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घर पर अकेली है बूढ़ी मां, पशु भी भूखे हैं
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घर पर अकेली है बूढ़ी मां, पशु भी भूखे हैं
मुजफ्फरनगर। कोरोना पॉजिटिव मिल रहे लोगों के सामने इस बीमारी से लड़ने के साथ ही अन्य कई चुनौतियां भी खड़ी हैं। परिवार के बड़े बुजुर्गों की देखभाल के साथ ही खूंटे से बंधे पशुओं की चिंता उन्हें सता रही है। क्वारंटीन सेंटरों का हाल भी ठीक नहीं है। सब एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। पीने के लिए गर्म पानी और काढ़ा आदि भी नहीं मिल पाता।
मंगलवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए अलमासपुर निवासी परिवार के एक सदस्य ने अपना दर्द बयां किया। उसने फोन पर बताया कि कुछ दिन पूर्व छोटा भाई एक दिन के लिए घर आया था। वह शामली में पॉजिटिव पाया गया। बाद में उसकी पत्नी और अब हम चार लोग संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें परिवार के दस सदस्यों के साथ पांच दिन से दिल्ली पब्लिक स्कूल में क्वारंटीन किया गया है। सब लोग एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में तो जो लोग ठीक होंगे, वे भी संक्रमित हो जाएंगे। घर पर बूढ़ी मां अकेली है। उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। एक गाय भी खूंटे से बंधी है। उनके संक्रमित मिलने के बाद तो पड़ोसी और रिश्तेदारों में से कोई उनकी देखभाल करने नहीं जाएगा। उसने गुहार लगाई कि कम से कम उन्हीं लोगों को घर भेज दिया जाए, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। वे जाकर बूढ़ी मां की देखभाल कर सकेंगे और गाय को भी चारा-पानी मिल जाएगा। उन्हें संक्रमित मिलने से ज्यादा चिंता अपने घर की है। उनका कहना है कि बेहतर तो यह होता कि उन्हें घर में ही क्वारंटीन कर दिया जाता। क्वारंटीन सेंटर में तो पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
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मुजफ्फरनगर। कोरोना पॉजिटिव मिल रहे लोगों के सामने इस बीमारी से लड़ने के साथ ही अन्य कई चुनौतियां भी खड़ी हैं। परिवार के बड़े बुजुर्गों की देखभाल के साथ ही खूंटे से बंधे पशुओं की चिंता उन्हें सता रही है। क्वारंटीन सेंटरों का हाल भी ठीक नहीं है। सब एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। पीने के लिए गर्म पानी और काढ़ा आदि भी नहीं मिल पाता।
मंगलवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए अलमासपुर निवासी परिवार के एक सदस्य ने अपना दर्द बयां किया। उसने फोन पर बताया कि कुछ दिन पूर्व छोटा भाई एक दिन के लिए घर आया था। वह शामली में पॉजिटिव पाया गया। बाद में उसकी पत्नी और अब हम चार लोग संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें परिवार के दस सदस्यों के साथ पांच दिन से दिल्ली पब्लिक स्कूल में क्वारंटीन किया गया है। सब लोग एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में तो जो लोग ठीक होंगे, वे भी संक्रमित हो जाएंगे। घर पर बूढ़ी मां अकेली है। उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। एक गाय भी खूंटे से बंधी है। उनके संक्रमित मिलने के बाद तो पड़ोसी और रिश्तेदारों में से कोई उनकी देखभाल करने नहीं जाएगा। उसने गुहार लगाई कि कम से कम उन्हीं लोगों को घर भेज दिया जाए, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। वे जाकर बूढ़ी मां की देखभाल कर सकेंगे और गाय को भी चारा-पानी मिल जाएगा। उन्हें संक्रमित मिलने से ज्यादा चिंता अपने घर की है। उनका कहना है कि बेहतर तो यह होता कि उन्हें घर में ही क्वारंटीन कर दिया जाता। क्वारंटीन सेंटर में तो पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
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