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सामूहिक नकल प्रकरण : डीआईओएस की भूमिका संदिग्ध, नियम विरुद्ध बनाया गया सेंटर
Thu, 07 Mar 2019 12:08 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Thu, 07 Mar 2019 12:08 AM IST
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मुजफ्फरनगर।
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी बोर्ड परीक्षा में चरथावल ब्लाक के जनता इंटर कॉलेज बाढ़ के एग्जाम सेंटर पर सामूहिक नकल पकड़े जाने के मामले में सीडीओ अर्चना वर्मा ने जांच रिपोर्ट में नकल माफिया से डीआईओएस दफ्तर की संलिप्तता मानी है। गैर राज्य और गैर बोर्ड के अभ्यर्थियों के लिए शासनादेश को ताक पर रखकर परीक्षा सेंटर बनाने में जिला विद्यालय निरीक्षक प्रवीण मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच रिपोर्ट डीएम अजय शंकर पांडेय को सौंप दी गई है।
डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर एसटीएफ ने छापा मारकर 22 फरवरी को जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में सामूहिक नकल का पर्दाफाश किया था। इंटरमीडिएट के प्राईवेट छात्र-छात्राओं को इस परीक्षा केंद्र पर भौतिक विज्ञान के पेपर में इमला बोल-बोलकर नकल कराई जा रही थी। सेंटर पर फर्जी कक्ष निरीक्षक और सॉल्वर पकड़े गए थे। केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य योगेंद्रपाल सिंह और डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक कमर इंतखाब और उसके भाई अशहर नसीम उर्फ अख्तर सहित 17 आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है।
सामूहिक नकल के खुलासे के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की भूमिका की जांच सीडीओ को सौंपी थी। बोर्ड परीक्षा के नियमों, एग्जाम सेंटर बनाने तथा व्यक्तिगत अभ्यर्थियों के लिए केंद्र तय करने आदि बिंदुओं पर जांच की गई। डीआईओएस दफ्तर से तमाम पत्रावली और तथ्य खंगालने के बाद सीडीओ अर्चना वर्मा ने जांच रिपोर्ट बुधवार को डीएम को सौंप दी है।
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जांच रिपोर्ट में गैर राज्यों और गैर बोर्डो के 690 अभ्यर्थियों के लिए जनता इंटर कॉलेज बाढ़ को यूपी बोर्ड का परीक्षा सेंटर बनाने में डीआईओएस दफ्तर की नकल माफिया से संलिप्तता सामने आई है। शासनादेश की अवहेलना कर मुख्यालय से 35 किमी दूर जंगल में बाढ़ कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने में डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
शासन की सुस्ती पर हैरानी
मुजफ्फरनगर। एसटीएफ की कार्रवाई में सामूहिक नकल के खुलासे के बाद भी डीआईओएस पर गाज नहीं गिरने को लेकर शासन की सुस्ती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पखवाड़ा बीत चुका है, लेकिन कार्रवाई को लेकर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। हैरत की बात यह है कि डीआईओएस प्रवीण मिश्रा ही मुकदमे के वादी हैं। सीओ सदर धनंजय कुशवाहा की पुलिस तफ्तीश अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। सीडीओ की जांच रिपोर्ट को लेकर महावीर चौक स्थित डीआईओएस कार्यालय में सुगबुगाहट मची है।
इंतखाब की मर्जी से बना था परीक्षा सेंटर
मुजफ्फरनगर। नकल माफिया कमर इंतखाब और उसके भाई अख्तर ने प्रदेश में सबसे ज्यादा प्राइवेट छात्र-छात्राओं के फार्म जिले से भरवाए थे। जीआईसी रोनी हरजीपुर और मुथरा से पंजीकरण कराया गया। जनता इंटर कॉलेज बाढ़ लगातार दूसरी बार गैर राज्य, गैर बोर्ड के परीक्षार्थियों का सेंटर बना था। शासन के निर्देश पर फिजिक्स का रद्द पेपर जीआईसी मुजफ्फरनगर में आठ मार्च को होगा।
जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी: अर्चना वर्मा
