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एसएसपी साहब इंसाफ दिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2017 12:04 AM IST
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अक्षय से जानकारी लेते एसएसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर। दबंगों के कब्जे से मुक्त हुए अक्षय ने अपने साथ की गई बर्बरता की दास्तां सुनाई। एसएसपी दफ्तर पर मीडिया की मौजूदगी में मृतका महिमा के भाई अक्षय ने कहा कि उसका लखनऊ की घटना से कोई वास्ता नहीं है। एसएसपी आफिस पर पहुंचे अक्षय ने बताया कि ब्लू रिवोलेशन कंपनी की ओर से उन्हें जानकारी दी गई कि उनके पिता देव प्रकाश से लखनऊ से साढ़े चार लाख रुपये लूट लिए गए हैं।
पचेंडा निवासी युधिष्ठिर पहलवान उसे और मेरठ के जानी खुर्द निवासी अपने मामा ऋषिपाल को साथ लेकर लखनऊ गए। उसका दोस्त देहरादून निवासी अरुण गुर्जर भी साथ था, वहां से हमें झांसी ले जाया गया। कंपनी के पार्टनरों और दबंगों ने सुनियोजित योजना के तहत उत्पीड़न शुरू कर दिया। मछली के भुगतान की रकम तुम्ही ने हजम की है। मामा ऋषिपाल मेरे पिता और मुझे दो हजार रुपये देकर लौट आए। वहां से हमें फिर लखनऊ लाया गया। दबंगों ने कहा कि मंत्रीजी का एसएसपी लखनऊ मंजिल सैनी पर फोन आया है। हमें सप्रू मार्ग स्थित एसएसपी आवास पर लाया गया। हम बाहर ही रहे, एक घंटे बाद क्राइम
ब्रांच के सिपाहियों ने हमें गाड़ी में डाल लिया और मारपीट की। लखनऊ एसएसपी आवास के पास ही एक होटल में पूरी रात टॉर्चर किया गया।
सामने मौत देखकर मेरा दोस्त और मैं मौका पाकर उनकी चुंगल से निकल भागे। जैसे-तैसे आगरा होते हुए ट्रक चालकों से गुहार लगाकर बृहस्पतिवार रात मैं मुुजफ्फरनगर पहुंचा। घर जाकर पता चला कि बहन महिमा ने मेरी रिहाई न होने पर खुदकुशी कर ली। मछली के धंधे में एक संगठित गिरोह है। दबंगों के गुर्गे मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। मेरी बहन महिमा को न्याय मिलना चाहिए, आखिर उसका क्या कसूर था।
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पचेंडा निवासी युधिष्ठिर पहलवान उसे और मेरठ के जानी खुर्द निवासी अपने मामा ऋषिपाल को साथ लेकर लखनऊ गए। उसका दोस्त देहरादून निवासी अरुण गुर्जर भी साथ था, वहां से हमें झांसी ले जाया गया। कंपनी के पार्टनरों और दबंगों ने सुनियोजित योजना के तहत उत्पीड़न शुरू कर दिया। मछली के भुगतान की रकम तुम्ही ने हजम की है। मामा ऋषिपाल मेरे पिता और मुझे दो हजार रुपये देकर लौट आए। वहां से हमें फिर लखनऊ लाया गया। दबंगों ने कहा कि मंत्रीजी का एसएसपी लखनऊ मंजिल सैनी पर फोन आया है। हमें सप्रू मार्ग स्थित एसएसपी आवास पर लाया गया। हम बाहर ही रहे, एक घंटे बाद क्राइम
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ब्रांच के सिपाहियों ने हमें गाड़ी में डाल लिया और मारपीट की। लखनऊ एसएसपी आवास के पास ही एक होटल में पूरी रात टॉर्चर किया गया।
सामने मौत देखकर मेरा दोस्त और मैं मौका पाकर उनकी चुंगल से निकल भागे। जैसे-तैसे आगरा होते हुए ट्रक चालकों से गुहार लगाकर बृहस्पतिवार रात मैं मुुजफ्फरनगर पहुंचा। घर जाकर पता चला कि बहन महिमा ने मेरी रिहाई न होने पर खुदकुशी कर ली। मछली के धंधे में एक संगठित गिरोह है। दबंगों के गुर्गे मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। मेरी बहन महिमा को न्याय मिलना चाहिए, आखिर उसका क्या कसूर था।
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