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किसानों का सर दर्द बना गोवंश, किसानों की फसलों को कर रहे बर्बाद
Fri, 11 Jan 2019 12:14 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Fri, 11 Jan 2019 12:14 AM IST
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ग्रामीणों द्वारा पकड़ा गया गोवंश।
- फोटो : अमर उजाला
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बुढ़ाना में गोमाता व गोवंश किसानों के लिए सिर का दर्द बन गए है। पशु पालकों व किसानों को गोमाता व गोवंश का पालना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। गोमाता व गोवंश की खरीद फरोख्त न होने के कारण पशु पालक उन्हें सड़कों पर लावारिस छोडने को मजबूर हो गए है। लावारिस गोमाता व गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। खेतों से भगाने पर होने वाले हमलों केे कारण किसान को गोमाता व गोवंश से जान माल का खतरा बन गया है। प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया था कि दस जनवरी तक कोई गाय या गोवंश सड़क पर नहीं दिखाई देगा, सभी को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ।
सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत का कहना है कि विदेशी नश्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे हैं। लावारिस पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, जिसका उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसका खामियाज किसान व देश को उठाना पड़ेगा। बिराल गांव के पूर्व प्रधान रणदीप सिंह उर्फ दीपक का कहना है कि सरकार को लावारिस गोवंश के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
रालोद नेता बालकिशोर त्यागी का कहना है कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीति के कारण गोवंश लावारिस होने पर मजबूर हो गए हैं। किसान अथवा पशुपालक अब गाय रखने में व पालने से बचने लगा है फुुगाना गांव के प्रधान जितेंद्र मलिक का कहना है कि गोवंश अथवा गोमाता की हत्या करना गलत है। सरकार की नीति के कारण गोवध पर लगाम तो लगी है, लेकिन सरकार द्वारा इनके पालन-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की है। समय रहते सरकार ने किसानों की इस समस्या का समाधान नहीं किया तो यह समस्या एक दिन सरकार के भी सिर का दर्द बन जाएगी।
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कसबे में गोवंश को अस्थायी गोशाला में रखा
बुढ़ाना नगर पंचायत के ईओ ओमगिरि ने बताया कि शासन के आदेश पर कसबे में घूमने वाली करीब दो दर्जन गाय और गोवंश को बृहस्पतिवार शाम को जोगपुरा मंदिर के पास बनाई गई अस्थायी गोशाला में एकत्र कर लिया गया है। नगर पंचायत और नागरिकों के सहयोग से उनके चारे और पानी की व्यवस्था की गई है।
चारागाह चिह्नित किए जाएंगे
बुढ़ाना एसडीएम नितिन गौर ने बताया कि कसबे में आवास घूमने वाले गाय और गोवंश की व्यवस्था कर ली गई है। देेहात में घूमने वाली गाय और गोवंश की व्यवस्था चारागाहों को चिहिनत कर उनकी चहारदिवारी करके करने की योजना है।
बलवाखेड़ी में ग्रामीणों ने पकड़े आवारा पशु
चरथावल के बलवाखेड़ी के ग्रामीणों ने फसलों को बर्बाद कर रहे आवारा पशुओं को पकड़ कर गांव के बाहरी छोर पर एक खाली प्लाट में इकट्ठा कर लिया। जिला मुख्यालय से सूचना के बावजूद शाम तक कोई अधिकारी और कर्मचारी सुपुर्दगी में लेने के लिए नहीं पहुंचा। कस्बे एवं देहात में आवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए मुसीबतों से भरा साबित हो रहा है। आए दिन आवारा पशु ईख, बरसीम और सरसों के खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा अगेती प्रजाति की गेहूं की बुवाई के बाद निकले पौधों के खेतों में भी घुसकर आवारा पशु बर्बाद कर रहे हैं।
यही वजह है कि आवारा पशुओं को गांवों में दिन में लोगों ने मकान और घेरों के दरवाजे बंद रखना शुरू कर दिया है, ताकि घरेलू सामान का नुकसान से बचा जा सके। किसान दिनेश त्यागी, देवदत्त रूढा ने बताया कि संपन्न किसानों ने अब आवारा पशु से फसलों की हिफाजत को कांटों के तारबंदी कर लेते हैं, लेकिन छोटे किसानों की फसलें भूखे आवारा पशु बर्बाद कर रहे हैं। हाल में योगी सरकार ने सख्ती से आवारा पशुओं को गोशालाओं में भिजवाने के आदेश पर अमल नहीं हो पाने से ग्रामीण परेशान है।
