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वीतराग संत की पुण्यतिथि पर जुटेंगे श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:21 AM IST
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शुक्रताल स्थित शुक तीर्थ।
- फोटो : अमर उजाला
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शुक तीर्थ के जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याण देव की बारहवीं पुण्यतिथि पर 14 जुलाई को भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में देश भर से संत के अनुयायी और श्रद्धालु जुटेंगे। महान संत की स्मृति में 340 दिव्यांगों को ट्राई साइकिल और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए जाएंगे।
युगदृष्टा, शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट ने कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। संत के परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि 14 जुलाई को प्रात: 7 बजे समाधि मंदिर में गुरुदेव का चरणाभिषेक होगा। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्री डोंगरे जी भागवत भवन में आयोजित स्मृति समारोह में संत विभूतियां, समाज सेवी, शिक्षाविद् और भागवत भक्त भाग लेंगे।
उधर, ब्रह्मलीन संत की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए महावीर शरण जी महाराज ने कहा कि स्वामी कल्याण देव ने अपने अथक परिश्रम से शुक तीर्थ का जीर्णोद्धार कर लोक सुलभ बनाया। भागवत की यह उद्गम भूमि आध्यात्मिक शांति और चेतना का केंद्र हैं। कथा व्यास ने कहा कि भागवत जीवन दायिनी है, जिसके श्रवणमात्र से मानव को जीवन जीने का ज्ञान प्राप्त होता हैं। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा का ही फल मिलता हैं। प्रभु कृपा के लिए सत्संग जरूरी है। मन, वचन और कर्म से सत्य के मार्ग पर चलें।
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युगदृष्टा, शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट ने कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। संत के परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि 14 जुलाई को प्रात: 7 बजे समाधि मंदिर में गुरुदेव का चरणाभिषेक होगा। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्री डोंगरे जी भागवत भवन में आयोजित स्मृति समारोह में संत विभूतियां, समाज सेवी, शिक्षाविद् और भागवत भक्त भाग लेंगे।
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उधर, ब्रह्मलीन संत की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए महावीर शरण जी महाराज ने कहा कि स्वामी कल्याण देव ने अपने अथक परिश्रम से शुक तीर्थ का जीर्णोद्धार कर लोक सुलभ बनाया। भागवत की यह उद्गम भूमि आध्यात्मिक शांति और चेतना का केंद्र हैं। कथा व्यास ने कहा कि भागवत जीवन दायिनी है, जिसके श्रवणमात्र से मानव को जीवन जीने का ज्ञान प्राप्त होता हैं। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा का ही फल मिलता हैं। प्रभु कृपा के लिए सत्संग जरूरी है। मन, वचन और कर्म से सत्य के मार्ग पर चलें।
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