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केवल पूजा-पाठ ही धर्म नहीं है: चंद्रमोहन
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 10 Apr 2017 12:30 AM IST
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कार्यक्रम में मौजूद परमधाम न्यास के अनुयायी।
- फोटो : अमर उजाला
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अरिहंतपुरम स्थित परमधाम में रविवार को त्रिवेणी दर्शन (एकजुटता महायज्ञ) का आयोजन किया गया। क्रांति गुरु चंद्रमोहन ने कहा कि केवल पूजा-पाठ ही धर्म नहीं है। जब तक मानवता का भाव मनुष्य के भीतर नहीं है, तब तक वह धार्मिक नहीं कहलाता है। मानव स्थापित करने के लिए जाति-व्यवस्था को समाप्त करना होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। इसके बाद क्रांतिकारियों की महाआरती की गई। क्रांतिगुरु चंद्रमोहन ने कहा कि समय-समय पर मानवता की स्थापना में अनेकों क्रांतिकारियों ने योगदान दिया। राम, कृष्ण, बुद्ध हो या क्रांतिकारी सभी का मुख्य लक्ष्य था मानवता व एकजुटता की स्थापना करना।
इसलिए परमधाम का मानना है कि क्रांतिकारी हमारे वास्तविक माता-पिता है। इनकी उपेक्षा करके किया गया कोई भी पूजा, पाठ, दान, तीर्थ-व्रत आदि परमात्मा स्वीकार नहीं करता। चंद्रमोहन जी ने अहिंसा परमो धर्म का अर्थ भी विस्तार से समझाया। सबसे महत्वपूर्ण त्रिवेणी मनुष्य के भीतर है।
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जिसमें इंगला (गंगा), पिंगला (यमुना) अैर गुप्त नाड़ी (सरस्वती) का संगम है। इसी त्रिवेणी के लिए संतों ने कहा कि वहां डुबकी लगाने पर कौआ भी हंस (पवित्र) बन जाता है। कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा आदि क्षेत्रों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। इसके बाद क्रांतिकारियों की महाआरती की गई। क्रांतिगुरु चंद्रमोहन ने कहा कि समय-समय पर मानवता की स्थापना में अनेकों क्रांतिकारियों ने योगदान दिया। राम, कृष्ण, बुद्ध हो या क्रांतिकारी सभी का मुख्य लक्ष्य था मानवता व एकजुटता की स्थापना करना।
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इसलिए परमधाम का मानना है कि क्रांतिकारी हमारे वास्तविक माता-पिता है। इनकी उपेक्षा करके किया गया कोई भी पूजा, पाठ, दान, तीर्थ-व्रत आदि परमात्मा स्वीकार नहीं करता। चंद्रमोहन जी ने अहिंसा परमो धर्म का अर्थ भी विस्तार से समझाया। सबसे महत्वपूर्ण त्रिवेणी मनुष्य के भीतर है।
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जिसमें इंगला (गंगा), पिंगला (यमुना) अैर गुप्त नाड़ी (सरस्वती) का संगम है। इसी त्रिवेणी के लिए संतों ने कहा कि वहां डुबकी लगाने पर कौआ भी हंस (पवित्र) बन जाता है। कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा आदि क्षेत्रों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।