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पूर्व विधायक डॉ जीएस विनोद का निधन
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:42 AM IST
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पूर्व विधायक डॉ. जीएस विनोद (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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चरथावल के पूर्व विधायक डॉ. जीएस विनोद का ह्दयाघात से निधन हो गया है। ब्रह्मपुरी आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों से जुड़े लोगों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने शामिल होकर श्रद्धांजलि दी।
थानाभवन के भाटूखेड़ी गांव के मूल निवासी 75 वर्षीय पूर्व विधायक डॉ जीएस विनोद लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र के ब्रह्मपुरी में उनका दिल का दौरा पड़ने से देहावसान हो गया। निधन की सूचना पर परिचितों और शुभचिंतकों का घर पर तांता लग गया। शुक्रवार दुपहर साढे़ बारह उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। नदी रोड स्थित शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ज्येष्ठ पुत्र सुभाष ने मुखाग्नि दी। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाषचंद शर्मा, वेदपाल ठेकेदार आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. विनोद की पत्नी का तीन साल पहले निधन हो गया था। उनके तीन पुत्रों सुभाष, चंद्रशेखर और अशोक का भरापूरा परिवार है। पूर्व विधायक की अंत्येष्टि में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। आर्य समाज आनंदपुरी के पूर्व प्रधान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने डॉ विनोद के निधन पर दु:ख प्रकट किया है। आचार्य ने कहा कि आर्य समाज के समाज सुधार और वैदिक प्रचार कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता रहती थी।
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सियासी चमक में भी सादगी नहीं भूले डॉ विनोद
सियासत की चमक भी पूर्व विधायक डॉ. जीएस विनोद की सादगी और सरलता को फीका नहीं कर पाई। दो बार विधायक चुने जाने के बावजूद उन्होंने जीवन भर रोडवेज की बस में सफर किया। चौधरी चरण सिंह के जीवन से प्रेरित डॉ विनोद का क्षेत्र से गहरा लगाव था, जिस कारण राम लहर में भी उन्हें कोई हरा नहीं पाया।
सत्तर के दशक में थानाभवन के गांव भाटूखेड़ी से आए डॉ घसीटा सिंह विनोद ने चरथावल कसबे के बाजार कलां में अपना क्लीनिक खोला था। रोगियों के प्रति उनकी विनम्रता और सरलता ने उन्हें पहचान दी। चौधरी चरण सिंह के अनुयायी डॉ विनोद ने राष्ट्रीय लोकदल से राजनीति में दस्तक दी। वर्ष 1989 में उन्हें अपनी वफादारी का इनाम भी मिला। चौधरी अजित सिंह ने उनको चरथावल विधानसभा सीट से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़वाया।
उन्होंने कांग्रेस के सिटिंग एमएलए फूल सिंह सौदाई को शिकस्त दी। राम लहर में भी जनता ने उन्हें ही चुना। वर्ष 1991 में दूसरी बार वह भाजपा के शेर सिंह को पराजित कर विधायक बने। हालांकि बदले राजनीतिक माहौल में उन्होंने बाद में सपा का दामन थाम लिया।
वर्ष 2002 में सपा के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लडे़ डा विनोद को बसपा प्रत्याशी उमा किरण से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। रालोद के वरिष्ठ नेता चौधरी विजय त्यागी बताते है कि वह विनोदी स्वभाव के थे। हर किसी के दु:ख दर्द में शरीक होते थे। अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर ने बताया कि उनके संघर्षशील जीवन को कसबे के लोग भूला नहीं पाएंगे।
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थानाभवन के भाटूखेड़ी गांव के मूल निवासी 75 वर्षीय पूर्व विधायक डॉ जीएस विनोद लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र के ब्रह्मपुरी में उनका दिल का दौरा पड़ने से देहावसान हो गया। निधन की सूचना पर परिचितों और शुभचिंतकों का घर पर तांता लग गया। शुक्रवार दुपहर साढे़ बारह उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। नदी रोड स्थित शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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ज्येष्ठ पुत्र सुभाष ने मुखाग्नि दी। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाषचंद शर्मा, वेदपाल ठेकेदार आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. विनोद की पत्नी का तीन साल पहले निधन हो गया था। उनके तीन पुत्रों सुभाष, चंद्रशेखर और अशोक का भरापूरा परिवार है। पूर्व विधायक की अंत्येष्टि में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। आर्य समाज आनंदपुरी के पूर्व प्रधान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने डॉ विनोद के निधन पर दु:ख प्रकट किया है। आचार्य ने कहा कि आर्य समाज के समाज सुधार और वैदिक प्रचार कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता रहती थी।
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सियासी चमक में भी सादगी नहीं भूले डॉ विनोद
सियासत की चमक भी पूर्व विधायक डॉ. जीएस विनोद की सादगी और सरलता को फीका नहीं कर पाई। दो बार विधायक चुने जाने के बावजूद उन्होंने जीवन भर रोडवेज की बस में सफर किया। चौधरी चरण सिंह के जीवन से प्रेरित डॉ विनोद का क्षेत्र से गहरा लगाव था, जिस कारण राम लहर में भी उन्हें कोई हरा नहीं पाया।
सत्तर के दशक में थानाभवन के गांव भाटूखेड़ी से आए डॉ घसीटा सिंह विनोद ने चरथावल कसबे के बाजार कलां में अपना क्लीनिक खोला था। रोगियों के प्रति उनकी विनम्रता और सरलता ने उन्हें पहचान दी। चौधरी चरण सिंह के अनुयायी डॉ विनोद ने राष्ट्रीय लोकदल से राजनीति में दस्तक दी। वर्ष 1989 में उन्हें अपनी वफादारी का इनाम भी मिला। चौधरी अजित सिंह ने उनको चरथावल विधानसभा सीट से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़वाया।
उन्होंने कांग्रेस के सिटिंग एमएलए फूल सिंह सौदाई को शिकस्त दी। राम लहर में भी जनता ने उन्हें ही चुना। वर्ष 1991 में दूसरी बार वह भाजपा के शेर सिंह को पराजित कर विधायक बने। हालांकि बदले राजनीतिक माहौल में उन्होंने बाद में सपा का दामन थाम लिया।
वर्ष 2002 में सपा के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लडे़ डा विनोद को बसपा प्रत्याशी उमा किरण से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। रालोद के वरिष्ठ नेता चौधरी विजय त्यागी बताते है कि वह विनोदी स्वभाव के थे। हर किसी के दु:ख दर्द में शरीक होते थे। अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर ने बताया कि उनके संघर्षशील जीवन को कसबे के लोग भूला नहीं पाएंगे।