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मातमी जुलूस निकाल याद किए इमाम हुसैन

Tue, 11 Oct 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 11 Oct 2016 12:45 AM IST
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matmi joloos nikala
खतौली में मातमी जुलूस ‌निकालते सोगवार। - फोटो : अमर उजाला
खतौली/मोरना। मोहर्रम की आठ तारीख को नगर में मातमी जुलूस निकाला गया। शिया सोगवारों ने इमाम हुसैन की याद में मातमपुर्सी की। जुलूस में अलम और जुलजुनाह बरामद हुआ।
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हवा महल शेखपुरा में मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना गौहर अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम तथा इंसानियत को जिंदा रखने के लिए करबला में शहादत दी थी। हुसैन ने यजीद के सामने हार नहीं मानी तथा अपने कुनबे के साथ इस्लाम के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए। 
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मोहर्रम की आठ तारीख को इमाम हुसैन के छोटे भाई हजरत अब्बास की शहादत बयान की गई, जिसे सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गई। इसके बाद प्रवेज जैदी, समद जैदी, अब्बास जैदी के नेतृत्व में मातमी जुलूस निकाला गया, जो रेलवे रोड, जानसठ रोड, बिददीबाडा, बडा बाजार, ढाकन चौक, सैनी नगर होते हुए इमाम बारगाह हवा महल शेखपुरा पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस में अंजुम जाफरया गढी मुझेडा तथा अंजुमन खमैनी खतौली के सोगवार शामिल थे। मरसिया ख्वानी शैली जैदी, दानिश, शादाब जैदी, शालू जैदी ने की। शुऐब, सज्जाद जैदी, शहजाद जैदी, नवाब अली, रजी हैदर जैदी, मुनीर जैदी, आसिफ जैदी, इसरार जैदी, जुल्फकार जैदी, अरशद ने मातमपुर्सी की।
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उधर, मोरना में अलम्बरदारे हुसैन हजरत अब्बास की यौमे शहादत पर शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकाला। मर्सिया ख्वानी व नोहा ख्वानी कर इमाम हुसैन व करबला के वाक्ये को याद किया। गांव मोरना स्थित इमामबाड़ा गढ़ी सादात में आयोजित हुसैनी मजलिस में शिया सोगवारों ने भाग लेकर इमाम हुसैन के लश्कर के अलम्बरदार रहे हजरत अब्बास की शहादत को याद किया।  

मौलाना गुलाम अब्बास ने फरमाया कि हिंसा पर अहिंसा की विजय का संदेश हमें करबला के वाक्ये से मिलता है। निहत्थे इमाम और उनके साथी शहीद होकर कामयाब हो गये और निर्दयी अधर्मी महापापी राजा यजीद युद्ध जीतने के बाद भी नाकामयाब हो गया। अच्छाई हारकर भी जिन्दा हो गई। बुराई जीतकर भी लानतों की हकदार हो गई। युद्ध में ध्वज उठाने वाले का महत्वपूर्ण स्थान होता है। जनाबे अब्बास ने आखिरी सांस तक हुसैनी परचम को सीने से लगाये रखा तथा जीते जी उसकी अजमत को कम न होने दिया। हुसैन और उनके अकीदतमंदों का मकसद विश्व में शांति स्थापित करना है। 


मजलिस में शबाब हैदर ने मर्सिया ख्वानी की तथा मनव्वर जैदी नोहा ख्वाह रहे। इसके अलावा मोहसिन रजा, शमा हैदर, खुर्रम रजा, मंजर अब्बास, कमर आजम, अफरोज, अली गौहर रजा, रफत अली, शाहिन अकबर, जलाल हैदर, मीसम रजा, नैय्यर रजा, मुन्नु, साबिर अली, वसी हैदर, शददन, बादशाह अली, तनवीर आदि मौजूद रहे। 
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