मुजफ्फरनगर। सीडीओ आईएएस अर्चना वर्मा ने कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल मामले की तथ्यपरक जांच की गई है। शासन के नियमों की अनदेखी हुई है। गैर राज्य और गैर बोर्ड के व्यक्तिगत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं का एग्जाम सेंटर मुख्यालय पर बनाए जाने का नियम है। पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।
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डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर एसटीएफ ने छापा मारकर 22 फरवरी को जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में सामूहिक नकल का पर्दाफाश किया था। इंटरमीडिएट के प्राईवेट छात्र-छात्राओं को इस परीक्षा केंद्र पर भौतिक विज्ञान के पेपर में इमला बोल-बोलकर नकल कराई जा रही थी। सेंटर पर फर्जी कक्ष निरीक्षक और सॉल्वर पकड़े गए थे। केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य योगेंद्रपाल सिंह और डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक कमर इंतखाब और उसके भाई अशहर नसीम उर्फ अख्तर सहित 17 आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है।
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सामूहिक नकल के खुलासे के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की भूमिका की जांच सीडीओ को सौंपी थी। बोर्ड परीक्षा के नियमों, एग्जाम सेंटर बनाने तथा व्यक्तिगत अभ्यर्थियों के लिए केंद्र तय करने आदि बिंदुओं पर जांच की गई। डीआईओएस दफ्तर से तमाम पत्रावली और तथ्य खंगालने के बाद सीडीओ अर्चना वर्मा ने जांच रिपोर्ट बुधवार को डीएम को सौंप दी है।
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जांच रिपोर्ट में गैर राज्यों और गैर बोर्डो के 690 अभ्यर्थियों के लिए जनता इंटर कॉलेज बाढ़ को यूपी बोर्ड का परीक्षा सेंटर बनाने में डीआईओएस दफ्तर की नकल माफिया से संलिप्तता सामने आई है। शासनादेश की अवहेलना कर मुख्यालय से 35 किमी दूर जंगल में बाढ़ कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने में डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
शासन की सुस्ती पर हैरानी
मुजफ्फरनगर। एसटीएफ की कार्रवाई में सामूहिक नकल के खुलासे के बाद भी डीआईओएस पर गाज नहीं गिरने को लेकर शासन की सुस्ती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पखवाड़ा बीत चुका है, लेकिन कार्रवाई को लेकर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। हैरत की बात यह है कि डीआईओएस प्रवीण मिश्रा ही मुकदमे के वादी हैं। सीओ सदर धनंजय कुशवाहा की पुलिस तफ्तीश अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। सीडीओ की जांच रिपोर्ट को लेकर महावीर चौक स्थित डीआईओएस कार्यालय में सुगबुगाहट मची है।
इंतखाब की मर्जी से बना था परीक्षा सेंटर
मुजफ्फरनगर। नकल माफिया कमर इंतखाब और उसके भाई अख्तर ने प्रदेश में सबसे ज्यादा प्राइवेट छात्र-छात्राओं के फार्म जिले से भरवाए थे। जीआईसी रोनी हरजीपुर और मुथरा से पंजीकरण कराया गया। जनता इंटर कॉलेज बाढ़ लगातार दूसरी बार गैर राज्य, गैर बोर्ड के परीक्षार्थियों का सेंटर बना था। शासन के निर्देश पर फिजिक्स का रद्द पेपर जीआईसी मुजफ्फरनगर में आठ मार्च को होगा।
जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी: अर्चना वर्मा
मुजफ्फरनगर। सीडीओ आईएएस अर्चना वर्मा ने कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल मामले की तथ्यपरक जांच की गई है। शासन के नियमों की अनदेखी हुई है। गैर राज्य और गैर बोर्ड के व्यक्तिगत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं का एग्जाम सेंटर मुख्यालय पर बनाए जाने का नियम है। पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।