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हिंदी के प्रतिमान को स्थापित कर गई डॉ पवन जैन की लेखनी

Wed, 26 Aug 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2020 12:03 AM IST
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Muzaffarnagar: Scholar of Hindi Dr. Pawan Kumar Jain
साहित्यकार डॉ पवन कुमार जैन। (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर/खतौली। हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य निधि के लेखक की सूची का जिक्र हो और सूची में खतौली के हिंदी के विद्वान डॉ. पवन कुमार जैन का नाम न हो तो उस सूची को अपूर्ण ही माना जाएगा। हिंदी क्षेत्र में उनकी शख्सियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी एक पुस्तक ‘विदेशों में हिंदी पत्रकारिता’ का विमोचन करने पूर्व प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन विपक्ष नेता सदन अटलबिहारी वाजपेयी खतौली आए थे। विमोचन समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डा. रघुवीर शरण मित्र ने की थी। समारोह में शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव ने आशीर्वाद दिया था। उनकी एक पुस्तक का विमोचन दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने किया था।
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श्री कुंद कुंद जैन पीजी कॉलेज खतौली में हिंदी विभागाध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. पवन कुमार जैन द्वारा लिखित हिंदी साहित्य पुस्तकों के तौर पर आज भी हिंदी जगत में उनकी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है। उन्होंने अपने जीवन काल में 10 पुस्तकों का लेखन किया। सभी पुस्तकों ने हिंदी जगत में खासी ख्याति प्राप्त की। डॉ. पवन कुमार जैन के सानिध्य में 19 लोगों ने पीएचडी की, जो आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देकर हिंदी जगत को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। डॉ. पवन कुमार जैन का जन्म उत्तराखंड के रुड़की में 26 जनवरी 1938 को हुआ था। उन्होंने एमए, एलएलबी, पीएचडी, डी लिट्, संपादन कला विशारद की उच्च शिक्षा प्राप्त की। डॉ. जैन मेरठ विश्वविद्यालय में शोध निर्देशक रहे। एक दर्जन से ज्यादा शोध लेखन किए तथा 200 से ज्यादा पुस्तकों की समीक्षा की। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों में विदेशों में हिंदी पत्रकारिता, महावीर वाणी के आलोक में हिंदी का संत काव्य, मुखौटा, सुजानबाई, लवगी उपन्यास, पर्यावरण, रितिकालीन काव्य विधाओं का शास्त्रीय अध्ययन, जैनेंद कुमार और उसका त्यागपत्र, नरेश मेहता संशय की एक रात, अमृत मिल गया उपन्यास संत्रस्थ आदि शामिल है।
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