बलवाखेडी के अशोक पुंडीर ने बताया कि बुधवार को करीब 36 पशुओं को पकड़कर पंचायत के अलावा जिला मुख्यालय पर तहसीलदार और डीएम तक को सुपुर्दगी में लेने के लिए सूचित किया। हालांकि शाम तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण अशोक पुंडीर, अंकुर राणा, सोनू राणा, नेत्रपाल सिंह, कुलदीप सिंह, सोमपाल सिंह, नीटू, चेतन, विकास, नीरज आदि ने प्रशासन के इस रवैये पर आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने आवारा पशुओं की देखभाल की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
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सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत का कहना है कि विदेशी नश्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे हैं। लावारिस पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, जिसका उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसका खामियाज किसान व देश को उठाना पड़ेगा। बिराल गांव के पूर्व प्रधान रणदीप सिंह उर्फ दीपक का कहना है कि सरकार को लावारिस गोवंश के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
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रालोद नेता बालकिशोर त्यागी का कहना है कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीति के कारण गोवंश लावारिस होने पर मजबूर हो गए हैं। किसान अथवा पशुपालक अब गाय रखने में व पालने से बचने लगा है फुुगाना गांव के प्रधान जितेंद्र मलिक का कहना है कि गोवंश अथवा गोमाता की हत्या करना गलत है। सरकार की नीति के कारण गोवध पर लगाम तो लगी है, लेकिन सरकार द्वारा इनके पालन-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की है। समय रहते सरकार ने किसानों की इस समस्या का समाधान नहीं किया तो यह समस्या एक दिन सरकार के भी सिर का दर्द बन जाएगी।
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कसबे में गोवंश को अस्थायी गोशाला में रखा
बुढ़ाना नगर पंचायत के ईओ ओमगिरि ने बताया कि शासन के आदेश पर कसबे में घूमने वाली करीब दो दर्जन गाय और गोवंश को बृहस्पतिवार शाम को जोगपुरा मंदिर के पास बनाई गई अस्थायी गोशाला में एकत्र कर लिया गया है। नगर पंचायत और नागरिकों के सहयोग से उनके चारे और पानी की व्यवस्था की गई है।
चारागाह चिह्नित किए जाएंगे
बुढ़ाना एसडीएम नितिन गौर ने बताया कि कसबे में आवास घूमने वाले गाय और गोवंश की व्यवस्था कर ली गई है। देेहात में घूमने वाली गाय और गोवंश की व्यवस्था चारागाहों को चिहिनत कर उनकी चहारदिवारी करके करने की योजना है।
बलवाखेड़ी में ग्रामीणों ने पकड़े आवारा पशु
चरथावल के बलवाखेड़ी के ग्रामीणों ने फसलों को बर्बाद कर रहे आवारा पशुओं को पकड़ कर गांव के बाहरी छोर पर एक खाली प्लाट में इकट्ठा कर लिया। जिला मुख्यालय से सूचना के बावजूद शाम तक कोई अधिकारी और कर्मचारी सुपुर्दगी में लेने के लिए नहीं पहुंचा। कस्बे एवं देहात में आवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए मुसीबतों से भरा साबित हो रहा है। आए दिन आवारा पशु ईख, बरसीम और सरसों के खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा अगेती प्रजाति की गेहूं की बुवाई के बाद निकले पौधों के खेतों में भी घुसकर आवारा पशु बर्बाद कर रहे हैं।
यही वजह है कि आवारा पशुओं को गांवों में दिन में लोगों ने मकान और घेरों के दरवाजे बंद रखना शुरू कर दिया है, ताकि घरेलू सामान का नुकसान से बचा जा सके। किसान दिनेश त्यागी, देवदत्त रूढा ने बताया कि संपन्न किसानों ने अब आवारा पशु से फसलों की हिफाजत को कांटों के तारबंदी कर लेते हैं, लेकिन छोटे किसानों की फसलें भूखे आवारा पशु बर्बाद कर रहे हैं। हाल में योगी सरकार ने सख्ती से आवारा पशुओं को गोशालाओं में भिजवाने के आदेश पर अमल नहीं हो पाने से ग्रामीण परेशान है।
बलवाखेडी के अशोक पुंडीर ने बताया कि बुधवार को करीब 36 पशुओं को पकड़कर पंचायत के अलावा जिला मुख्यालय पर तहसीलदार और डीएम तक को सुपुर्दगी में लेने के लिए सूचित किया। हालांकि शाम तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण अशोक पुंडीर, अंकुर राणा, सोनू राणा, नेत्रपाल सिंह, कुलदीप सिंह, सोमपाल सिंह, नीटू, चेतन, विकास, नीरज आदि ने प्रशासन के इस रवैये पर आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने आवारा पशुओं की देखभाल की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है।