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शौचालय के लिए अब नहीं कोई शंका
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इंट्रो : शहर के बाजारों में आने वाले नागरिकों की शौचालय और लघुशंका जाने की शंका जल्द दूर होगी। नगर पालिका शहर में दस-दस सीट के करीब दस शौचालय और चार-चार सीट के करीब 16 लघुशंकालय का निर्माण कराएगी। इसके लिए लगभग डेढ़ साल से बजट पड़ा हुआ है। अमर उजाला ने 18 नवंबर के अंक में शहरवासियों की इस समस्या को अभियान के तहत प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर नगर पालिका ने कार्ययोजना तैयार कर ली है और जल्द ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे।
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। नगर के कई प्रमुख बाजारों, मुख्य मार्गों और चौराहों पर शौचालय और लघुशंकालय नहीं हैं। इसके चलते नागरिकों और दुकानदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। शहर के बीच में बनी सदर बाजार मार्केट में हॉस्पिटल और रेडीमेड कपड़े का बड़ा काम है। यहां बड़ी संख्या में बाहर से लोग आते हैं। पूरे सदर बाजार में शौचालय तो छोड़िए लघुशंका के लिए भी कोई स्थान नहीं है।
मालवीय चौक के आसपास दूर तक भी शौचालय या लघुशंकालय नहीं हैं। सदर बाजार, बिंदल मार्केट, एसडी मार्केट में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बाजार आने वाले ग्राहक और दुकानदारों को जरूरत पड़ जाए तो उन्हें दीवार का सहारा लेना पड़ता है। पुरुष तो जैसे-तैसे कहीं निवृत्त हो जाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए बड़ी मुसीबत होती है। अमर उजाला ने नागरिकों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। नगर पालिका ने इस खबर का संज्ञान लेते हुए शहर में शौचालय और लघुशंकालय बनवाने का प्रस्ताव तैयार किया है। करीब डेढ़ साल से पालिका के पास निर्माण के बजट है। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि शौचालय और लघुशंकालय के लिए बजट उपलब्ध है। कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही टेंडर जारी कर निर्माण कराया जाएगा।
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दस शौचालय और 16 लघुशंकालय बनेंगे
ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि नगर पालिका के पास सौ सीट शौचालय निर्माण का बजट उपलब्ध है। इसमें दस-दस सीट के दस शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त 64 सीट के यूरीनल बनाए जा सकते हैं। इसमें चार-चार सीट के 16 यूरीनल बनवाने के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यकता के हिसाब से जगह चिह्नित कर निर्माण कराया जाएगा।
एक सीट के निर्माण पर आता है 98 हजार खर्च
शासनादेश के अनुसार शौचालय की एक सीट के निर्माण पर 98 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें 78400 रुपये केंद्र व राज्य सरकार देती है। इसके अतिरिक्त लघुशंकालय की एक सीट के निर्माण पर 32 हजार रुपये खर्च आता है। इसमें से 21334 रुपये केंद्र और प्रदेश सरकार देगी जबकि बाकी खर्च नगर निकाय को उठाना होगा। ईओ ने बताया कि नगर पालिका के पास उपलब्ध धनराशि के आधार पर निर्माण कराया जाएगा।
मालवीय चौक बाजार के आसपास बड़ी समस्या
- स्थानीय दुकानदारों ने आसपास निर्माण कराने की मांग की
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका कार्यालय के बाहर सार्वजनिक शौचालय बना है। इसके बाद बालाजी चौक, सेंट जोंस स्कूल होते हुए मालवीय चौक तक अति व्यस्त क्षेत्र है। इससे आगे सिविल लाइंस थाना होते हुए भोपा पुल पार तक दुकानों, सब्जी और फल वालों के ठेलों और फड़ों की भरमार रहती है। बालाजी चौक से स्टेशन रोड पर भी रेलवे स्टेशन तक दोनों ओर दुकानें ही दुकानें हैं। अंसारी रोड शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में एक है। करीब डेढ़ किलोमीटर का यह क्षेत्र भरा पूरा बाजार है। इसके बावजूद यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय अथवा लघुशंकालय नहीं है।
