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मेडिकल स्टूडेंटस के लिए देह दानकर अमर हो गई राजकली
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मुजफ्फरनगर मेडिकल कालेज को देह दान करने वाली राजकली का फाइल फोटो
- फोटो : KHATAULI
मेडिकल स्टूडेंटस के लिए देह दानकर अमर हो गई राजकली
मुजफ्फरनगर, मंसूरपुर। संसार में कुछ लोग अपना पूरा जीवन मानव व समाज सेवा को समर्पित कर देते हैं। साथ ही मरने के बाद भी ऐसी मिसाल कायम कर जाते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को मानव सेवा की प्रेरणा मिलती रहे। ऐसा ही उदाहरण राजकली ने मेडिकल स्टूडेंट के लिए मरने के बाद अपना शरीर दान कर किया है। अब मेडिकल स्टूडेंट्स राजकली के शरीर पर शोध कार्य करेंगे।
अवध विहार मुजफ्फरनगर निवासी महिपाल ने बताया कि उनका परिवार डेरा सच्चा सौदा सिरसा हरियाणा से जुड़ा हुआ है। उनकी मां राजकली इंसा भी लगातार सत्संग में जाती रहती थी। मां राजकली ने संत गुरमीत राम रहीम की प्रेरणा से फार्म भरकर घोषणा कर दी थी, कि मरने के बाद उसके शरीर को मेडिकल स्टूडेंटस को शोध करने के लिए दान कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि राजकली की उम्र 80 वर्ष थी। बुधवार को उनकी मृत्यु हो जाने पर उनकी इच्छा के अनुसार मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को सूचित किया गया।
बृहस्पतिवार की सुबह मेडिकल की एंबुलेंस को फूलों से सजा कर मुजफ्फरनगर से मेडिकल तक उनकी शव यात्रा निकाली गई। शव यात्रा में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी नारे लगा रहे थे कि जब तक सूरज चांद रहेगा, राजकली तेरा नाम रहेगा। महिपाल ने बताया कि उसने, उसकी पत्नी तथा दोनों बेटों ने भी मरने के बाद देह दान की घोषणा कर रखी है। शव यात्रा में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी डॉ. विनोद, रघुनाथ इंसा, विजय कुमार इंसा, बंटी इंसा, धर्मपाल इंसा, किशोरीलाल इंसा, सुरेश इंसा, सोनू इंसा, आदेश इंसा, जोगिंदर इंसा आदि शामिल रहे।
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मुजफ्फरनगर, मंसूरपुर। संसार में कुछ लोग अपना पूरा जीवन मानव व समाज सेवा को समर्पित कर देते हैं। साथ ही मरने के बाद भी ऐसी मिसाल कायम कर जाते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को मानव सेवा की प्रेरणा मिलती रहे। ऐसा ही उदाहरण राजकली ने मेडिकल स्टूडेंट के लिए मरने के बाद अपना शरीर दान कर किया है। अब मेडिकल स्टूडेंट्स राजकली के शरीर पर शोध कार्य करेंगे।
अवध विहार मुजफ्फरनगर निवासी महिपाल ने बताया कि उनका परिवार डेरा सच्चा सौदा सिरसा हरियाणा से जुड़ा हुआ है। उनकी मां राजकली इंसा भी लगातार सत्संग में जाती रहती थी। मां राजकली ने संत गुरमीत राम रहीम की प्रेरणा से फार्म भरकर घोषणा कर दी थी, कि मरने के बाद उसके शरीर को मेडिकल स्टूडेंटस को शोध करने के लिए दान कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि राजकली की उम्र 80 वर्ष थी। बुधवार को उनकी मृत्यु हो जाने पर उनकी इच्छा के अनुसार मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को सूचित किया गया।
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बृहस्पतिवार की सुबह मेडिकल की एंबुलेंस को फूलों से सजा कर मुजफ्फरनगर से मेडिकल तक उनकी शव यात्रा निकाली गई। शव यात्रा में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी नारे लगा रहे थे कि जब तक सूरज चांद रहेगा, राजकली तेरा नाम रहेगा। महिपाल ने बताया कि उसने, उसकी पत्नी तथा दोनों बेटों ने भी मरने के बाद देह दान की घोषणा कर रखी है। शव यात्रा में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी डॉ. विनोद, रघुनाथ इंसा, विजय कुमार इंसा, बंटी इंसा, धर्मपाल इंसा, किशोरीलाल इंसा, सुरेश इंसा, सोनू इंसा, आदेश इंसा, जोगिंदर इंसा आदि शामिल रहे।
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