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Muzaffarnagar News: जांच के दायरे में सल्फर गलाने में छोड़ी गई गैस की मात्रा
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना मोड़ के समीप तेजाब बनाने वाली फैक्टरी में हुए विषैली गैस के रिसाव के चपेट में आकर कई लोग बीमार हो गए थे। हालत बिगड़ने पर चार महिलाओं और बच्चों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी पहुंचकर गहनता से जांच शुरू की। उनकी जांच का दायरा फैक्टरी में सल्फर गलाने में छोड़ी गई गैस की मात्रा के इर्दगिर्द रहा। फैक्टरी संचालकों की ओर से वातावरण में छोड़ी गैस की मात्रा का अध्ययन किया रहा है कि वह मानक से अधिक तो नहीं थी।
रविवार को गैस रिसाव की घटना सामने आने के बाद शाम में ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अवर अभियंता राजा गुप्ता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए फैक्टरी पहुंची थी। साथ में कारखाना विभाग के अधिकारियों ने भी दस्तावेजों की जांच की थी। सोमवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गीतेश चन्द्र विस्तृत जांच के लिए फैक्टरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्लांट 90 के दशक में लगाया गया था, लेकिन धीरे-धीरे उसके आसपास आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गईं। बताया कि वहां गंधक को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिसे गलाकर भट्टी में जलाते हैं, जिससे सल्फर डाई ऑक्साइड गैस निकलती है। यह ऑक्सीजन से रिएक्ट कर सल्फर ट्राई ऑक्साइड गैस बनाती है, जिसे वाष्प में मिलाया जाता है। कास्टिक सोडा से उसका विषैलापन कम किया जाता है। इस दौरान वह वातावरण में भी चली जाती है, लेकिन उसकी सीमा निर्धारित है। जांच का विषय यह है कि वह निर्धारित मात्रा से अधिक तो वातावरण में नहीं गई। देखा जा रहा है कि संसाधन, व्यवस्था में खामी के कारण तो यह घटना नहीं हुई। बताया कि फैक्टरी संचालकों की ओर से छोड़ी गई गैस की जो मात्रा उन्हें बताई गई है, उसकी यूनिट परिवर्तित कराई जा रही है। इसके उपरांत एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेन्द्र कुमार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना मोड़ के समीप तेजाब बनाने वाली फैक्टरी में हुए विषैली गैस के रिसाव के चपेट में आकर कई लोग बीमार हो गए थे। हालत बिगड़ने पर चार महिलाओं और बच्चों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी पहुंचकर गहनता से जांच शुरू की। उनकी जांच का दायरा फैक्टरी में सल्फर गलाने में छोड़ी गई गैस की मात्रा के इर्दगिर्द रहा। फैक्टरी संचालकों की ओर से वातावरण में छोड़ी गैस की मात्रा का अध्ययन किया रहा है कि वह मानक से अधिक तो नहीं थी।
रविवार को गैस रिसाव की घटना सामने आने के बाद शाम में ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अवर अभियंता राजा गुप्ता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए फैक्टरी पहुंची थी। साथ में कारखाना विभाग के अधिकारियों ने भी दस्तावेजों की जांच की थी। सोमवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गीतेश चन्द्र विस्तृत जांच के लिए फैक्टरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्लांट 90 के दशक में लगाया गया था, लेकिन धीरे-धीरे उसके आसपास आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गईं। बताया कि वहां गंधक को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिसे गलाकर भट्टी में जलाते हैं, जिससे सल्फर डाई ऑक्साइड गैस निकलती है। यह ऑक्सीजन से रिएक्ट कर सल्फर ट्राई ऑक्साइड गैस बनाती है, जिसे वाष्प में मिलाया जाता है। कास्टिक सोडा से उसका विषैलापन कम किया जाता है। इस दौरान वह वातावरण में भी चली जाती है, लेकिन उसकी सीमा निर्धारित है। जांच का विषय यह है कि वह निर्धारित मात्रा से अधिक तो वातावरण में नहीं गई। देखा जा रहा है कि संसाधन, व्यवस्था में खामी के कारण तो यह घटना नहीं हुई। बताया कि फैक्टरी संचालकों की ओर से छोड़ी गई गैस की जो मात्रा उन्हें बताई गई है, उसकी यूनिट परिवर्तित कराई जा रही है। इसके उपरांत एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेन्द्र कुमार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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