स्थानीय दुकानदार देवेंद्र राणा कहते हैं कि पहले लघुशंका के लिए सोल्जर बोर्ड में चले जाते थे, लेकिन अब वहां गेट बंद कर दिया जाता है। दूर तक भी कोई शौचालय नहीं है। दुकानदार दर्शनलाल बताते हैं कि आसपास के दुकानदारों के यह बड़ी समस्या है। नाले के पास ठेले और फड़ लगी हैं। दुकानदार अमित गर्ग का कहना है कि सोल्जर बोर्ड के बाहर अथवा भीतर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण हो सकता है। इससे आसपास के सभी दुकानदारों की समस्या का समाधान हो जाएगा। दुकानदार मोहम्मद जीशान का कहना है कि पहले कॉलेज में बने शौचालय का इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब कॉलेज प्रबंधन ने भी उसे तुड़वा दिया है। उन्होंने मालवीय चौक के पास शौचालय और लघुशंकालय निर्माण की मांग की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। नगर के कई प्रमुख बाजारों, मुख्य मार्गों और चौराहों पर शौचालय और लघुशंकालय नहीं हैं। इसके चलते नागरिकों और दुकानदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। शहर के बीच में बनी सदर बाजार मार्केट में हॉस्पिटल और रेडीमेड कपड़े का बड़ा काम है। यहां बड़ी संख्या में बाहर से लोग आते हैं। पूरे सदर बाजार में शौचालय तो छोड़िए लघुशंका के लिए भी कोई स्थान नहीं है।
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मालवीय चौक के आसपास दूर तक भी शौचालय या लघुशंकालय नहीं हैं। सदर बाजार, बिंदल मार्केट, एसडी मार्केट में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बाजार आने वाले ग्राहक और दुकानदारों को जरूरत पड़ जाए तो उन्हें दीवार का सहारा लेना पड़ता है। पुरुष तो जैसे-तैसे कहीं निवृत्त हो जाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए बड़ी मुसीबत होती है। अमर उजाला ने नागरिकों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। नगर पालिका ने इस खबर का संज्ञान लेते हुए शहर में शौचालय और लघुशंकालय बनवाने का प्रस्ताव तैयार किया है। करीब डेढ़ साल से पालिका के पास निर्माण के बजट है। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि शौचालय और लघुशंकालय के लिए बजट उपलब्ध है। कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही टेंडर जारी कर निर्माण कराया जाएगा।
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दस शौचालय और 16 लघुशंकालय बनेंगे
ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि नगर पालिका के पास सौ सीट शौचालय निर्माण का बजट उपलब्ध है। इसमें दस-दस सीट के दस शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त 64 सीट के यूरीनल बनाए जा सकते हैं। इसमें चार-चार सीट के 16 यूरीनल बनवाने के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यकता के हिसाब से जगह चिह्नित कर निर्माण कराया जाएगा।
एक सीट के निर्माण पर आता है 98 हजार खर्च
शासनादेश के अनुसार शौचालय की एक सीट के निर्माण पर 98 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें 78400 रुपये केंद्र व राज्य सरकार देती है। इसके अतिरिक्त लघुशंकालय की एक सीट के निर्माण पर 32 हजार रुपये खर्च आता है। इसमें से 21334 रुपये केंद्र और प्रदेश सरकार देगी जबकि बाकी खर्च नगर निकाय को उठाना होगा। ईओ ने बताया कि नगर पालिका के पास उपलब्ध धनराशि के आधार पर निर्माण कराया जाएगा।
मालवीय चौक बाजार के आसपास बड़ी समस्या
- स्थानीय दुकानदारों ने आसपास निर्माण कराने की मांग की
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका कार्यालय के बाहर सार्वजनिक शौचालय बना है। इसके बाद बालाजी चौक, सेंट जोंस स्कूल होते हुए मालवीय चौक तक अति व्यस्त क्षेत्र है। इससे आगे सिविल लाइंस थाना होते हुए भोपा पुल पार तक दुकानों, सब्जी और फल वालों के ठेलों और फड़ों की भरमार रहती है। बालाजी चौक से स्टेशन रोड पर भी रेलवे स्टेशन तक दोनों ओर दुकानें ही दुकानें हैं। अंसारी रोड शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में एक है। करीब डेढ़ किलोमीटर का यह क्षेत्र भरा पूरा बाजार है। इसके बावजूद यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय अथवा लघुशंकालय नहीं है।
स्थानीय दुकानदार देवेंद्र राणा कहते हैं कि पहले लघुशंका के लिए सोल्जर बोर्ड में चले जाते थे, लेकिन अब वहां गेट बंद कर दिया जाता है। दूर तक भी कोई शौचालय नहीं है। दुकानदार दर्शनलाल बताते हैं कि आसपास के दुकानदारों के यह बड़ी समस्या है। नाले के पास ठेले और फड़ लगी हैं। दुकानदार अमित गर्ग का कहना है कि सोल्जर बोर्ड के बाहर अथवा भीतर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण हो सकता है। इससे आसपास के सभी दुकानदारों की समस्या का समाधान हो जाएगा। दुकानदार मोहम्मद जीशान का कहना है कि पहले कॉलेज में बने शौचालय का इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब कॉलेज प्रबंधन ने भी उसे तुड़वा दिया है। उन्होंने मालवीय चौक के पास शौचालय और लघुशंकालय निर्माण की मांग की है।