फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Khatauli Railway Incident - Six

खतौली रेल हादसे में इन लोगों की वजह से बचीं दर्जनों जान, वरना न जाने कितने और मरते

Thu, 24 Aug 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 24 Aug 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
Khatauli Railway Incident - Six
हादसे के घायलों को घटनास्थल से अस्पताल पहुंचाने वाले एंबुलेंस चालक। - फोटो : अमर उजाला
रेलवे सिस्टम की लापरवाही कलिंग-उत्कल दुर्घटना में 23 लोगों की जान लील गई, जबकि 98 यात्री जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। उत्कल हादसे के बाद घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने वाले एंबुलेंस चालकों, ईएमटी स्टॉफ भी दर्दनाक मंजर को देखकर दिल हिल गया। एंबुलेंस में कराहते लोगों की चीख कानों में गूंज रही है। एंबुलेंस चालक बोले कि जीवन में पहली बार ऐसा भयावह हादसा देखा है। 
विज्ञापन


शनिवार को दस राज्यों से यात्रियों को तीर्थस्थल हरिद्वार तक लाने वाली पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस खतौली में हादसे का शिकार हो गई। खतौली रेलवे स्टेशन के किलोमीटर 101 के खंभा नंबर 3, 4 पर टूटी पटरी से गुजरी उत्कल के चार डिब्बे पार हो गए, लेकिन बाकी बोगियां ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। हंसी-खुशी, गाते-बजाते आ रहे यात्रियों के बीच पलभर में ही चीख पुकार मच गई। भीषण हादसे में 23 लोगों की जान गई, जबकि 98 लोग गंभीर घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का रैला घंटेभर में दुर्घटनास्थल पर जुट गया। 
विज्ञापन


हादसे में घायलों को अस्पताल और रेफर करने के लिए जिले में 47 एंबुलेंस कम पड़ गई। जिसके चलते सहारनपुर से 10, शामली से 10 और मेरठ 24 एंबुलेंस का मौके पर बुलाई गई। हादसे के दौरान सबसे पहली एंबुलेंस लेकर पहुंचे चालक सुनील कुमार और ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) अरुण सिंह ने बताया कि जिस वक्त एंबुलेंस मौके पर पहुंची, तत्काल ही लोगों ने करीब छह घायलों को एंबुुलेंस में लिटाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिन्हें लेकर पहले खतौली अस्पताल पहुंचे, बाद में जिला अस्पताल लाए। इस तरह से करीब एंबुलेंस के नॉन स्टॉप तीन चक्कर लगे। दोनों ने कहा कि हादसा इतना भयावह था कि एंबुलेंस में घायलों की दर्द भरी कराह अभी तक महसूस कर रहे हैं। चार दिन बीतने के बाद भी आंखों के सामने वही भयावह मंजर तैर रहा है। 

दूसरी एंबुलेंस पर चालक पवन कुमार और राहुल सिंह ईएमटी की हादसे कहानी बताते हुए आंखें नम हो गई। राहुल ने कहा कि जिंदगी में पहली बार ऐसा मंजर देखा है कि चारों ओर घायल पड़े थे और चीखती-चिल्लाते लोगों को देखा नहीं जा रहा था। उनकी एंबुलेंस में लगातार कई शवों को भेजा गया है। उनकी हालत देखकर रुह कांप उठी। खून से लथपत महिला, बुजुर्ग और बच्चों को देखा नहीं गया। अन्य एंबुलेंस के चालक सत्यवीर, नीरज कुमार, सुनील ने कहा कि भगवान कहीं ऐसा हादसा दोबारा न हो, जिसमें कई घरों के चिराग बुझे और किसी भाई, बेटा, पिछड़ गया है। 


वन-वे ने बचाई दर्जनभर जाने 
मुजफ्फरनगर। एंबुलेंस प्रभारी काव्या शर्मा ने बताया कि हादसे वाले रोज जिला अस्पताल तक शुुरुआत में एंबुलेंस पहुंचने में भीड़, ट्रैफिक के कारण दिक्कतें हुई। बाद हाईवे को आला अधिकारियों ने वन-वे कराया, जिसके बाद एंबुलेंस को स्पीड से दौड़ाकर अस्पताल तक लाई गई। एंबुलेंस में राजस्थान, ग्वालियर, पुरी, मुनैरा मध्य प्रदेश के घायलों को अधिक लाया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed