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वाहन टेंडर घोटाले में दो बाबू सस्पेंड, एनआरएचएम निदेशक के आदेश पर हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 21 Apr 2017 01:10 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मोबाइल हेल्थ टीम के वाहन टेंडर घोटाले में निदेशालय ने सीएमओ कार्यालय के दो बाबुओं को सस्पेंड कर दिया है। पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार सहित 11 को घोटाले का दोषी पाया गया है। शासन की त्वरित कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में पूर्व सीएमओ और अन्य चिकित्सा प्रभारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
एनआरएचएम योजना के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन में मोबाइल हेल्थ टीमों के लिए तत्कालीन सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने 27 वाहनों के टेंडर निकाले थे। लखनऊ से आई ऑडिट टीम ने वाहनों की टेंडर प्रक्रिया में एक ही वित्तीय वर्ष में 15 लाख से ज्यादा गड़बड़झाला पाया था। प्राइवेट वाहन एजेंसियों के मालिकों से मिलीभगत कर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने नियमों के विरुद्ध वाहनों का प्रयोग दिखाया। निर्धारित छुट्टियों के बावजूद एनआरएचएम के खातों से वाहन टेंडरों के बिल पास होते गए।
ऑडिट टीम ने जिले में हुए घपले की रिपोर्ट मिशन निदेशक को दी। निदेशक ने डीएम को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। डीएम डीके सिंह ने सीडीओ अंकित अग्रवाल की अध्यक्षता में चार सदस्य जांच टीम गठित कर दी। जांच में गोलमाल पाया गया। डीएम ने एनआरएचएम निदेशक को कार्रवाई की संस्तुति की। जांच में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार और जिले में चार स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारियों डॉ मुकेश कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश और डॉ संजीव समेत 11 को दोषी माना गया।
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यह घपला 2015-16 और 2016-17 के वित्तीय वर्ष में किया गया। जांच में सीएमओ ऑफिस के वित्तीय लेखाधिकारी डॉ देवानंद और पटल सहायक पूरण सिंह को भी भुगतान का अनुमोदन का दोषी माना है। साथ ही जिन चार फर्मों ने अपने वाहन गलत तरीके से टेंडर में समायोजित किए उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
रिपोर्ट मिलने के बाद निदेशालय ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। सबसे पहले एनआरएचएम का कार्य देख रहे दो बाबुओं बालेश्वर और ब्रजभूषण चौहान को सस्पेंड कर दिया गया है। मिशन निदेशक की त्वरित कार्रवाई से सीएमओ ऑफिस में हड़कंप मच गया है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि निदेशालय से दो लिपिकों के सस्पेंड किए जाने का आदेश मिल गया है। उन्होंने अपने स्तर से कार्रवाई कर दी है।
खुल सकता है एक और बड़ा घोटाला
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग में हेराफेरी का खेल कम नहीं है। मंडल आयुक्त से जिले के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वार्षिक रखरखाव के बजट में गोलमाल की शिकायत की गई है। हर साल स्वास्थ्य केंद्रों पर अनराइड फंड और यूजर चार्ज के रूप में सवा लाख रुपये का बजट आवंटित किया जाता है।
शिकायतकर्ता ऋषिपाल ने सहारनपुर मंडल के आयुक्त एमपी अग्रवाल को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने अतिरिक्त पीएचसी पर रखरखाव के फर्जी बिल दर्शाकर बजट की बंदरबाट कर ली। मामले की जांच एसीएमओ कर रहे हैं। शिकायर्ता का पक्ष भी नहीं सुना गया है। वह इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
स्वास्थ्य निदेशक ने ली सीएमओ से जानकारी
मुजफ्फरनगर। वाहन टेंडर घोटाले के खुलासे के बाद सहारनपुर मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक ने सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा से पूरे मामले की जानकारी ली। जांच में दोषी पाए गए चार स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को हटाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। अमर उजाला में मामले का खुलासा होने के बाद एडी हेल्थ ने बृहस्पतिवार को पूरे प्रकरण का इनपुट लिया। जिन स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों को जांच में दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
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एनआरएचएम योजना के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन में मोबाइल हेल्थ टीमों के लिए तत्कालीन सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने 27 वाहनों के टेंडर निकाले थे। लखनऊ से आई ऑडिट टीम ने वाहनों की टेंडर प्रक्रिया में एक ही वित्तीय वर्ष में 15 लाख से ज्यादा गड़बड़झाला पाया था। प्राइवेट वाहन एजेंसियों के मालिकों से मिलीभगत कर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने नियमों के विरुद्ध वाहनों का प्रयोग दिखाया। निर्धारित छुट्टियों के बावजूद एनआरएचएम के खातों से वाहन टेंडरों के बिल पास होते गए।
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ऑडिट टीम ने जिले में हुए घपले की रिपोर्ट मिशन निदेशक को दी। निदेशक ने डीएम को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। डीएम डीके सिंह ने सीडीओ अंकित अग्रवाल की अध्यक्षता में चार सदस्य जांच टीम गठित कर दी। जांच में गोलमाल पाया गया। डीएम ने एनआरएचएम निदेशक को कार्रवाई की संस्तुति की। जांच में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार और जिले में चार स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारियों डॉ मुकेश कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश और डॉ संजीव समेत 11 को दोषी माना गया।
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यह घपला 2015-16 और 2016-17 के वित्तीय वर्ष में किया गया। जांच में सीएमओ ऑफिस के वित्तीय लेखाधिकारी डॉ देवानंद और पटल सहायक पूरण सिंह को भी भुगतान का अनुमोदन का दोषी माना है। साथ ही जिन चार फर्मों ने अपने वाहन गलत तरीके से टेंडर में समायोजित किए उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
रिपोर्ट मिलने के बाद निदेशालय ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। सबसे पहले एनआरएचएम का कार्य देख रहे दो बाबुओं बालेश्वर और ब्रजभूषण चौहान को सस्पेंड कर दिया गया है। मिशन निदेशक की त्वरित कार्रवाई से सीएमओ ऑफिस में हड़कंप मच गया है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि निदेशालय से दो लिपिकों के सस्पेंड किए जाने का आदेश मिल गया है। उन्होंने अपने स्तर से कार्रवाई कर दी है।
खुल सकता है एक और बड़ा घोटाला
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग में हेराफेरी का खेल कम नहीं है। मंडल आयुक्त से जिले के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वार्षिक रखरखाव के बजट में गोलमाल की शिकायत की गई है। हर साल स्वास्थ्य केंद्रों पर अनराइड फंड और यूजर चार्ज के रूप में सवा लाख रुपये का बजट आवंटित किया जाता है।
शिकायतकर्ता ऋषिपाल ने सहारनपुर मंडल के आयुक्त एमपी अग्रवाल को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने अतिरिक्त पीएचसी पर रखरखाव के फर्जी बिल दर्शाकर बजट की बंदरबाट कर ली। मामले की जांच एसीएमओ कर रहे हैं। शिकायर्ता का पक्ष भी नहीं सुना गया है। वह इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
स्वास्थ्य निदेशक ने ली सीएमओ से जानकारी
मुजफ्फरनगर। वाहन टेंडर घोटाले के खुलासे के बाद सहारनपुर मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक ने सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा से पूरे मामले की जानकारी ली। जांच में दोषी पाए गए चार स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को हटाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। अमर उजाला में मामले का खुलासा होने के बाद एडी हेल्थ ने बृहस्पतिवार को पूरे प्रकरण का इनपुट लिया। जिन स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों को जांच में दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।