{"_id":"62d1a9ce57828167553af714","slug":"sawan-s-clouds-are-not-raining-even-after-rumbling-muzaffarnagar-news-mrt597142911","type":"story","status":"publish","title_hn":"उमड़-घुमड़ कर भी नहीं बरस रहे सावन के बादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उमड़-घुमड़ कर भी नहीं बरस रहे सावन के बादल
विज्ञापन
आसमान में छाए बादल
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- 15 जुलाई तक सिर्फ दो मिमी बारिश, 10 साल में सबसे कम
- 2013 में 15 जुलाई तक हुई थी सिर्फ 12.3 मिमी बरसात इससे पहले
- 2018 में सबसे ज्यादा 439.4 मिमी बरसात का है रिकॉर्ड
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। बादलों की बेरुखी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। सावन के महीने में भी बादल आसमान में खूब उमड़-घुमड़ रहे हैं, लेकिन बरस नहीं रहे। 15 जुलाई तक की बात करें तो पिछले 10 साल में इस बार सबसे कम बरसात हुई है। अब से पहले 2013 में 15 जुलाई तक 12.3 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जबकि इस बार अभी तक सिर्फ दो मिलीमीटर बरसात हुई है। उमस भरे मौसम से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आसमान में तैरते बादल बारिश की उम्मीद जगाते हैं, लेकिन बिन बरसे ही गुजर जाते है। जुलाई आधी बीत चुकी है, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले में तिहाई भी बरसात नहीं हुई। पूरे महीने की बात करें तो 2018 में सबसे ज्यादा 439.4 मिमी बरसात रिकॉर्ड की गई थी। 2021 में 397.6 मिमी बरसात जिले में हुई थी। मगर, इस बार बादल ऐसे रूठे की लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई।
----------------------------
जुलाई में हर साल इस तरह हुई बरसात
साल जुलाई 15 जुलाई तक
2012 148.4 69.4
2013 143.1 12.3
2014 210.8 17
2015 224.6 188
2016 316.8 148.8
2017 99.2 46.4
2018 439.4 113
2019 306 105.2
2020 324.8 184
2021 397.6 113
2022 ---- 2.0
पिछले साल बारिश ने बनाया था रिकॉर्ड
इस बार बारिश नहीं हो रही है जबकि पिछले साल 29 जुलाई को एक ही दिन में सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। 151.4 मिमी बारिश हुई थी।
गन्ने पर फफूंदीजनक बीमारियों का खतरा : कटियार
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के प्रभारी डॉ. अनिल कटियार का कहना है कि बारिश नहीं होने से गन्ने की फसल पर फफूंदीजनक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बघरा, रोहाना, बड़कली सहित अन्य गांव के खेतों के सर्वे में यह बात सामने आई है। किसानों को बार-बार फसल पर स्प्रे कराना पड़ रहा है, जिस कारण लागत भी बढ़ रही है। गन्ने की बढ़वार भी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी।
शाम के समय करें बासमती की रोपाई
बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपाई पिछड़ने लगी है। किसानों के लिए सबसे बेहतर यह है कि वह शाम के समय धान की रोपाई कर तुरंत ही सिंचाई कर दें। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह करें।
विज्ञापन
बारिश के इंतजार में सूखने लगा ढेंचा : वीरेश
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध संस्थान के निदेशक वीरेश सिंह कहते हैं कि बारिश नहीं होने के कारण ढेंचा की फसल सूख गई है। अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही है। जरूरत से कम बारिश हुई है।
पशुओं को पिलाते रहे पानी, गर्मी से बचाएं
बारिश नहीं होने के कारण पशुओं में बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है। पशुपालक अपने पशु को नियमित रूप से पानी पिलाएं और धूप से बचाकर रखें।
सांस और उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ गए
गर्मी के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी में सांस और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े हैं। गर्मी से बचाव करना चाहिए।
इस तरह ऊपर चढ़ रहा तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
14 जुलाई 37.0 24.8
13 जुलाई 35.2 24.7
12 जुलाई 32.6 24.1
विज्ञापन
- 2013 में 15 जुलाई तक हुई थी सिर्फ 12.3 मिमी बरसात इससे पहले
- 2018 में सबसे ज्यादा 439.4 मिमी बरसात का है रिकॉर्ड
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। बादलों की बेरुखी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। सावन के महीने में भी बादल आसमान में खूब उमड़-घुमड़ रहे हैं, लेकिन बरस नहीं रहे। 15 जुलाई तक की बात करें तो पिछले 10 साल में इस बार सबसे कम बरसात हुई है। अब से पहले 2013 में 15 जुलाई तक 12.3 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जबकि इस बार अभी तक सिर्फ दो मिलीमीटर बरसात हुई है। उमस भरे मौसम से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आसमान में तैरते बादल बारिश की उम्मीद जगाते हैं, लेकिन बिन बरसे ही गुजर जाते है। जुलाई आधी बीत चुकी है, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले में तिहाई भी बरसात नहीं हुई। पूरे महीने की बात करें तो 2018 में सबसे ज्यादा 439.4 मिमी बरसात रिकॉर्ड की गई थी। 2021 में 397.6 मिमी बरसात जिले में हुई थी। मगर, इस बार बादल ऐसे रूठे की लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई।
----------------------------
जुलाई में हर साल इस तरह हुई बरसात
साल जुलाई 15 जुलाई तक
2012 148.4 69.4
2013 143.1 12.3
2014 210.8 17
2015 224.6 188
2016 316.8 148.8
2017 99.2 46.4
2018 439.4 113
2019 306 105.2
2020 324.8 184
2021 397.6 113
2022 ---- 2.0
पिछले साल बारिश ने बनाया था रिकॉर्ड
इस बार बारिश नहीं हो रही है जबकि पिछले साल 29 जुलाई को एक ही दिन में सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। 151.4 मिमी बारिश हुई थी।
गन्ने पर फफूंदीजनक बीमारियों का खतरा : कटियार
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के प्रभारी डॉ. अनिल कटियार का कहना है कि बारिश नहीं होने से गन्ने की फसल पर फफूंदीजनक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बघरा, रोहाना, बड़कली सहित अन्य गांव के खेतों के सर्वे में यह बात सामने आई है। किसानों को बार-बार फसल पर स्प्रे कराना पड़ रहा है, जिस कारण लागत भी बढ़ रही है। गन्ने की बढ़वार भी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी।
विज्ञापन
शाम के समय करें बासमती की रोपाई
बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपाई पिछड़ने लगी है। किसानों के लिए सबसे बेहतर यह है कि वह शाम के समय धान की रोपाई कर तुरंत ही सिंचाई कर दें। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह करें।
विज्ञापन
बारिश के इंतजार में सूखने लगा ढेंचा : वीरेश
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध संस्थान के निदेशक वीरेश सिंह कहते हैं कि बारिश नहीं होने के कारण ढेंचा की फसल सूख गई है। अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही है। जरूरत से कम बारिश हुई है।
पशुओं को पिलाते रहे पानी, गर्मी से बचाएं
बारिश नहीं होने के कारण पशुओं में बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है। पशुपालक अपने पशु को नियमित रूप से पानी पिलाएं और धूप से बचाकर रखें।
सांस और उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ गए
गर्मी के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी में सांस और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े हैं। गर्मी से बचाव करना चाहिए।
इस तरह ऊपर चढ़ रहा तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
14 जुलाई 37.0 24.8
13 जुलाई 35.2 24.7
12 जुलाई 32.6 24.1