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एनजीटी के नियमों में फंसी रोडवेज की नई बसें
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 12 Dec 2016 11:54 PM IST
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एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर गंभीर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मयाद पूरी कर चुके वाहनों के संचालन पर रोक लगाई है। साथ ही परिवहन विभाग उन वाहनों के पंजीकरण को मंजूरी देंगे, जो यूरो-4 इंजन हैं। ऐसे में डिपो की नई बसें एनजीटी के निमयों में फंस गई है। शासन से मिली बसों का सहारनपुर मंडल में पंजीकरण न होने से पंजीकरण के लिए हरदोई भेजा गया है।
मुजफ्फरनगर डिपो के बेडे़ की करीब एक दर्जन बसें खस्ताहालत हो गई हैं। जो 8 लाख से अधिक किलोमीटर चल चुकी है। इन बसों को लंबी दूरी पर भेजने में विभाग परहेज कर रहा है। जिसके चलते विभाग ने उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम को चिट्ठी लिखकर नई बसें दिए जाने का आग्रह किया था।
जांच के बाद शासन स्तर से डिपो को नई बसें मिलने के आदेश जारी हुए। परिवहन मुख्यालय ने डिपो को नौ बसें दीं। इनमें तीन बसें मिली, बाकी कानपुर से बृहस्पतिवार तक आएंगी। तीनों बसें मुजफ्फरनगर पहुंच गई, मगर पंजीकरण में मात खा गई। बसों का सहारनपुर मंडल में पंजीकरण नहीं हो सका। पंजीकरण में एनजीटी के नियम आड़े आ गए।
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दरअसल, एनजीटी ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए यूरो-4 इंजन से नीचे पंजीकरण होने पर रोक लगा रखी है। ऐसे में शासन से आई बसें यूरो-4 इंजन की नहीं है। हालांकि यह एनसीआर में 10 साल के लिए चलाई जरूर जा सकती हैं। पंजीकरण न होने से बसें खड़ी हो गई। इसकी जानकारी शासन को दी गई। शासन ने इन बसों का पंजीकरण दूसरे जनपद से कराने के लिए आदेश दिए। शासनादेश के बाद बसों को पंजीकरण कराने के लिए हरदोई भेजा गया है।
यहां पर मंगलवार को पहले राउंड में तीन बसों तथा बृहस्पतिवार को कानपुर से आने वाली छह बसों का पंजीकरण होगा। इसके लिए डिपो से चालक-परिचालक हरदोई भेजे गए हैं। यूरो-4 वाले इंजन में चलने वाले पेट्रोल या डीजल में सल्फर की मात्रा कम होती है। इससे हवा शुद्ध होने के कारण पेट्रोल की मात्रा कम हो जाएगी। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि डिपो को नई बस मिली हैं, लेकिन एनजीटी के आदेश के बाद यूरो-4 से कम इंजन वाले वाहनों का पंजीकरण न होने पर उन्हें पंजीकरण के लिए हरदोई भेजा गया है।
बस की मयाद पूरी, नीलाम की
डिपो में एक बस की मयाद पूरी होने पर रोडवेज विभाग ने उसकी नीलामी कर दी। यूपी-12 टी-2702 को नीलाम किया गया है। यह बस 10 लाख किमी तक चल चुकी थी। इसके अलावा भी कई बसें जो साढ़े आठ लाख से अधिक किमी चल चुकी है। इन्हें लोकल रूट पर उतारा जाएगा।
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मुजफ्फरनगर डिपो के बेडे़ की करीब एक दर्जन बसें खस्ताहालत हो गई हैं। जो 8 लाख से अधिक किलोमीटर चल चुकी है। इन बसों को लंबी दूरी पर भेजने में विभाग परहेज कर रहा है। जिसके चलते विभाग ने उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम को चिट्ठी लिखकर नई बसें दिए जाने का आग्रह किया था।
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जांच के बाद शासन स्तर से डिपो को नई बसें मिलने के आदेश जारी हुए। परिवहन मुख्यालय ने डिपो को नौ बसें दीं। इनमें तीन बसें मिली, बाकी कानपुर से बृहस्पतिवार तक आएंगी। तीनों बसें मुजफ्फरनगर पहुंच गई, मगर पंजीकरण में मात खा गई। बसों का सहारनपुर मंडल में पंजीकरण नहीं हो सका। पंजीकरण में एनजीटी के नियम आड़े आ गए।
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दरअसल, एनजीटी ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए यूरो-4 इंजन से नीचे पंजीकरण होने पर रोक लगा रखी है। ऐसे में शासन से आई बसें यूरो-4 इंजन की नहीं है। हालांकि यह एनसीआर में 10 साल के लिए चलाई जरूर जा सकती हैं। पंजीकरण न होने से बसें खड़ी हो गई। इसकी जानकारी शासन को दी गई। शासन ने इन बसों का पंजीकरण दूसरे जनपद से कराने के लिए आदेश दिए। शासनादेश के बाद बसों को पंजीकरण कराने के लिए हरदोई भेजा गया है।
यहां पर मंगलवार को पहले राउंड में तीन बसों तथा बृहस्पतिवार को कानपुर से आने वाली छह बसों का पंजीकरण होगा। इसके लिए डिपो से चालक-परिचालक हरदोई भेजे गए हैं। यूरो-4 वाले इंजन में चलने वाले पेट्रोल या डीजल में सल्फर की मात्रा कम होती है। इससे हवा शुद्ध होने के कारण पेट्रोल की मात्रा कम हो जाएगी। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि डिपो को नई बस मिली हैं, लेकिन एनजीटी के आदेश के बाद यूरो-4 से कम इंजन वाले वाहनों का पंजीकरण न होने पर उन्हें पंजीकरण के लिए हरदोई भेजा गया है।
बस की मयाद पूरी, नीलाम की
डिपो में एक बस की मयाद पूरी होने पर रोडवेज विभाग ने उसकी नीलामी कर दी। यूपी-12 टी-2702 को नीलाम किया गया है। यह बस 10 लाख किमी तक चल चुकी थी। इसके अलावा भी कई बसें जो साढ़े आठ लाख से अधिक किमी चल चुकी है। इन्हें लोकल रूट पर उतारा जाएगा।