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एचआईवी पॉजीटिव दंपति दे सकते हैं स्वस्थ बच्चे को जन्म
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:23 AM IST
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डेमो पिक: एचआईवी संक्रमित
- फोटो : Getty
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एचआईवी पॉजीटिव मां-बाप एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकते हैं। अगर मां को एड्स नहीं है तो बच्चे के पॉजीटिव होने के कोई चांस नहीं है। यदि मां पीड़ित है तो बच्चे के एचआईवी पॉजीटिव होने के 35 प्रतिशत चांस हैं। इसमें जागरूकता से 25 प्रतिशत चांस को कम किया जा सकता है। शरीर के अंदर जीपी 135 एंटी बॉडी है, जो एचआईवी के हमले को रोकता है।
जिले में एचआईवी पॉजीटिव 30 से 35 महिलाएं प्रतिवर्ष मां बन रही हैं। दो साल में जनपद में 17 बच्चे एचआईवी पॉजीटिव पाए गए हैं। एड्स पीड़ित जो मां बच्चे को जन्म दे रही हैं, उनके बच्चे के पॉजीटिव होने के 35 प्रतिशत चांस हैं। इसमें दस प्रतिशत चांस इसलिए हैं, क्योंकि वह अपनी मां के गर्भ में पल रहा है। 15 प्रतिशत पॉजीटिव होने के चांस जन्म के दौरान हो जाते हैं और दस प्रतिशत चांस मां का दूध पीने के कारण।
जिले में एड्स विभाग के प्रभारी डॉ वीके जौहरी कहते हैं कि यदि बच्चे का जन्म आपरेशन से किया जाए तो 15 प्रतिशत के खतरे से बचा जा सकता है। दस प्रतिशत के खतरे से स्तनपान न कराकर बचा जा सकता है। ये दोनों चीजें जागरूकता से होंगी। केवल गर्भ में रहने के कारण बच्चे के एचआईवी पॉजीटिव होने के दस प्रतिशत चांस रह जाते हैं।
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ऐसे कई माता-पिता हैं, जो पॉजीटिव हैं और उनका बच्चा स्वस्थ है। एंटी बॉडी जीपी 135 शरीर में एचआईवी के विषाणुओं को रोकता है, जो काफी प्रभावशाली है। बच्चे एचआईवी पॉजीटिव हैं या नहीं, यह उसके 18 महीने का होने के बाद पता लगता है। इससे यह साफ है कि एचआईवी पॉजीटिव होने के बाद भी मां-बाप जागरुक हैं और लगातार डॉक्टर के संपर्क हैं तो स्वस्थ संतान की उत्पत्ति कर सकते हैं।
बीमारी को 81 प्रतिशत तक कर सकते हैं कंट्रोल : जौहरी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में एड्स विभाग के प्रभारी डॉ वीके जौहरी कहते हैं कि नियमित दवा लेने से एचआईवी के विषाणु 81 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं, जो शरीर में पकड़ में भी नहीं रहते। एक विषाणु एक दिन में एक करोड़ विषाणु बनाता है। दवा से नए विषाणु बनने बंद हो जाते हैं और बने हुए घटते चले जाते हैं। गर्भवती महिला यदि नियमित दवा लेती है तो एचआईवी के विषाणुओं का प्रभाव कम हो जाता है।
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जिले में एचआईवी पॉजीटिव 30 से 35 महिलाएं प्रतिवर्ष मां बन रही हैं। दो साल में जनपद में 17 बच्चे एचआईवी पॉजीटिव पाए गए हैं। एड्स पीड़ित जो मां बच्चे को जन्म दे रही हैं, उनके बच्चे के पॉजीटिव होने के 35 प्रतिशत चांस हैं। इसमें दस प्रतिशत चांस इसलिए हैं, क्योंकि वह अपनी मां के गर्भ में पल रहा है। 15 प्रतिशत पॉजीटिव होने के चांस जन्म के दौरान हो जाते हैं और दस प्रतिशत चांस मां का दूध पीने के कारण।
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जिले में एड्स विभाग के प्रभारी डॉ वीके जौहरी कहते हैं कि यदि बच्चे का जन्म आपरेशन से किया जाए तो 15 प्रतिशत के खतरे से बचा जा सकता है। दस प्रतिशत के खतरे से स्तनपान न कराकर बचा जा सकता है। ये दोनों चीजें जागरूकता से होंगी। केवल गर्भ में रहने के कारण बच्चे के एचआईवी पॉजीटिव होने के दस प्रतिशत चांस रह जाते हैं।
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ऐसे कई माता-पिता हैं, जो पॉजीटिव हैं और उनका बच्चा स्वस्थ है। एंटी बॉडी जीपी 135 शरीर में एचआईवी के विषाणुओं को रोकता है, जो काफी प्रभावशाली है। बच्चे एचआईवी पॉजीटिव हैं या नहीं, यह उसके 18 महीने का होने के बाद पता लगता है। इससे यह साफ है कि एचआईवी पॉजीटिव होने के बाद भी मां-बाप जागरुक हैं और लगातार डॉक्टर के संपर्क हैं तो स्वस्थ संतान की उत्पत्ति कर सकते हैं।
बीमारी को 81 प्रतिशत तक कर सकते हैं कंट्रोल : जौहरी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में एड्स विभाग के प्रभारी डॉ वीके जौहरी कहते हैं कि नियमित दवा लेने से एचआईवी के विषाणु 81 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं, जो शरीर में पकड़ में भी नहीं रहते। एक विषाणु एक दिन में एक करोड़ विषाणु बनाता है। दवा से नए विषाणु बनने बंद हो जाते हैं और बने हुए घटते चले जाते हैं। गर्भवती महिला यदि नियमित दवा लेती है तो एचआईवी के विषाणुओं का प्रभाव कम हो जाता है।