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आजाद होते ही उम्मीद के दीयों से रोशन हो गया था देश
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जय प्रकाश आजाद।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
आजाद होते ही उम्मीद के दीयों से रोशन हो गया था देश
मुजफ्फरनगर। हर गांव और हर दर से आजादी की लड़ाई लड़ी गई। आंदोलन में गांव दूधली के 87 वर्षीय जयप्रकाश आजाद के दो बड़े भाई जेल में रहे। आजाद कहते हैं कि 15 अगस्त 1947 की रात हर जगह आजादी का जश्न हुआ। आजादी की खुशी में हर घर पर दीये जलाए गए थे। लोगों के बीच बेहद उत्साह था, लोग खुशी से नाच रहे थे।
शहर के प्रेमपुरी में रहने वाले जयप्रकाश आजाद मूल रूप से दूधली के रहने वाले हैं। वह बताते हैं कि उनके बड़े भाई लक्ष्मीचंद और आत्माराम गुप्ता मुजफ्फरनगर के एसडी इंटर में पढ़ते थे। इसी दौरान दोनों स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। दोनों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। छात्र जीवन में ही आत्माराम पर टेलीफोन के तार काटने, रोहाना स्टेशन पर आग लगाने, रेलवे लाइन उखाड़ने का आरोप लगा। लक्ष्मीचंद को 18 महीने की कड़ी सजा हुई। आत्माराम को एक साल छह महीने की कैद और 20 रुपये जुर्माने की सजा हुई। उस समय पूरा परिवार दूधली में ही रहता था। गांव में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की योजनाएं बनती थीं। घर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का आना-जाना रहता था। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तो हर जगह जश्न हुआ।
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मुजफ्फरनगर। हर गांव और हर दर से आजादी की लड़ाई लड़ी गई। आंदोलन में गांव दूधली के 87 वर्षीय जयप्रकाश आजाद के दो बड़े भाई जेल में रहे। आजाद कहते हैं कि 15 अगस्त 1947 की रात हर जगह आजादी का जश्न हुआ। आजादी की खुशी में हर घर पर दीये जलाए गए थे। लोगों के बीच बेहद उत्साह था, लोग खुशी से नाच रहे थे।
शहर के प्रेमपुरी में रहने वाले जयप्रकाश आजाद मूल रूप से दूधली के रहने वाले हैं। वह बताते हैं कि उनके बड़े भाई लक्ष्मीचंद और आत्माराम गुप्ता मुजफ्फरनगर के एसडी इंटर में पढ़ते थे। इसी दौरान दोनों स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। दोनों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। छात्र जीवन में ही आत्माराम पर टेलीफोन के तार काटने, रोहाना स्टेशन पर आग लगाने, रेलवे लाइन उखाड़ने का आरोप लगा। लक्ष्मीचंद को 18 महीने की कड़ी सजा हुई। आत्माराम को एक साल छह महीने की कैद और 20 रुपये जुर्माने की सजा हुई। उस समय पूरा परिवार दूधली में ही रहता था। गांव में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की योजनाएं बनती थीं। घर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का आना-जाना रहता था। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तो हर जगह जश्न हुआ।
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