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परिजनों को नहीं मिल रहा कैदी का शव
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:12 AM IST
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बीमार कैदी की दिल्ली में उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में दो दिन बीत जाने के बाद भी परिजनों को उसका शव नहीं मिला है। परिजनों ने कारागार स्टाफ से मामले को लेकर विरोध प्रकट किया। जेलर ने अस्पताल से संबंधित थाने की पुलिस से संपर्क कर शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे परिजनों को सौंपने की गुहार लगाई है। शुक्रवार को परिजनों को शव मिलने की संभावना जताई जा रही है।
जिला कारागार में शामली के सजायाफ्ता बंदी वकील (75) पुत्र कमरू को टीबी की बीमारी हो गई थी। जेल के भीतर हालत में सुधार नहीं होने पर जेल चिकित्सक ने उसे 13 जून को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। सुधार नहीं होने पर वकील को पहले मेरठ और बाद में 14 जून को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया था। बुधवार सुबह दिल्ली के लालाराम टीबी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान करीब सवा छह बजे उसका निधन हो गया।
जेल अधिकारियों की सूचना पर मृतक के परिजन उसका शव लेने के लिए दिल्ली गए। दिल्ली में पोस्टमार्टम नहीं होने के चलते अस्पताल के अधिकारियों ने शव को देने से इंकार कर दिया। परिजनों ने मामले की जानकारी जेल अधिकारियों को दी। जेलर सतीश चंद त्रिपाठी ने संबंधित थाना पुलिस और दिल्ली प्रशासन के अधिकारियों से बात कर शव का पोस्टमार्टम जल्दी करानेे की गुहार लगाई। जेलर की गुहार पर अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को देने का आश्वासन दिया है।
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मीट नहीं ले जाने देने पर महिला का हंगामा
जिला कारागार के बाहर मिलाई के लिए आई महिला अंदर खाना ले जाने को लेकर चेकिंग कर रही सिपाही से भिड़ गई। बाद में महिला को बिना मीट के ही अंदर जाना पड़ा।
जेल के बाहर बृहस्पतिवार दोपहर एक महिला अपने पुत्र की मिलाई करने के लिए गेट पर पहुंची। महिला पुलिसकर्मी ने महिला के थैले को चेक किया तो उसमें मीट बना हुआ रखा था। पुलिसकर्मी ने महिला को मीट ले जाने से इंकार कर दिया।
इस बात पर महिला बिफर पड़ी और उसने वहीं पर हंगामा कर दिया। पुलिस पर आरोप लगाने लगी। महिला पुलिसकर्मी भी अड़ गई, उसने किसी भी कीमत पर मीट अंदर नहीं जाने देने की बात कह दी। बाद में महिला को बिना मीट के ही अंदर जाकर अपने पुत्र की मिलाई करनी पड़ी।
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जिला कारागार में शामली के सजायाफ्ता बंदी वकील (75) पुत्र कमरू को टीबी की बीमारी हो गई थी। जेल के भीतर हालत में सुधार नहीं होने पर जेल चिकित्सक ने उसे 13 जून को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। सुधार नहीं होने पर वकील को पहले मेरठ और बाद में 14 जून को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया था। बुधवार सुबह दिल्ली के लालाराम टीबी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान करीब सवा छह बजे उसका निधन हो गया।
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जेल अधिकारियों की सूचना पर मृतक के परिजन उसका शव लेने के लिए दिल्ली गए। दिल्ली में पोस्टमार्टम नहीं होने के चलते अस्पताल के अधिकारियों ने शव को देने से इंकार कर दिया। परिजनों ने मामले की जानकारी जेल अधिकारियों को दी। जेलर सतीश चंद त्रिपाठी ने संबंधित थाना पुलिस और दिल्ली प्रशासन के अधिकारियों से बात कर शव का पोस्टमार्टम जल्दी करानेे की गुहार लगाई। जेलर की गुहार पर अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को देने का आश्वासन दिया है।
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मीट नहीं ले जाने देने पर महिला का हंगामा
जिला कारागार के बाहर मिलाई के लिए आई महिला अंदर खाना ले जाने को लेकर चेकिंग कर रही सिपाही से भिड़ गई। बाद में महिला को बिना मीट के ही अंदर जाना पड़ा।
जेल के बाहर बृहस्पतिवार दोपहर एक महिला अपने पुत्र की मिलाई करने के लिए गेट पर पहुंची। महिला पुलिसकर्मी ने महिला के थैले को चेक किया तो उसमें मीट बना हुआ रखा था। पुलिसकर्मी ने महिला को मीट ले जाने से इंकार कर दिया।
इस बात पर महिला बिफर पड़ी और उसने वहीं पर हंगामा कर दिया। पुलिस पर आरोप लगाने लगी। महिला पुलिसकर्मी भी अड़ गई, उसने किसी भी कीमत पर मीट अंदर नहीं जाने देने की बात कह दी। बाद में महिला को बिना मीट के ही अंदर जाकर अपने पुत्र की मिलाई करनी पड़ी।