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नोटबंदी ने किसानों की बढ़ाई मुसीबतें
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 06 Dec 2016 12:11 AM IST
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नोटबंदी के कारण किसानों को खाद और बीज खरीदने के लिए दिक्कत शुरू हो गई है। रोहाना समिति परिक्षेत्र में किसानों का गन्ना भुगतान भी खातों में आना शुरू हो गया है, लेकिन कई-कई घंटों लाइन में लगने के बावजूद बैंक आधे से अधिक लोगों को नो कैश के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। एसबीआई में सोमवार को कतार में लगे लोगों ने जमकर हंगामा किया।
हर साल गन्ना भुगतान के चलते दिसंबर और जनवरी के महीनों में किसानों की जेबें भरी रहती थीं। किसान को गेहूं बुवाई में खाद, डीजल और बीज की जरूरत पड़ती है। इस बार भुगतान में चीनी मिलों की मेहरबानी हुई तो नोटबंदी ने किसानों के अरमान पर पानी फेर दिया। तितावी, रोहाना और खाईखेड़ी ने आधे से ज्यादा भुगतान खातों में भेज दिया, लेकिन ग्रामीण अंचलों में बैंक कैश देने में कंजूसी कर रहे हैं। जो कैश आता है उसमें काफी कैश पुलिस और स्टाफ मिलीभगत कर चहेतों को दे रहा है। जिससे लाइन में लगे लोगों को मायूस होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा हालत एसबीआई की है। यहां सबसे लंबी लाइन लगती है।
करीब छह छह घंटे तक लाइन में लगने के बाद दो बजे ही कैश खत्म होने की बात कहकर वापस किया तो लोगों ने जमकर हंगामा काटा। पंजाब नेशनल बैंक में पहली बार 500 के नए नोटों का वितरण किया गया। यहां सिर्फ चार हजार रुपये प्रति व्यक्ति दिए गए। सुशील कुमार, जनेश्वर कुमार, योगेश कुमार लुहारी, नवीन शर्मा का आरोप है कि पहले बैंक कर्मी सांठगांठ कर कुछ लोगों की काली कमाई को सफेद करने में लगे हैं। गांव के हर बैंकों पर पुलिसकर्मी में नोटबंदी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। ड्यूटी के नाम पर वह भी मनचाहे लोगों को गुपचुप तरीके से नोट बदलवाने में पीछे नहीं है। एक सिपाही तो पूरे दिन इसी काम में रहता है।
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हर साल गन्ना भुगतान के चलते दिसंबर और जनवरी के महीनों में किसानों की जेबें भरी रहती थीं। किसान को गेहूं बुवाई में खाद, डीजल और बीज की जरूरत पड़ती है। इस बार भुगतान में चीनी मिलों की मेहरबानी हुई तो नोटबंदी ने किसानों के अरमान पर पानी फेर दिया। तितावी, रोहाना और खाईखेड़ी ने आधे से ज्यादा भुगतान खातों में भेज दिया, लेकिन ग्रामीण अंचलों में बैंक कैश देने में कंजूसी कर रहे हैं। जो कैश आता है उसमें काफी कैश पुलिस और स्टाफ मिलीभगत कर चहेतों को दे रहा है। जिससे लाइन में लगे लोगों को मायूस होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा हालत एसबीआई की है। यहां सबसे लंबी लाइन लगती है।
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करीब छह छह घंटे तक लाइन में लगने के बाद दो बजे ही कैश खत्म होने की बात कहकर वापस किया तो लोगों ने जमकर हंगामा काटा। पंजाब नेशनल बैंक में पहली बार 500 के नए नोटों का वितरण किया गया। यहां सिर्फ चार हजार रुपये प्रति व्यक्ति दिए गए। सुशील कुमार, जनेश्वर कुमार, योगेश कुमार लुहारी, नवीन शर्मा का आरोप है कि पहले बैंक कर्मी सांठगांठ कर कुछ लोगों की काली कमाई को सफेद करने में लगे हैं। गांव के हर बैंकों पर पुलिसकर्मी में नोटबंदी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। ड्यूटी के नाम पर वह भी मनचाहे लोगों को गुपचुप तरीके से नोट बदलवाने में पीछे नहीं है। एक सिपाही तो पूरे दिन इसी काम में रहता है।
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