{"_id":"58ea83df4f1c1bd0355b587c","slug":"swami-achyutananda","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामाजिक परंपराएं विश्व का दर्पण: स्वामी अच्युतानंद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामाजिक परंपराएं विश्व का दर्पण: स्वामी अच्युतानंद
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 10 Apr 2017 12:26 AM IST
विज्ञापन
शंकराचार्य का स्वागत करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सत्संग भवन में संत तुलसीदास की प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर आए जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि रामचरित मानस विश्व की धरोहर है। सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, सभ्यता, पारिवारिक और सामाजिक परंपराएं विश्व का दर्पण है। महान संत तुलसीदास के जीवन के बारे में भी महाराज जी ने प्रकाश डाला।
सत्संग भवन में नवनिर्मित तुलसीदाल हॉल में संत तुलसीदास की प्रतिमा का लोकार्पण शारदा पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद जी महाराज के निर्देशन में संत ज्ञानानंद, महंत स्वामी केशवानंद सरस्वती, महंत गुरुदत्त, आचार्य वेदप्रकाश, ब्रजेश पाठक आदि ने गणेशवंदना और देवपूजन के साथ कराया।
मुख्य अतिथि शंकराचार्य अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि सनातन ग्रंथों के पठन-पाठन स्वाध्याय आदि से मनुष्य देवत्व की ओर अग्रसर होता है। इस बात को सारी दुनिया जानती है। भारतीय धर्म अध्यात्म को विश्व का गुरु बताया।
विज्ञापन
इससे पूर्व शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं ने जयघोष और मंगल ध्वनि प्रस्तुत की। साथ ही भजन-कीर्तन से श्रद्धालु भवविभोर हो गए। इस दौरान त्रिलोकचंद गुप्ता, श्यामलाल बंसल, महेंद्र कुमार, ताराचंद वर्मा, पंडित होतीलाल शर्मा, प्रमोद बंसल, राजकुमार चौहान, डॉ ब्रजपाल सिंह, सुभाष सैनी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सत्संग भवन में नवनिर्मित तुलसीदाल हॉल में संत तुलसीदास की प्रतिमा का लोकार्पण शारदा पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद जी महाराज के निर्देशन में संत ज्ञानानंद, महंत स्वामी केशवानंद सरस्वती, महंत गुरुदत्त, आचार्य वेदप्रकाश, ब्रजेश पाठक आदि ने गणेशवंदना और देवपूजन के साथ कराया।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि शंकराचार्य अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि सनातन ग्रंथों के पठन-पाठन स्वाध्याय आदि से मनुष्य देवत्व की ओर अग्रसर होता है। इस बात को सारी दुनिया जानती है। भारतीय धर्म अध्यात्म को विश्व का गुरु बताया।
विज्ञापन
इससे पूर्व शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं ने जयघोष और मंगल ध्वनि प्रस्तुत की। साथ ही भजन-कीर्तन से श्रद्धालु भवविभोर हो गए। इस दौरान त्रिलोकचंद गुप्ता, श्यामलाल बंसल, महेंद्र कुमार, ताराचंद वर्मा, पंडित होतीलाल शर्मा, प्रमोद बंसल, राजकुमार चौहान, डॉ ब्रजपाल सिंह, सुभाष सैनी आदि मौजूद रहे।