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खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे अभ्यर्थी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:43 AM IST
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सेना भर्ती।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में चल रही सेना की भर्ती युवाओं पर भारी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से युवाओं के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। नतीजतन नौजवानों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ रही है। भर्ती स्थल के आसपास मकानों के बाहर और सड़कों पर अभ्यर्थी ठंड में किसी तरह रात काट रहे हैं।
सेना में युवाओं को मौका देने के लिए बुधवार से शहर के स्पोट्र्स स्टेडियम में भर्ती शुरू हुई। इसके लिए मंगलवार दोपहर से ही मेरठ की सरधना तहसील के युवाओं का आना शुरू हो गया। एक पखवाड़े से भर्ती की तैयारियों में जुटे प्रशासन के इंतजामों की पोल पहले ही दिन खुल गई। प्रशासन द्वारा भर्ती के लिए आने वाले युवाओं के ठहरने, लेटने आदि की कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से युवा दिनभर और रात में ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारते नजर आए।
युवकों ने पूरी रात स्टेडियम के आसपास स्थित कालोनियों की गलियों और सड़कों पर लेटकर किसी तरह रात बिताई। तड़के दो बजे उन्हें भर्ती स्थल पर प्रवेश के लिए समय दिया गया था। सुबह दिशा शौच आदि के लिए कोई इतंजाम तक नहीं थे। नहाने और पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई है। पुलिस स्टेडियम के आसपास खाने-पीने के सामान वालों को खड़ा नहीं होने दे रही है, इसके चलते अभ्यर्थियों को भूखा रहने पर मजबूर होना पड़ रहा।
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सेना में युवाओं को मौका देने के लिए बुधवार से शहर के स्पोट्र्स स्टेडियम में भर्ती शुरू हुई। इसके लिए मंगलवार दोपहर से ही मेरठ की सरधना तहसील के युवाओं का आना शुरू हो गया। एक पखवाड़े से भर्ती की तैयारियों में जुटे प्रशासन के इंतजामों की पोल पहले ही दिन खुल गई। प्रशासन द्वारा भर्ती के लिए आने वाले युवाओं के ठहरने, लेटने आदि की कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से युवा दिनभर और रात में ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारते नजर आए।
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युवकों ने पूरी रात स्टेडियम के आसपास स्थित कालोनियों की गलियों और सड़कों पर लेटकर किसी तरह रात बिताई। तड़के दो बजे उन्हें भर्ती स्थल पर प्रवेश के लिए समय दिया गया था। सुबह दिशा शौच आदि के लिए कोई इतंजाम तक नहीं थे। नहाने और पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई है। पुलिस स्टेडियम के आसपास खाने-पीने के सामान वालों को खड़ा नहीं होने दे रही है, इसके चलते अभ्यर्थियों को भूखा रहने पर मजबूर होना पड़ रहा।
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