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कबाड़ के रूप में तबाही मचाने आया था लैंडमाइन
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:33 AM IST
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घटनास्थल पर भीड़ को नियंत्रित करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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गांव सरवट के मेन रोड स्थित कबाड़ी की दुकान में फटकर तबाही मचाने वाला विस्फोटक क्या था इस बारे में फिलहाल कोई भी अफसर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। सरवट में मची तबाही का मंजर देखने के बाद आंकलन किया जाए तो विस्फोटक के लैंडमाइन (बारूदी सुरंग) होने की आशंका जताई जा रही है।
यदि आशंका सच साबित हुई तो सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही होगा कि आखिर लैंडमाइन जैसा घातक विस्फोटक कबाड़ी की दुकान तक कहां से और कैसे पहुंचा? लैंडमाइन की पुष्टि के लिए अफसरों का कहना है कि इस संबंध में बम डिस्पोजल स्क्वॉड की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
दरअसल, जो विस्फोटक कबाड़ी की दुकान में फटा, उसका व्यापक असर ऊपर की तरफ चारों ओर बेहद व्यापक तरीके से हुआ है, जिसकी मारक क्षमता करीब 20 मीटर तक रही है। विस्फोट की भयावहता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि दुकान की छत पर कबाड़ी के सिर के बाल व शरीर के लोथड़े चिपके हुए थे, तो सड़क के दूसरी तरफ करीब 15 मीटर की दूरी पर स्थित कब्रिस्तान की दीवार पर भी घायलों के मांस के लोथड़े चिपके नजर आए।
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वहीं, विस्फोट के बाद दुकान के फर्श पर केवल मामूली गड्ढा ही नजर आ रहा था, जो अममून बम फटने की तुलना में काफी कम प्रतीत हो रहा था। उक्त गड्ढे के पास ही एक लोहे का खाली खोल व एक ढ़क्कन पड़ा था, जो अमूमन लैंडमाइन के निचले हिस्से सरीखा था। इसके अलावा पास की दीवार के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर भी छोटे-बड़े छेद स्पष्ट दिख रहे थे, जो अपेक्षाकृत बम फटने पर नहीं मिलते।
वहीं, खाली खोल और ढक्कन को छोड़ कर फटे हुए विस्फोटक का कोई भी अवशेष दुकान अथवा उसके आसपास नहीं मिला। इस संबंध में जहां स्थानीय अफसर विस्फोटक के बारे में अनभिज्ञता जताते रहे, वहीं डीआईजी शरद सचान ने विस्फोटक के खोल की अपने स्तर से जांच करने का भी प्रयास किया।
हालांकि अफसर फिलहाल विस्फोटक के बारे में बम डिस्पोजल स्क्वॉड व आर्मी टीम की जांच के बाद ही पुष्टि करने की बात कह रहे हैं, लेकिन घटनास्थल के सभी साक्ष्य विस्फोटक के लैंडमाइन होने की तरफ ही इशारा कर रहे हैं।
यदि डिस्पोजल स्क्वॉड की जांच में विस्फोटक के लैंडमाइन होने की पुष्टि हो जाती है, तो पुलिस के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि आखिर इतना घातक विस्फोटक शहर से सटे गांव सरवट मेें स्थित कबाड़ी की दुकान में कहां से और कैसे पहुंचा।
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यदि आशंका सच साबित हुई तो सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही होगा कि आखिर लैंडमाइन जैसा घातक विस्फोटक कबाड़ी की दुकान तक कहां से और कैसे पहुंचा? लैंडमाइन की पुष्टि के लिए अफसरों का कहना है कि इस संबंध में बम डिस्पोजल स्क्वॉड की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
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दरअसल, जो विस्फोटक कबाड़ी की दुकान में फटा, उसका व्यापक असर ऊपर की तरफ चारों ओर बेहद व्यापक तरीके से हुआ है, जिसकी मारक क्षमता करीब 20 मीटर तक रही है। विस्फोट की भयावहता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि दुकान की छत पर कबाड़ी के सिर के बाल व शरीर के लोथड़े चिपके हुए थे, तो सड़क के दूसरी तरफ करीब 15 मीटर की दूरी पर स्थित कब्रिस्तान की दीवार पर भी घायलों के मांस के लोथड़े चिपके नजर आए।
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वहीं, विस्फोट के बाद दुकान के फर्श पर केवल मामूली गड्ढा ही नजर आ रहा था, जो अममून बम फटने की तुलना में काफी कम प्रतीत हो रहा था। उक्त गड्ढे के पास ही एक लोहे का खाली खोल व एक ढ़क्कन पड़ा था, जो अमूमन लैंडमाइन के निचले हिस्से सरीखा था। इसके अलावा पास की दीवार के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर भी छोटे-बड़े छेद स्पष्ट दिख रहे थे, जो अपेक्षाकृत बम फटने पर नहीं मिलते।
वहीं, खाली खोल और ढक्कन को छोड़ कर फटे हुए विस्फोटक का कोई भी अवशेष दुकान अथवा उसके आसपास नहीं मिला। इस संबंध में जहां स्थानीय अफसर विस्फोटक के बारे में अनभिज्ञता जताते रहे, वहीं डीआईजी शरद सचान ने विस्फोटक के खोल की अपने स्तर से जांच करने का भी प्रयास किया।
हालांकि अफसर फिलहाल विस्फोटक के बारे में बम डिस्पोजल स्क्वॉड व आर्मी टीम की जांच के बाद ही पुष्टि करने की बात कह रहे हैं, लेकिन घटनास्थल के सभी साक्ष्य विस्फोटक के लैंडमाइन होने की तरफ ही इशारा कर रहे हैं।
यदि डिस्पोजल स्क्वॉड की जांच में विस्फोटक के लैंडमाइन होने की पुष्टि हो जाती है, तो पुलिस के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि आखिर इतना घातक विस्फोटक शहर से सटे गांव सरवट मेें स्थित कबाड़ी की दुकान में कहां से और कैसे पहुंचा।