते हुए भी मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जाता है।
यहां पर कोई भी महिला चिकित्सक न होने के कारण प्रसव के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। जच्चा के परिजन मेहरबान पुत्र इजाजू ने थाने पर एक चिकित्सक एवं दो स्टाफ नर्सों पर लापरवाही बरतने और अवैध तरीके से पैसा मांगने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। सीओ बुढ़ाना ने दी गई तहरीर के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए।
सीएचसी पर भारी अनियमितताएं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भारी अनियमितता एवं लापरवाही से शाहपुर पुलिस भी परेशान है। हंगामा कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुंचे थाना प्रभारी गिरीशचंद त्यागी ने बताया कि वे कई बार यहां की बिगड़ी व्यवस्था को लेकर विभागीय अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं। आपातकालीन समय में कोई भी चिकित्सक न मिलना आम बात है। मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने भी सीएचसी पर कार्यरत कर्मियों की लापरवाही की बात से सहमति जताते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दबाव डालने से शिशुओं की मौत हुई
नवजात शिशुओं की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए निलंबित की गई स्टाफ नर्स रमन गुलियान और डोली ने बताया कि उन्होंने परिजनों को गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व ही उनकी स्थिति के बारे में बताते हुए रेफर करने के लिए कहा था, लेकिन परिजनों ने उन्हें लिखकर दिया कि उनकी डिलीवरी यहीं कर दें। डिलीवरी के दौरान साथ में आई महिलाओं ने जच्चा के ऊपर दबाव दिया। जिस कारण बच्चों की मौत हुई। उन्होंने कोई लापरवाही नहीं बरती।